डेढ़ KM का सफर डोली से महावतार बाबा की गुफा पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, जानिए कहां और क्यों है खास
Cave of Mahavatar Baba पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उत्तराखंड दौरे पर हैं। इस दौरान पूर्व राष्ट्रपति ने अल्मोड़ा में महावतार बाबा की गुफा में ध्यान लगाया। महावतार बाबा की गुफा दूनागिरी की पहाड़ियों में स्थित है। ऐतिहासिक गुफा तक पहुंचने के लिए लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी खड़ी चढ़ाई को पार करना पड़ता है।
महावतार बाबा की गुफा की यात्रा से पूर्व जब पूर्व राष्ट्रपति का काफिला रतखाल गांव पहुंचा तो ग्रामीण महिलाओं ने पारंपरिक परिधान पिछोड़ा पहन उनका फूल मालाओं से भव्य स्वागत किया ।करीब तीन घंटे चली इस अध्यात्मिक यात्रा के बाद उन्होंने इस अनुभव को अद्भुत और आत्मशांति प्रदान करने वाला बताते हुए कहा कि वे पुनः बाबा के दरबार में आने की इच्छा रखते हैं।

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अल्मोड़ा के द्वाराहाट में दो दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा पर पहुंचे। उन्होंने दूनागिरी की पवित्र वादियों में स्थित महावतार बाबा की गुफा में पहुंचकर ध्यान लगाया। पांडवखोली के निकट घने जंगलों के बीच स्थित इस ऐतिहासिक गुफा तक पहुंचने के लिए उन्होंने लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी खड़ी चढ़ाई को डोली के माध्यम से पार किया।
गुफा पहुंचने से पूर्व पूर्व राष्ट्रपति ने स्मृति भवन में लगभग आधा घंटा व्यतीत किया, जहां उन्होंने योगदा आश्रम के सन्यासियों से महावतार बाबा, लाहिड़ी महाशय, युक्तेश्वर गिरी और परमहंस योगानंद जैसे महान संतों के जीवन और उपदेशों के साथ क्रिया योग बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।
क्यों खास है गुफा
ऐसा कहा जाता है कि महावतार बाबाजी ने 1861 में इस गुफा में लाहिड़ी महाशय को शिक्षित किया था और क्रिया योग की शिक्षा दी थी, जो उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में द्वाराहाट से 25 किलोमीटर और कुकुचिना (दूनागिरी पर्वत) से 3 किलोमीटर दूर स्थित है। महावतार बाबाजी गुफा हिमालय क्षेत्र की सबसे आध्यात्मिक गुफा है, जो क्रिया योग का उद्गम स्थल है और जहां योग गुरु लाहिड़ी महाशय ने सीधे महाअवतार बाबा जी से क्रिया योग की शिक्षा प्राप्त की थी। हर दिन कई तीर्थयात्री और क्रिया योगी गुफा में आते हैं।
कब और क्या है टाइमिंग
महावतार बाबाजी गुफा में जाने से पहले आपको समय का ध्यान रखना होगा।गर्मियों (1 मार्च से लेकर 30 सितंबर) में सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक और सर्दियों ( 1 अक्टूबर से लेकर 28 फरवरी) में सुबह 10 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक ही आ सकते हैं। इस गुफा में दर्शन करने के लिए अकेले न आए। आप ग्रुप के साथ यहां आ सकते हैं।












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