आदित्य-L1 की लांचिंग को लेकर सीएम धामी ने दी शुभकामनाएं, कहा- एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार है भारत
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आदित्य-L1 को लांचिंग को लेकर सभी वैज्ञानिकों को हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। सीएम धामी ने ट्वीट कर कहा है कि एक बार फिर भारत इतिहास रचने को तैयार है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आदित्य-L1 को लांचिंग को लेकर सभी वैज्ञानिकों को हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। सीएम धामी ने ट्वीट कर कहा है कि एक बार फिर भारत इतिहास रचने को तैयार है।आदित्य-L1 की लांचिंग को लेकर सीएम धामी ने इसे सशक्त भारत की नई उड़ान कहकर संबोधित किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जानकारी देते हुए बताया कि आज सुबह 11:50 पर सूर्य का अध्ययन करने वाली पहली अंतरिक्ष-आधारित भारतीय वेधशाला, PSLV-C57/आदित्य-L1 को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा। चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के बाद हम सभी को पूर्ण विश्वास है कि इस मिशन में भी हमारे लगनशील वैज्ञानिकों को सफलता अवश्य मिलेगी। सभी वैज्ञानिकों को हार्दिक शुभकामनाएं!
एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार है भारत!
आज सुबह 11:50 पर सूर्य का अध्ययन करने वाली पहली अंतरिक्ष-आधारित भारतीय वेधशाला, PSLV-C57/आदित्य-L1 को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा।
चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के पश्चात हम सभी को पूर्ण विश्वास है कि इस मिशन में भी हमारे लगनशील…
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) September 2, 2023
आदित्य-L1 की लांचिंग को लेकर सीएम धामी ने इसे सशक्त भारत की नई उड़ान कहकर संबोधित किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी है। सीएम धामी ने कहा कि वैज्ञानिकों के कठिन परिश्रम के परिणामस्वरूप भारत के सूर्य मिशन की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग पर सभी वैज्ञानिकों एवं देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के बाद आज इसरो ने सूर्य मिशन Aditya-L1 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। श्रीहरिकोटा के लॉन्चिंग सेंटर से आदित्य-L1 मिशन को आज 11.50 बजे लॉन्च किया गया।
लॉन्चिंग के बाद राकेट का पहला, दूसरा और तीसरा चरण सफल रहा।भारत का यह पहला सौर मिशन सूर्य और पृथ्वी के बीच मौजूद L1 पॉइंट पर पहुंचने के लिए 125 दिन लेगा। ये 125 दिन 3 जनवरी 2024 को पूरे होंगे।अगले लगभग चार महीनों में करीब 15 लाख किलोमीटर की यात्रा कर यह L1 पॉइंट तक पहुंचेगा।
ISRO के अनुसार, आदित्य-एल1 से कोरोनल हीटिंग, कोरोनल मास इजेक्शन, प्री-फ्लेयर और फ्लेयर गतिविधियों और उनकी विशेषताओं, अंतरिक्ष मौसम की गतिशीलता, पार्टिकल्स के प्रसार आदि को समझने में मदद मिलेगी।
आदित्य-L1 में सात पेलोड यानी उपकरण लगे हैं। इनके जरिए फोटोस्फेयर, क्रोमोस्फेयर और सूरज की सबसे बाहरी परतों यानी कोरोना की स्टडी करेंगे।












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