पहला चुनाव हारने के बाद हरबंस कपूर ने बनाया अनोखा रिकॉर्ड, जानिए 8 बार के विधायक हरबंस कपूर के बारे में सबकुछ

पहला चुनाव हारने के बाद हरबंस कपूर ने बनाया अनोखा रिकॉर्ड, जानिए 8 बार के विधायक हरबंस कपूर के बारे में

देहरादून, 13 दिसंबर। भाजपा के सबसे वरिष्ठ विधायक हरबंस कपूर का निधन भाजपा ही नहीं उत्तराखंड की राजनीति के लिए बड़ी क्षति है। हरबंस कपूर का 75 साल की उम्र में निधन हुआ। लेकिन कपूर ने 40 साल तक लगातार बतौर विधायक क्षेत्र के विकास के लिए काम किया। वे वर्तमान में कैंट विधानसभा से विधायक थे, उत्तराखंड बनने के बाद से कपूर ने इसी सीट से चुनाव लड़ा और हमेशा विधानसभा में पहुंचे।

Harbans Kapoor made a unique record after losing the first election, know everything about 8-time MLA Harbans Kapoor

1985 में पहला चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए
7 जनवरी 1946 को जन्में हरबंस कपूर ने छात्र जीवन में ही राजनीति में कदम रख दिया था, कपूर देहरादून स्थित डीएवी कॉलेज में जनरल सेकेट्री बने। बीएससी, एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे सक्रिय राजनीति में उतर गए। 1985 में हरबंस कपूर ने तब उत्तर प्रदेश की देहरादून शहर सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन वे कांग्रेस के हीरा सिंह बिष्ट से चुनाव हार गए। इसके बाद 1989 देहरादून शहर सीट से उन्होंने हीरा सिंह बिष्ट को चुनाव में हराकर हार का बदला ले लिया और तब से लगातार चुनाव लड़ते गए और रिकॉर्ड बनाते गए। हरबंस कपूर ने पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी, गुलाब सिंह के रिकॉर्ड की बराबरी की जो कि आठ बार विधायक रहे हैं। 2007 में जब पहली बार उत्तराखंड में भाजपा की निर्वाचित सरकार बनी तो कपूर को स्पीकर बनाया गया। छह साल पहले मेदांता अस्पता में हरबंस कपूर की ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी।
राजनीति की पाठशाला मानता है विपक्ष
हरबंस कपूर को उनकी सादगी के लिए जाना जाता है। कपूर हमेशा छोटी गाड़ियों या स्कूटर से ही चलते थे। क्षेत्र में जनता के बीच कपूर हमेशा परिवार की तरह ही रहते थे, वे सुबह-सुबह लोगों के घर पहुंचकर चाय पीने पहुंच जाते थे। हरबंस कपूर जितने भाजपा के कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच खास छवि रखते थे, उसी तरह विपक्ष भी उन्हें राजनीति की पाठशाला मानता था। कांग्रेस यह जानती थी कि जब तक हरबंस कपूर कैंट सीट से चुनाव लड़ेगे तब तक भाजपा को हराना मुश्किल है। खुद हरीश रावत ने इस बात को स्वीकारा है।

पूर्व सीएम हरीश रावत ने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि

उत्तराखंड के वरिष्ठ विधायक और स्वभाव से अजातशत्रु, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड, दोनों विधानसभाओं में देहरादून का लगातार प्रतिनिधित्व करते आ रहे। हरबंस कपूर जी हम लोगों के बीच नहीं रहे, सहसा विश्वास नहीं होता, हम यह मानकर के चलते थे कि इस बार की भी इनिंग उन्हीं की है, जनता से इतना गहरा उनका संबंध था कि वो दूसरे जनप्रतिनिधियों के लिए ईर्ष्या का विशेष थे कि कैसे इतने लोगों को अपने साथ, इतने लंबे समय तक वो साद करके रख पाए। कभी-कभी उनसे कहता था कि आपको अब एक कॉलेज खोल लेना चाहिए जिसमें यह लिखा जाए how to win election college और उसमें आप नेता लोगों को टिप्स दीजिए कि चुनाव कैसे जीते जाते हैं! और सबके भले यहां तक कि हम प्रतिद्वंदी हैं राजनीतिक रूप से लेकिन हमारे भी वो बहुत भले थे ऐसा विलक्षण स्वभाव जन सेवा में निरंतर कार्यरत स्कूटर पकड़ा किसी की भी शादी-ब्याह में कहीं पर भी खड़े हो गए, ऐसे हरबंस कपूर का जाना बहुत बड़ी रिक्तता छोड़कर के गया है, बहुत खालीपन छोड़कर के गया है।

कैंट पर नया चेहरा लाना भाजपा के लिए चुनौती
हरबंस कूपर के चुनाव से ठीक पहले चले जाना भाजपा के लिए बहुत बड़ी क्षति मानी जा रही है। कैंट सीट से कपूर के अलावा कोई भी नेता अभी तक उनको टक्कर नहीं दे पाए। अब भाजपा के लिए इस सीट पर नया चेहरा लाना आसान नहीं होगा। कैंट सीट पर पंजाबी समुदाय का अच्छा खासा वोटबैंक है। ऐसे में भाजपा के लिए कैंट सीट पर सभी समीकरणों को साधने का भी बड़ा चेलेंज खड़ा हो गया है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+