जानिए क्या होता है डार्क वेब, जिसे कहते हैं इंटरनेट की काली दुनिया, मुस्लिम बने युवक का कनेक्शन!
देहरादून के डोईवाला में एक युवक के इस्लाम के कट्टर समर्थक बनने के मामले में पुलिस के सामने एक नई चुनौती खड़ी हुई है। जिसे डार्क वेब बताया जा रहा है। इस मामले में पुलिस अब इंटरनेट की काली दुनिया कहे जाने वाले डार्क वेब
देहरादून के डोईवाला में एक युवक के इस्लाम के कट्टर समर्थक बनने के मामले में पुलिस के सामने एक नई चुनौती खड़ी हुई है। जिसे डार्क वेब बताया जा रहा है। इस मामले में पुलिस अब इंटरनेट की काली दुनिया कहे जाने वाले डार्क वेब की थ्योरी पर काम कर रही है।
डोईवाला का ये युवक तीन साल तक घर में ही कैद रहा। इस बीच क्रिप्टो में ऑनलाइन ट्रेडिंग करते-करते इस्लाम का कट्टर समर्थक बना। पुलिस को ऐसे में इस बीच युवक के डार्क वेब में जाने की आशंका है। ऐसे में पुलिस इस मामले में भी दूसरे एंगल से जांच कर रही है।

दावा किया जा रहा है कि डार्क वेब के जरिए लोगों की पर्सनल जानकारियों की बोली लगाई जाती है। ऐसे में अब अवैध धंधे के लिए डार्क वेब को जरिया बनाया जा रहा है। एक्सपर्ट्स की मानें तो डार्क वेब से ड्रग डीलिंग,हथियारों की खरीद-फरोख्त भी होती है। क्रिप्टो करेंसी का अब डार्क वेब के जरिये हवाला के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है।
क्या है डार्क वेब
इंटरनेट का 96 फीसद हिस्सा डीप वेब और डार्क वेब के अंदर आता है। हम इंटरनेट कंटेंट के केवल चार प्रतिशत हिस्से का इस्तेमाल करते है। इसे सरफेस वेब कहा जाता है। डीप वेब पर मौजूद कंटेंट को एक्सेस करने के लिए पासवर्ड की जरूरत होती है। इसमें ई-मेल, नेट बैंकिंग आते हैं। डार्क वेब को खोलने के लिए टॉर ब्राउजर का इस्तेमाल किया जाता है। डार्क वेब पर ड्रग्स, हथियार, पासवर्ड, चाइल्ड पोर्न जैसी बैन चीजें मिलती हैं। डार्क वेब बहुत सारे आईपी एड्रेस से कनेक्ट और डिस्कनेक्ट होता है। इनसे इसको ट्रैक कर पाना असंभव सा है। जिसमें यूजर की इन्फॉर्मेशन इंक्रिप्टेड होती है जिसे डिकोड करना नामुमकिन है। यहां डील करने के लिए वर्चुअल करेंसी जैसे बिटकॉइन का इस्तेमाल होता है ताकि ट्रांजेक्शन को ट्रेस न किया जा सके।












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