पूर्व सीएम हरीश रावत की फेसबुक पोस्ट से उड़ सकती है कांग्रेस की नींद, क्या हरदा लेने वाले हैं कोई बड़ा फैसला
पूर्व सीएम हरीश रावत की फेसबुक पोस्ट से उड़ सकती है कांग्रेस की नींद
देहरादून, 22 दिसंबर। उत्तराखंड में कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए पूरा जोर लगा रही है। लेकिन सीएम का चेहरा न घोषित करने का पार्टी को फायदा होगा या नुकसान। ये चिंता कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में हो या न हो, पूर्व सीएम हरीश रावत में जरुर नजर आ रही है। ऐसे में हरीश रावत के सोशल मीडिया पोस्ट पर भी नजर डालने से काफी कुछ स्थिति साफ होती नजर आ जाती है। हालांकि बीते दो दिनों में हरीश रावत के दो अलग-अलग पोस्ट के सियासी मायने निकाले जाने लगे हैं। एक दिन पहले हरीश रावत ने उनके विरोधियों से उन्हें बचाने के लिए सहयोग मांगा तो अगले दिन संगठन को लेकर ही सवाल खड़े कर नए साल में बड़ा फैसला लेने के संकेत दे दिए हैं।

विरोधियों को हराने के लिए मांगा समर्थन
सबसे पहले राजनीति को लेकर हरीश रावत ने एक दिन पहले जो पोस्ट किया। उसमें हरदा की बात में उत्तराखंड से जुड़े सर्वे में हरीश रावत के लोकप्रिय होने की बात नजर आ रही है। साथ ही हरदा की पोस्ट में फिर से वह डर भी नजर आ रहा है, जिसमें वे सीएम की कुर्सी से दूर करने वाले कारण का भी जिक्र कर रहे हैं। ऐसे में इस पोस्ट के जरिए यह समझा जा सकता है कि हरदा एक बार फिर जनता की भावनाओं को वोट में बदलने की मांग कर रहे हैं। पूर्व सीएम हरीश रावत ने पोस्ट किया कि
मैं आह भी भरता हूँ तो लोग खफा हो जाते हैं। यदि उत्तराखंड के भाई-बहन मुझसे प्यार जता देते हैं तो लोग उलझन में पड़ जाते हैं। मैंने पहले भी कहा है कि हम लाख कहें, लोकतंत्र की दुल्हन तो वही होगी जो जनता रुपी पिया के मन भायेगी। मैं तो केवल इतना भर कहना चाहता हूँ कि उत्तराखंड यदि मैं, आपके घर को आपके मान-सम्मान के अनुरूप ठीक से संभाल सकता हूँ तो मेरे समर्थन में जुटिये। राजनीति की डगर सरल नहीं होती है, बड़ी फिसलन भरी होती है। कई लोग चाहे-अनचाहे भी धक्का दे देते हैं, ये धक्का देने वालों से भी बचाइये। यदि मैं आपके उपयोग का हूँ तो मेरा हाथ पकड़कर मुझे फिसलन और धक्का देने वाले, दोनों से बचाइये।
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विरोधियों को लेकर क्यों आशंकित नजर आए हरदा
एक दिन बाद बुधवार को हरीश रावत ने अपने संगठन और विरोधियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए नए साल में नया फैसला लेने के संकेत दिए हैं। ऐसे में हरदा के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हुई है। कांग्रेस पार्टी के अंदर इस बात को लेकर भी चर्चा तेज है कि क्या हरीश रावत खुद चुनाव लड़ रहे हैं या अपने परिवार के किसी सदस्य को चुनाव लड़ाएंगे। इतना ही नहीं हरीश रावत जिन विरोधियों को लेकर आशंकित हैं, उनमें सबसे ज्यादा डर हरीश रावत को कांग्रेस के किस नेता है। ये भी सवाल उठना लाजिमी है। वर्तमान परिस्थिति की बात करें तो इस समय कांग्रेस के अंदर चुनाव अभियान खुद हरीश रावत संभाल रहे हैं, जबकि प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी हरीश रावत के साथ कदम से कदम मिला रहे हैं। कांग्रेस में इस समय हरीश रावत, गणेश गोदियाल के अलावा प्रीतम सिंह की सबसे कद्दावर नेता हैं। इसके बाद सभी दूसरी पंक्ति के नेता है।

किसकी और है हरदा का इशारा
हरीश रावत की एक के बाद एक आंशकाओं को लेकर सवाल उठने लाजिमी है कि हरीश रावत का संकेत किस नेता की और है। जो कि कांग्रेस के अंदर चल रही गुटबाजी की और भी इशारा कर रहे हैं। हरीश रावत ने पोस्ट किया है कि
है न अजीब सी बात, चुनाव रूपी समुद्र को तैरना है, सहयोग के लिए संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है। जिस समुद्र में तैरना है, सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं। जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं। मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि हरीश रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिये, अब विश्राम का समय है! फिर चुपके से मन के एक कोने से आवाज उठ रही है "न दैन्यं न पलायनम्" बड़ी उपापोह की स्थिति में हूंँ, नया वर्ष शायद रास्ता दिखा दे। मुझे विश्वास है कि भगवान केदारनाथ जी इस स्थिति में मेरा मार्गदर्शन करेंगे।












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