flashback 2022: द्रौपदी का डांडा में हिमस्खलन की घटना में हुई थी 29 पर्वतारोहियों की मौत, 2 अब भी लापता
उत्तरकाशी के द्रौपदी का डांडा में हुए हिमस्खलन में 4 अक्टूबर को 29 पर्वतारोहियों की मौत हो गई थी। इनमें से 27 की बॉडी रिकवर हो गई है जबकि दो अब भी मिसिंग हैं।

साल 2022 में उत्तरकाशी के नेहरू पर्वतारोहण संस्थान(निम) के इतिहास में एक ऐसा अध्याय जुड़ा जो कि 29 परिवारों के ही नहीं पूरे देश को झकझोर कर गया है। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान 14 नवंबर, 1965 को स्थापित किया गया था। यह भारत के प्रमुख पर्वतारोहण संस्थानों में से एक है, जिसने एशियाभर में अपनी पहचान बनाई है। लेकिन 2022 का साल कभी न भूलने वाला दर्द दे गया। उत्तरकाशी के द्रौपदी का डांडा में हुए हिमस्खलन में 4 अक्टूबर को 29 पर्वतारोहियों की मौत हो गई थी।
27 की बॉडी रिकवर,जबकि दो अब भी मिसिंग
द्रौपदी का डांडा में हुई हिमस्खलन की घटना को उत्तराखंड शासन ने दैवीय आपदा में शामिल कर लिया है। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की ओर से द्रौपदी का डांडा में प्रशिक्षण के दौरान हिमस्खलन से 29 पर्वतारोहियों की मौत हो गई थी। उत्तरकाशी के द्रौपदी का डांडा में हुए हिमस्खलन में 4 अक्टूबर को नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के 34 ट्रेनी और 7 इंस्ट्रैक्टर की टीम अपने कोर्स का सबमिट करने जा रहे थे। इसी दौरान एवलांच आने से 29 लापता हो गए। इनमें से 27 की बॉडी रिकवर हो गई है जबकि दो अब भी मिसिंग हैं।
निम के इतिहास में ऐसी घटना पहली बार
निम के इतिहास में ऐसी घटना पहली बार हुई है। निम के 44 प्रशिक्षुओं, 8 प्रशिक्षकों सहित कुल 58 लोगों का दल 14 सितंबर को एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स के लिए निकला था। 25 सितंबर को यह दल डोकराणी बामक ग्लेशियर क्षेत्र में द्रौपदी का डांडा चोटी के बेस कैंप में पहुंचा। वहां से सभी चोटी के आरोहण के लिए 5670 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कैंप-1 तक पहुंचे। अगले दिन तड़के चार बजे यह दल द्रौपदी का डांडा चोटी(5771 मी.) पर पहुंचा। लेकिन, कैंप-1 में लौटते समय करीब 8.45 बजे दल भारी हिमस्खलन की चपेट में आ गया। इस हादसे में विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वाली सविता कंसवाल की मौत हो गई थी। सविता कंसवाल एनआईएम में इंस्ट्रक्टर के रूप में काम करती थीं।












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