VIDEO: कांग्रेस विधायक हरीश धामी मलबे के तेज सैलाब में बहे, कार्यकर्ताओं ने बचाई जान

पिथौरागढ़। धारचूला विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक हरीश धामी हादसे का शिकार होते हुए बाल-बाल बच गए। दरअसल, कांग्रेस विधायक गुरुवार को पिथौरागढ़ के मोरी गांव में आपदा पीड़ितों की समस्याएं सुनकर लौट रहे थे। तभी चिमड़ियागाड़ नाले में अचानक आए मलबे के साथ बह गए। मलबे का बहाव इतना तेज था कि वे करीब 10 मीटर तक बह गए। किसी तरह कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें बचाया। इस दौरान बोल्डरों की चपेट में आने से विधायक के हाथ, पैर और माथे पर चोटें भी आई हैं।

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    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 19 जुलाई की रात को बंगापानी तहसील के मेतली, बगीचागांव, लुम्ती, जारा जिबली और मोरी गांवों में बारिश ने जमकर कहर बरपाया था। इसके बाद 29 जुलाई को भी मोरी गांव में बारिश ने भयानक रूप ले लिया। हालांकि सेना और एसडीआरएफ के जवान क्षेत्र में राहत एवं बचाव के प्रयासों में लगे हैं, लेकिन नदियों में पुल और संपर्क मार्गों के बह जाने से गांवों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थान तक लाना आसान नहीं है। मेतली, बगीचाबगड़, मोरी और जारा जिबली गांवों में सभी घरों में मलबा घुसा हुआ है। ग्रामीण बच्चों के साथ खेतों में रात गुजार रहे हैं। यही हाल मुनस्यारी तहसील के जोशा और धापा गांवों का भी है।

    वहीं, आपदा प्रभावितों का दर्द बांटने 30 जुलाई को कांग्रेस विधायक हरीश धामी आपदा प्रभावित लोगों से मिलने गए थे। इस दौरान उन्होंने टांगा गांव में आई आपदा के बाद से ही लगातार आपदा प्रभावित इलाकों का दौरा भी किया। जिसके चलते गुरुवार को बंगापानी तहसील के मोरी गांव से लौट रहे विधायक धामी, पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ एक छोटी नदी पार कर रहे थे, लेकिन अचानक यहां उनका पैर फिसल गया और वो पानी में गिर गए। जिसके बाद कांग्रेस विधायक को उन्हों 8 किमी पैदल चलकर चामी पहुंचे। वहां मौजूद सेना के फार्मासिस्ट से प्राथमिक उपचार कराने के बाद उन्हें थोड़ी बहुत राहत मिली।

    विधायक हरीश धामी ने कहा इस आपदा की घड़ी में मेरे दर्द से अधिक प्रभावितों का दर्द मायने रखता है। कहा उनका प्रभावितों तक हरसंभव मदद पहुंचाने का प्रयास रहेगा। घटना के बाद वहां मौजूद सभी लोग काफी घबरा गए थे। वहीं, दूसरी और सेना-एसडीआरएफ के 42 जवान गुरुवार को बंगापानी विकासखंड के आपदाग्रस्त गांव लुमती और बगीचाबगड़ में तीन दिनों से फंसे 80 से अधिक लोगों के लिए देवदूत बनकर आए। गुरुवार को जवानों ने मौत को मात देते हुए उफनाती दुगड़ी नदी के ऊपर रस्सी और ड्रम बांधकर 50 ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। बाकी ग्रामीणों के लिए शुक्रवार को रेस्क्यू होगा।

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