G20: विश्व पटल पर छाई उत्तराखंड की संस्कृति, संगीत और आध्यात्म, विदेशी मेहमानों को भायी, जानिए कैसे
दिल्ली में आयोजित हुए जी-20 सम्मेलन में एक तरफ देश ने पूरे विश्व में अपनी खास छवि बनाई है, तो वहीं उत्तराखंड की जी-20 के जरिए संस्कृति, संगीत और आध्यात्म पूरे विश्व पटल तक पहुंची है।

देवभूमि उत्तराखंड ने दिल्ली में हुए जी-20 सम्मेलन के दौरान अपनी एक अलग छाप छोड़ी है। उत्तराखंड की विधाएं विश्व प्रसिद्ध हैं। पहाड़ की स्वरागिनी उप्रेती सिस्टर्स, नीरज उप्रेती और ज्योति उप्रेती ने इंदिरा गांधी एयरपोर्ट मे मेहमानों का झोड़ा चांचरी गाकर स्वागत किया। जो भी इस संगीत को सुन रहा था, वह मंत्र मुग्ध हो रहा था। जिसकी हर किसी ने तारीफ की। सोशल मीडिया पर दोनो बहनों की संगीत का वीडियो वायरल हो रहा है।
जी-20 समिट में भारत आए विदेशी मेहमानों को एक खास पुस्तक भेंट की गई। इसमें भारत के कई मंदिरों के साथ ही अन्य कई रहस्यमयी स्थानों के बारे में बताया गया है। 55 पेज की इस पुस्तक में देहरादून के टपकेश्वर महादेव मंदिर को भी स्थान दिया गया। इसमें टपकेश्वर महादेव मंदिर के चित्र के साथ ही मंदिर का नाम और इसके रहस्य के बारे में लिखा हुआ है। कहा जाता है कि टपकेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास महाभारत काल से भी जुड़ा हुआ है। देहरादून का यह सबसे पुराना मंदिर है। मंदिर की गुफा में शिवलिंग पर पानी की बूंदें लगातार गिरती रहती हैं। इसी कारण इस मंदिर का नाम टपकेश्वर रखा गया।
जी-20 सम्मेलन के दौरान प्रगति मैदान में देवभूमि उत्तराखंड के हैंडक्राफ्ट और उत्पादों का स्टॉल लगाया गए है। बिच्छू घास, कंडाली से बने जैकेट खास आकर्षण का केंद्र रहे। इसके अलावा स्टॉल से आकर्षित होकर विदेशी मेहमानों ने उत्पादों की खरीदारी की। इन उत्पादों में पिथौरागढ़ के ऊनी कार्पेट, अल्मोड़ा ट्वीड ऊनी स्कार्फ, डूंडा शॉल, नैनीताल ऐपण, केदारनाथ व अन्य धार्मिक स्थलों की काष्ठ प्रतिकृति, उधमसिंहनगर की मूंज घास, बागेश्वर के ताम्र उत्पाद, प्राकृतिक फाइबर जैकेट जैसे उत्पाद के स्टॉल लगाए गए है।












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