'सरकार को हर चुनाव में हार का डर': कांग्रेस ने लगाए ये गंभीर आरोप, भाजपा ने क्या दिए तर्क, जमकर हो रही सियासत

उत्तराखंड में निकायों के बाद पंचायतों को भी ​प्रशासकों के हवाले करने पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। अब इस मामले में सियासत भी गरमाने लगी है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार को हर चुनाव में हार का डर है,इसलिए वह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लगातार टाल रही है।

भाजपा ने पंचायतों में प्रशासक की नियुक्तियों को संवैधानिक बताते हुए कांग्रेस के आरोपों को सिरे से नकारते हुए प्रदेश प्रवक्ता सुरेश जोशी ने पलटवार किया, इनकी सरकारों के नाम तो 22 वर्षों तक चुनाव नहीं कराने का रिकॉर्ड भी है। साथ ही दावा किया, नई नगर पंचायत के परिसीमन समेत अन्य प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बाद जब भी चुनाव होगा, भाजपा सौ फीसदी सीटों पर जीतने वाली है।

Government afraid of defeat every election Congress serious allegations what arguments BJP politics is going on fiercely

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने प्रदेश की धामी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार राज्य में छात्र संघ, सहकारिता, निकाय और अब पंचायत चुनाव से बचने का प्रयास कर रही है। धस्माना ने कहा कि राज्य के सबसे बड़े महाविद्यालय डीएवी कॉलेज समेत कई अन्य कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव जानबूझकर नहीं कराए गए।

सरकार को यह आशंका थी कि उनके समर्थित छात्र संगठन चुनाव हार जाएंगे। इसी तरह, सहकारिता चुनाव भी पिछले लंबे समय से विभिन्न बहानों से टाले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष से राज्य के सभी नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में चुनाव नहीं कराए गए हैं।

हाई कोर्ट में बार-बार हलफनामा देकर भी सरकार ने निकाय चुनाव कराने से परहेज किया। इसके चलते प्रदेश की जनता को बिना जनप्रतिनिधियों के रहना पड़ रहा है और उनकी समस्याएं भगवान भरोसे छोड़ दी गई हैं। धस्माना ने आगे कहा कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने अब तक पंचायत चुनाव कराने की कोई ठोस पहल नहीं की है। पंचायतों में प्रशासन नियुक्त करके लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नजरअंदाज किया गया है।

राज्य निर्वाचन आयोग पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आयोग न तो निकाय चुनाव कराने में सक्षम है और न ही पंचायत चुनाव कराने में। ऐसे में बेहतर होगा कि निर्वाचन आयोग के दफ्तर में ताले डाल दिए जाएं। कांग्रेस पार्टी ने घोषणा की है कि प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनाव कराने के लिए पूरे राज्य में निकाय और पंचायत प्रतिनिधियों का सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसके जरिए प्रदेश सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।

भाजपा प्रवक्ता सुरेश जोशी ने कांग्रेस पर पलटवार कर कहा कि पंचायत राज एक्ट के तहत, न तो उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाया जा सकता है और न ही तमाम चुनावी प्रक्रिया पूरी होने से पहले निर्वाचन संपन्न कराया जा सकता है। लिहाजा संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत सरकार के पास एक ही विकल्प था, प्रशासक को नियुक्त कर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के कार्यों को सुचारू रखना।

लेकिन हालिया चुनावों में पराजय के बाद, बौखलाहट में विपक्ष पंचायत चुनाव पर अजीबोगरीब तर्क दे रहे हैं। क्योंकि इससे पहले भी सबकी सरकारों में अनेकों बार पंचायत में 6 महीने से लेकर 1 वर्ष तक का विस्तार कई बार दिया गया। स्वयं कांग्रेस पार्टी की सरकारों के नाम तो 22 वर्षों तक पंचायत चुनाव नहीं करने के रिकॉर्ड रहे हैं।

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