Uttarakhand Forest Fire: जंगल की आग विकराल, हेलीकॉप्टर से भी बुझाने में संकट, जानिए पूरे अपडेट
उत्तराखंड के जंगल आग की वजह से सुलग रहे हैं। आग पर काबू पाने के लिए जमीन से लेकर आसमान तक उपाए किए जा रहे हैं। लेकिन कई तरह की मुश्किलें सामने आने से ऑपरेशन को पूरा करने में सफलता नहीं मिल पा रही है।
वनाग्नि को बुझाने में सबसे बड़ी मुश्किल धुआं है। जिस वजह से आसमान से आग बुझाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वनाग्नि को बुझाने के लिए वायु सेना की मदद ली जा रही है।

पौड़ी जिले की आग को बुझाने के लिए वायुसेना को हेलीकॉप्टर एमआई 17 उतारा गया। लेकिन घंटो लो विजिबिलिटी के कारण हेलीकॉप्टर MI-17 हेलीपैड पर ही रहा।
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लो विजिबिलिटी की वजह से कई बार ऑपरेशन बार बार बाधित हो रहा है। एमआई 17 से लटकी बेबी बास्केट को भी वायु सेना को संभालकर उड़ाना पड़ रहा है। ये बेबी बास्केट हेलीकॉप्टर से 20 मीटर लंबी तारों से लटकी हुई रहती है।
उत्तराखंड में वनाग्नि विकराल रुप धारण कर चुकी है। कुमांउ से लेकर गढ़वाल समेत कई हेक्टेअर जंगल जल चुके हैं। सरकार हर तरफ से आग पर काबू पाने के लिए हर प्रयास करने का दावा कर रही है।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने बताया कि वनाग्नि नियंत्रण में लापरवाही बरतने पर रेंज अधिकारी, जोरासी (अल्मोड़ा वन प्रभाग, अल्मोड़ा ) को प्रभागीय कार्यालय स्तर पर सम्बद्ध किया गया है। सीएस ने जोनल अधिकारी मुख्य वन संरक्षक कुमाऊँ/गढ़वाल तथा वन्यजीव परिरक्षण क्षेत्र को निर्देश दिए है कि वनाग्नि नियंत्रण कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियो/ कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाए।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि आपदा प्रबन्धन विभाग द्वारा वनाग्नि नियंत्रण हेतु प्रत्येक जिलाधिकारी को 5 करोड़ का बजट आवंटित कर दिया गया है।
अभी तक वनाग्नि की घटनाओं में 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। जिनमें से चार लोगों को गिरफतार कर लिया गया है। अभी तक वनाग्नि के कारण किसी भी मानव या वन्य जीवन की हानि की जानकारी नही है।
अपर प्रमुख वन संरक्षक निशान्त वर्मा ने बताया कि पौड़ी और अल्मोड़ा जिलों में एनडीआरएफ भी लगाई जाएगी। हैलीकॉप्टर से वनाग्नि प्रभावित इलाकों में पानी का छिड़काव किया जा रहा है। जिलाधिकारियों द्वारा खेतों में चारे आदि को जलाने तथा शहरी क्षेत्रों पर ठोस कचरे को जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध का आदेश पारित कर दिया गया है। जिन गांवों के आसपास कोई वनाग्नि की घटनाएं नही हुई उन्हें पुरूस्कृत किया जाएगा। आईआईटी रूड़की के साथ क्लाउड सीडिंग के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है।












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