उत्तराखंड PCC चीफ के लिए कांग्रेस खेल सकती है नए चेहरे पर दांव, लिस्ट में ये नाम हैं सबसे आगे
हार के बाद अब नई युवा टीम तैयार करने की चुनौती
देहरादून, 16 मार्च। उत्तराखंड में मिली करारी हार के बाद अब कांग्रेस में भी संगठन में बड़ा फेरबदल देखने को मिलने जा रहा है। गणेश गोदियाल के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस में अब नए मुखिया की तलाश शुरू हो गई है। कांग्रेस के अंदर अब युवाओं को मौका देने की बात सामने आने लगे है। ऐसे में आने वाले दिनों में अब कांग्रेस के लिए कई चुनौतियां भी लेकर आएंगी।

लोकसभा चुनाव को देखते हुए नई युवा टीम हो सकती है तैयार
प्रदेश में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 19 सीटें मिली हैं। जो कि 2017 के चुनाव से 8 सीटें ज्यादा हैं। 2017 में कांग्रेस के 11 विधायक ही चुनकर आए थे। ऐसे में कांग्रेस अब तक ये नहीं समझ पा रही है कि आखिर जनता को कैसे विश्वास में लिया जाए। 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हुए चुनावों में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। जिस वजह से सोनिया गांधी ने सबसे पहले प्रदेश अध्यक्ष और अब प्रदेश प्रभारियों को हटाने का निर्णय लिया है। हालांकि सोनिया गांधी के इस फैसले से कांग्रेस के अंदर ही दो तरह के विचार सामने आ रहे हैं। कुछ हार के लिए संगठन को जिम्मेदार मान रहे हैं तो कुछ सीनियर नेताओं की गुटबाजी को। लेकिन जिस तरह से प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल से इस्तीफा मांगा गया वो अब तक कार्यकर्ताओं को समझ से परे हैं। अधिकतर कार्यकर्ता गणेश गोदियाल के कार्यकाल और उनके व्यवहार से खुश ही नजर आ रहे थे। लेकिन सोनिया गांधी के इस फैसले को लेकर कोई भी खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं।
19 विधायकों में से भी हो सकता है कोई नया चेहरा
हालांकि ये साफ माना जा रहा है कि अब नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए कोई नया, युवा और चौंकाने वाला नाम हो सकता है। जिसमें चुनाव जीतकर आए 19 विधायकों में से भी कोई नया चेहरा हो सकता है। कांग्रेस में इस समय हरीश रावत और प्रीतम सिंह खेमा सक्रिय हैं। यशपाल आर्य और हरक सिंह के घर वापसी के बाद अब दो नए खेमे भी तैयार हो गए हैं। हाईकमान अब इन चेहरों पर विश्वास जताए ऐसा लगता नहीं हैं। हालांकि लोकसभा चुनाव तक इन चारों दिग्गजों को एकजुट रखने का भी प्रयास हाईकमान जरुर करेगा। ऐसे में सभी की राय से ही किसी नए चेहरे को कमान सौंपी जाएगी। 2017 में कांग्रेस की करारी हार के बाद प्रीतम सिंह को पार्टी हाईकमान ने जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसमें प्रीतम पूरी तरह से सफल रहे। उन्होंने पार्टी कैडर को भी खड़ा किया और चुनाव तक एकजुट भी रखा। लेकिन चुनाव से ठीक पहले नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रदयेश के आकस्मिक निधन से पार्टी को नए सिरे से संगठन और दूसरों पदों पर तैनाती करनी पड़ी। ऐसे में प्रीतम सिंह को नेता प्रतिपक्ष और गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। गणेश गोदियाल के साथ 4 कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए गए। जिनमें जीतराम, तिलकराज बेहड़, भुवन कापड़ी और रणजीत रावत शामिल थे। इनमें तिलकराज बेहड़ और भुवन कापड़ी ही चुनाव जीतकर आए हैं। दोनों तराई सीट से आते हैं। हालांकि भाजपा ने भी तराई सीट से ही मदन कौशिक को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। ऐसे में ये भी कांग्रेस के दो विकल्प हो सकते हैं। इसके अलावा कुमाऊं से प्रकाश जोशी, मनोज तिवारी भी प्रदेश अध्यक्ष के लिए मजबूत विकल्प माने जा रहे हैं। इसके अलावा संगठन में काम कर रहे कुछ पदाधिकारी एक बार फिर से गणेश गोदियाल को ही कमान सौंपने की बात कर रहे हैं। उनका दावा है कि इस्तीफा मांगा जाना अलग प्रकरण है और बाद में नए सिरे से नियुक्त करना अलग प्रक्रिया हो सकती है। ऐसे में गढ़वाल से गणेश गोदियाल को एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष कमान सौंपने की कुछ कार्यकर्ता मांग भी करने लगे हैं।
कांग्रेस के अब तक प्रदेश अध्यक्ष-
कांग्रेस में अब तक सबसे लंबा कार्यकाल हरीश रावत और यशपाल आर्य का रहा है। जबकि सबसे कम समय का कार्यकाल गणेश गोदियाल का रहा है।
- हरीश रावत -9 नवंबर 2000 से 2007
- यशपाल आर्य -2007 12 जून 2014
- किशोर उपाध्याय -13 जून 2014 3 मई 2017
- प्रीतम सिंह- 4 मई 2017 22 जुलाई 2021
- गणेश गोदियाल -22 जुलाई 2021 से 15 मार्च 2022
नेता प्रतिपक्ष को लेकर भी शुरू हुई दावेदारी-
प्रदेश अध्यक्ष के इस्तीफे के बाद अब कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष को लेकर भी लॉबिंग शुरू हो गई है। कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष के अलावा नेता प्रतिपक्ष के लिए भी जमकर गुटबाजी देखने को मिल सकती है। धारचूला से विधायक हरीश धामी ने नेता प्रतिपक्ष के लिए अपनी दावेदारी कर दी है। धामी तीसरी बार विधायक चुनकर आए हैं। वे अपने नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए युवा और तीसरा बार चुनकर आने को मजबूत पक्ष मान रहे हैं। हरीश धामी ने 2014 में हरीश रावत के लिए मुख्यमंत्री बनने पर कुर्सी छोड़ी थी। जिस वजह से वे हरीश रावत के सबसे करीबी माने जाते हैं। हरीश धामी के अलावा पूर्व में नेता प्रतिपक्ष रहे प्रीतम सिंह भी फिर से दावेदार माने जा रहे हैं। इसके अलावा यशपाल आर्य, भुवन कापड़ी, तिलकराज बेहड़ और सुमित ह्रदयेश भी दावेदारी कर सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए नेता प्रतिपक्ष का चयन करना भी सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है।












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