मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए खटीमा सीट पर बसपा पड़ सकती ही भारी, जानिए कैसे
2017 में तीसरे नंबर पर रहा था बसपा का प्रत्याशी
देहरादून, 12 फरवरी। उत्तराखंड की 70 सीटों पर एक साथ 14 फरवरी को मतदान होना है। 70 सीटों में से सबसे ज्यादा फोकस खटीमा सीट पर लगी हुई है। इस सीट पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चुनाव लड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री के चुनाव लड़ने के साथ ही इस सीट से मिथक पर भी निगाहें टिकी हुई है। उत्तराखंड में चुनाव होने के बाद कोई भी मुख्यमंत्री विधानसभा का चुनाव नहीं जीत पाया। इस मिथक को तोड़ने के साथ ही धामी के सामने भाजपा को बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने की भी बड़ी जिम्मेदारी है। लेकिन सबसे अहम इस सीट पर जातिगत समीकरण हैं, जिन्हें पार पाना धामी के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो रही है।

2017 में तीसरे नंबर पर रहा था बसपा का प्रत्याशी
2017 के विधानसभा चुनाव रिजल्ट पर नजर डालें तो धामी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बहुजन समाज पार्टी और राणा फैक्टर बना हुआ है। विधानसभा के पिछले दोनों चुनाव में बसपा के रमेश सिंह राणा ने दमदार प्रदर्शन किया था। 2017 में पुष्कर सिंह धामी को 29539 वोट मिले, जो कि कुल वोट का 36.51% परसेंट था। इसके बाद दूसरे नंबर पर कांग्रेस के भुवन चंद्र कापड़ी रहे जिन्हें 26830 वोट मिले। यानि 33.16% परसेंट। इस तरह धामी 2709 मतों के अंतर से ही चुनाव जीते थे। जबकि तीसरे नंबर पर बसपा के रमेश सिंह राणा 17804 वोट के साथ रहे। यानि 22.01% परसेंट वोट। इस तरह धामी को चुनाव जीतने के लिए बसपा और राणा समुदाय के वोटर पाना जरुरी है। इसके साथ ही इस बार आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी एसएस कलेर भी मैदान में है। जो कि धामी के लिए चुनौती बने हुए हैं।

धामी के लिए हैट्रिक मारना नहीं आसान
धामी भले ही लगातार दो बार इस सीट से विधायक चुनकर आए हों, लेकिन हैट्रिक मारने के लिए धामी को इन सभी समीकरणों से पार पाना होगा। इस सीट पर दो बार कांग्रेस और दो बार भाजपा का कब्जा रहा। 2002 और 2007 में कांग्रेस के गोपाल सिंह राणा विधायक बने जबकि 2012 और 2017 में भाजपा के पुष्कर सिंह धामी जीते।जातीय रूप से यहां क्षत्रिय वोटर सबसे ज्यादा और राणा और अल्पसंख्यक वोटरों की भी अपनी भूमिका है। हालांकि भाजपा और कांग्रेस में आमने-सामने की टक्कर है। दोनों दल दो-दो बार इस सीट को जीत चुके हैं लेकिन इस बार बसपा और आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन इस वीआईपी सीट के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। जातीय रूप से यहां क्षत्रिय वोटर सबसे ज्यादा होने के बावजूद राणा और अल्पसंख्यक वोटरों की भूमिका खासी अहम है और इस बार राणा और मुस्लिम बिरादरी के प्रत्याशी भी मैदान में हैं। जो कि धामी के लिए बड़ा चेलेंज खड़ा कर रहे हैं।

राणा और अल्पसंख्यक वोटर तय करेंगे जीत का रास्ता
पुष्कर सिंह धामी और भुवन कापड़ी दोनों पर्वतीय मूल के चेहरे हैं, इस वजह से भी दोनों के वोट आपस में बंटने तय है। ऐसे में अन्य वोटरों की भूमिका चुनाव परिणाम तय करने में अहम होने तय हैं। जिस स्थिति में राणा और अल्पसंख्यक वोटरों की निर्णायक भूमिका रह सकती है। पिछले चुनाव में जिस तरह बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी रमेश सिंह राणा 17804 वोट के साथ 22.01% परसेंट वोट खींचने में सफल हुए थे, ऐसे में इस बार सबकी नजर बसपा के प्रत्याशी पर भी होगी। जो जितने वोट खीचेंगा उतना ही धामी की सीट फंसती चली जाएगी। साथ ही पहली बार चुनाव मैदान में उतरी आप के एसएस कलेर के भी वोट में सेंधमारी से धामी की टेंशन बढ़ सकती है।
- खटीमा से प्रत्याशी
- पुष्कर सिंह धामी-भाजपा
- भुवन चंद्र कापड़ी- कांग्रेस
- एसएस कलेर- आप
- रमेश सिंह-बसपा
- विजयपाल-सपा
- राजेशन-भारतीय सुभाष सेना
- आसिफ मियां-एआई मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन
- बाबू राम-निर्दलीय
2017 रिजल्ट-
प्रत्याशी पार्टी वोट % वोट
पुष्कर सिंह धामी भाजपा 29539 36.51%
भुवन चंद्र कापड़ी कांग्रेस 26830 33.16%
रमेश सिंह राणा बसपा 17804 22.01%












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