चारधाम यात्रा प्राधिकरण नहीं मंजूर,तीर्थ पुरोहितों के सुझाव और विरोध के बाद जानिए क्या होंगे बदलाव
उत्तराखंड में धामी सरकार ने चार धाम यात्रा और अन्य मंदिरों के संचालन के साथ ही विकास कार्यों के लिए चारधाम यात्रा प्राधिकरण बनाने का ऐलान किया था। लेकिन हितधारकों की पहली ही बैठक में नाम पर ही आपत्ति दर्ज कराई गई है। जिसके बाद सरकार ने उत्तराखंड धर्मस्व एवं तीर्थाटन परिषद बनाने की बात की है।
हितधारकों ने प्राधिकरण को लेकर आपत्ति जताई थी। साथ ही इसमें कई आशंकाओं को लेकर भी सरकार को सुझाव दिए है। राज्य सरकार की और से इसका ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। हालांकि, अभी परिषद पर अंतिम मुहर लगनी बाकी है।

सचिव पर्यटन सचिन कुर्वे ने प्रस्तावित प्राधिकरण से संबंधित प्रारूप को तीर्थ पुरोहितों के समक्ष रखा। उन्होंने बताया, प्राधिकरण तीन स्तरों पर कार्य करेगा। अपर मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन ने कहा, तीर्थ पुरोहितों को प्राधिकरण को लेकर किसी तरह की शंका नहीं होनी चाहिए। बिना उनके सुझाव और सहमति के कोई भी अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा।
अपर मुख्य सचिव आनंदवर्धन की अध्यक्षता में चारधाम यात्रा के सफल संचालन तथा प्रस्तावित चारधाम यात्रा प्राधिकरण के संबंध में तीर्थ पुरोहितों के संघ, संबंधित होटल एसोसिएशन, पंडा पंचायतों और इससे जुड़े हुए विभिन्न हितधारकों के साथ सचिवालय में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में चारधाम यात्रा के सफल और व्यवस्थित संचालन के संबंध में व्यापक विचार- विमर्श किया गया।
बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में आवागमन की सुगम कनेक्टिविटी, पंजीकरण और आम यात्रियों के दर्शन की सहजता, पार्किंग, शौचालय, स्वच्छता और सुरक्षा इत्यादि के संबंध में विभिन्न हितधारकों द्वारा लिखित सुझाव साझा किये गए।
बैठक में अपर पुलिस महानिदेशक ए. पी. अंशुमान, सचिव सचिन कुर्वे, आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पांडेय, पुलिस महानिरीक्षक डॉ. वी. मुरुगेशन, अध्यक्ष तीर्थ पुरोहित संघ बद्रीनाथ उमानंद सती, अध्यक्ष बद्रीनाथ पंडा पंचायत प्रवीण ध्यान, अध्यक्ष उत्तराखंड तीर्थ पुरोहित महापंचायत सुरेश सेमवाल, महासचिव उत्तराखंड तीर्थ पुरोहित महापंचायत डॉ विजय सती, अध्यक्ष संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति नवीन चंद रमोला, अध्यक्ष होटल एसोसिएशन गंगोत्री अनिल नौटियाल अध्यक्ष होटल एसोसिएशन यमुना घाटी शोभन सिंह राणा, सचिन मंदिर समिति यमुनोत्री सुनील उनियाल, आदि बैठक में उपस्थित थे।
गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव पंडित सुरेश सेमवाल ने कहा कि तीर्थ पुरोहितों ने एक सुर में प्राधिकरण शब्द को हटाने की मांग की है, जिसे सरकार ने मान लिया है। इसके साथ ही जो परिषद बने, उसमें सिर्फ चारों धामों को ही शामिल किया जाना चाहिए। जबकि सरकार इसमें प्रदेश के सभी बड़े मंदिरों को इसमें शामिल कर रही हैं। सुरेश सेमवाल ने कहा कि मंदिरों की परंपरा और हमारे रीति रिवाजों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी।












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