Dehradun news: मलिन बस्तियों के मालिकाना हक़ को लेकर सियासत, कांग्रेस ने रैली निकालकर दी ये चेतावनी
मलिन बस्तियों को हक दिलाने को लेकर एक बार सियासत शुरू हो गई है। निकाय चुनाव से पहले ही ये मामला एक बार फिर गरमा गया है।
मलिन बस्तियों को मालिकाना हक़ देने की मांग को लेकर आज कांग्रेस के साथ बस्ती के लोगों ने रैली निकालकर प्रदर्शन किया। उत्तराखंड मलिन बस्ती विकास परिषद व महानगर कांग्रेस के आह्वान पर नगर निगम के लिए कूच किया।

मलिन बस्तियों को मालिकाना हक़ देने और मलिन बस्तियों को उजाड़ने के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मलिन बस्ती वासी राजपुर रोड से होते हुए दर्शनलाल चौक से नगर निगम देहरादून पहुंचे। उत्तराखंड मलिन बस्ती विकास परिषद के अध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि 2012 में राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी तो गरीबों वा मलिन बस्ती के लोगों से मालिकाना हक का को वायदा कांग्रेस ने किया था।
उसके अनुरूप मलिन बस्तियों को मालिकाना हक देने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बाकायदा एक समिति बनाई और उस समिति की रिपोर्ट की संस्तुति पर मलिन बस्तियों को मालिकाना हक़ देने के लिए नियम कानून बनाए।
जब लोगों को मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू की, तो 2017 में राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी और उसने इस प्रक्रिया को रोक दिया और वर्ष 2018 में एक पीआईएल पर उच्च न्यायालय के एक आदेश की आड़ ले कर राज्य भर में मलिन बस्तियों को उजाड़ने की साजिश शुरू कर दी।
जिसका कांग्रेस ने डट कर विरोध किया व मुख्यमंत्री आवास कूच किया तो राज्य की सरकार आनन फानन में एक अध्यादेश ले आई और तब से समय समय पर मलिन बस्तियों के लोगों को डराया जाता है। चुनावों में मालिकाना हक़ देने का वायदा भाजपा करती है लेकिन चुनावों के बाद मलिन बस्तियों की कोई सुध नहीं लेती।
धस्माना ने कहा की अगर सरकार ने 30 दिन में मलिन बस्तियों के मालिकाना हक़ के मामले में निर्णय नहीं लिया तो उत्तराखंड मलिन बस्ती विकास परिषद राज्य व्यापी आंदोलन करेगी। धस्माना ने कहा कि आज देहरादून की सभी मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों में दहशत और भ्रम पैदा हो गया है क्योंकि कुछ बस्तियों में निशान लगाए जा रहे हैं यह कह कर कि 2016 के बाद बसे लोगों को हटाया जाएगा जबकि कई ऐसे मकानों पर भी निशान लगाए गए हैं जो 2000 से भी पहले के बने हुए हैं।












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