उत्तराखंड: अब दलित छात्रों ने सवर्ण महिला के हाथ का खाना खाने से किया इनकार
उत्तराखंड:
देहरादून, 27 दिसंबर: उत्तराखंड के चंपावत जिले के एक सरकारी स्कूल में कथित उच्च जातियों के बच्चों ने दलित भोजन माता के हाथ का खाना खाने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद प्रशासन ने दलित भोजन माता को हटाते हुए सवर्ण महिला को इस पद पर नियुक्त कर दिया। अब स्कूल के दलित बच्चों ने इस पर अपना कड़ा एतराज जताया है। प्रशासन की इस कार्रवाई का विरोध करते हुए दलित बच्चों ने सवर्ण भोजन माता के हाथ का खाना खाने से इनकर कर दिया है।

चंपावत जिले के सुखीढांग के शासकीय इंटर कॉलेज के प्राचार्य प्रेम सिंह ने बताया कि शुक्रवार को कक्षा छह से आठ तक के 66 छात्रों में से 58 हाजिर थे। जब दोपहर का भोजन परोसा गया तो 23 दलित छात्रों ने उच्च जाति की रसोइया के बनाए खाने को खाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर उच्च जाति के छात्र दलित भोजनमाता के पकाए गए भोजन का बहिष्कार करते हैं, तो वे उच्च जाति की महिला के हाथ का बनाया खाना नहीं खाएंगे।
कैसे शुरू हुआ विवाद
स्कूल में बीते हफ्ते ये विवाद सामने आया था। स्कूल के कुछ ऊंची जाति के छात्रों ने दलित महिला सुनीता देवी का खाना खाने से इनकार कर दिया। इन्होंने काफी अजीब तर्क भोजनमाता की जाति को लेकर दिए थे। सुनीता देवी को 13 दिसंबर को काम पर रखा गया था। इस विवाद के बाद राज्य के शिक्षा विभाग ने उनकी नियुक्ति में खामियों का हवाला देते हुए देवी को 21 दिसंबर को उनके पद से हटा दिया और दूसरी भोजनमाता (उच्च जाति की) को नियुक्त कर दिया।
सुनाती देवी को हटाए जाने के बाद कहा गया कि इस मामले का पटापेक्ष हो गया है लेकिन अब ये मामला और उलझ गया है। दलित छात्रों ने इस पूरी घटना को बेहद आपत्तिजनक और जातिवादी मानसिकता से प्रेरित कहा है। साथ ही उन्होंने सवर्ण भोजनमाता के हाथ का खाना खाने से भी मना कर दिया है।












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