जब डीएम साहब ने खेत में उतरकर की रोपाई, उत्तरकाशी के गंगा घाटी में भी उगेगा लाल धान

उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में अब अफसर ग्रामीणों की समस्याओं और उनके समाधान के लिए खुद ही फील्ड में उतर रहे हैं। बीते कई समय से अफसर लोगों के बीच में पहुंचकर उनकी मुश्किलों को समझने की कोशिश करते हुए नजर आ रहे हैं।

उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में अब अफसर ग्रामीणों की समस्याओं और उनके समाधान के लिए खुद ही फील्ड में उतर रहे हैं। बीते कई समय से अफसर लोगों के बीच में पहुंचकर उनकी मुश्किलों को समझने की कोशिश करते हुए नजर आ रहे हैं। इसी तरह का नजारा उत्तरकाशी जिले के गंगा घाटी में देखने को मिला जब जिले के डीएम खुद किसान बनकर खेतों में रोपाई करने लगे। इतना ही नहीं खेती के दूसरे कार्यों को भी डीएम साहब अपने हाथों से करते हुए दिखे। जिसके बाद उत्तरकाशी के डीएम अभिषेक रूहेला की हर तरफ तारीफ हो रही है।

DM uttarkashi ias Abhishek Ruhela planted in the field, red paddy will also grow in the Ganga valley

उत्तरकाशी जिले का लाल चावल काफी प्रसिद्ध हैं। जो कि रवांई घाटी में ही उगाया जाता रहा है। लेकिन अब लाल चावल की फसल गंगा घाटी में भी पैदा किया जाएगा। कृषि विभाग ने घाटी के करीब 200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लाल धान उगाने की योजना बनाई है। जिसकी शुरूआत डीएम अभिषेक रूहेला ने उत्तरौं गांव में ग्रामीणों के साथ लाल धान की रोपाई कर की।

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    जब डीएम साहब ने खेत में उतरकर की रोपाई, उत्तरकाशी के गंगा घाटी में भी उगेगा लाल धान

    रवांई घाटी के यमुना और टौंस नदी के मध्यवर्ती क्षेत्र में स्थित रामा व कमल सिरांई में अब तक लाल धान की खेती की जाती है। लेकिन सफेद चावल से ज्यादा पौष्टिक और देश विदेश में मांग को देखते हुए कृषि विभाग ने गंगा घाटी में लाल धान की खेती की योजना तैयार की है। भटवाड़ी ब्लॉक के उत्तरौं गांव में डीएम अभिषेक रूहेला ने ग्रामीणों के साथ पावर बीडर से लाल धान की रोपाई की। पहले चरण में गंगा घाटी के करीब 600 किसानों को लाल धान उगाने की मुहिम में शामिल किया गया है। डीएम को अपने बीच पाकर महिलाएं उत्साहित नजर आईं और पारंपरिक गीत गाकर रोपाई पर्व का जश्न मनाया। इस मौके पर लोक देवता से लाल धान की खेती की सफलता की कामना की गई। डीएम ने ग्रामीणों को चारा उत्पादन के लिए नैपियर घास की पौध भी बांटी।

    लाल चावल को वीडी राइस या रेड कार्गो राइस के नाम से भी जाना जाता है। लाल चावल को इसका नाम इसकी बाहरी परत के लाल भूरे रंग के कारण है, जो एंटीऑक्सिडेंट और पोषक तत्वों से भरपूर होता है। सफेद चावल के विपरीत, इसको बनाने के दौरान इसकी बाहरी परत को हटा दिया जाता है जिसके बाद यह लाल चावल के रूप में बाहर आता है जो इसकी पोषण सामग्री को बरकरार रखता है। लाल चावल कोलेस्ट्रॉल को कम करने के साथ ही बीपी को कंट्रोल करता है। लाल चावल बाजार में 150 रुपए तक मिलता है।

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