भाजपा अध्यक्ष भट्ट बोले, यूसीसी मातृशक्ति के सशक्तिकरण का प्रभावशाली कदम, पास होते ही होंगे ये कार्यक्रम
यूसीसी ड्राफ्ट विधानसभा से पास करने वाला पहला राज्य बनने के ऐतिहासिक अवसर को भाजपा शानदार तरीके से सेलिब्रेट करने जा रही है। प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने जानकारी दी है कि उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू करने की ऐतिहासिक घड़ी आ गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने यूसीसी का ड्राफ्ट विशेष सत्र में सदन के पटल पर रख दिया है। जिसको लेकर पार्टी को उम्मीद है कि दोनों पक्षों द्वारा सकारात्मक चर्चा के बाद कल विधानसभा से यह बिल पास हो जाएगा। जनभावना का सम्मान एवं वैचारिक प्रतिबद्धता का अनुसरण करते हुए पार्टी के सभी विधायक इस ऐतिहासिक एवं गौरवमयी फैसले का सहभागी बनने के उत्सुक हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्ष के विधायक भी दलगत भावना से ऊपर उठकर देवभूमि की संस्कृति और सभ्यता को सम्मान देते हुए राज्यवासियों को एक समान कानून व्यवस्था दिलाने की प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।
पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा जगह-जगह धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किये जाने के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे । इस दौरान आतिशबाजी, जुलूस एवं मिष्ठान वितरण आदि कर जनता के साथ खुशी मनाई जाएगी l पार्टी ने तय किया है कि कार्यक्रम में सभी वर्गों, धर्म और सम्प्रदाय के लोग विशेष रूप से उपस्थिति रहेंगे।
पार्टी ने तय किया है कि मैदानी जिलो मे यह कार्यक्रम मण्डल और पर्वतीय जनपदों में जिला मुख्यालय के साथ ही नगरीय क्षेत्रों में यह कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
भाजपा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं सभी विधायकों का आभार व्यक्त करते हुए, देवभूमि से एक राष्ट्र एक कानून के शुभारंभ को मातृशक्ति के सशक्तिकरण को अधिक प्रभावी करने वाला कदम और देव भूमि से देश के लिए सुखद संदेश बताया।
प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने यूसीसी को लेकर जन जन की भावनाओं को कॉमन सिविल कोड के निर्णायक स्वरूप में सामने आने का स्वागत करते हुए कहा कि कानूनी समानता के अधिकार जैसे अच्छे काम की शुरुआत के लिए देवभूमि से बेहतर स्थान कोई नही हो सकता था।
उन्होंने प्रदेश के समस्त कार्यकर्ताओं और जनता की तरफ से इस ऐतिहासिक निर्णय पर सभी विधायकों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस कानून को 22 महीनों में 2.33 लाख सुझाव, 43 जन संवाद के सार्वजनिक कार्यक्रम और लगभग 6 दर्जन से अधिक मैराथन बैठक के बाद तैयार किया गया है । जिस पर विधानसभा की संवैधानिक मुहर लगने के बाद अब राज्यपाल की संस्तुति के बाद इस विधेयक का कानूनी शक्ल लेना तय है।
भट्ट ने कहा कि विधेयकमातृ शक्ति के सशक्तिकरण और एक समान कानूनी अधिकार देने की संविधान निर्माताओं के सपनों को पूरा करने वाला है। जो लोग गलतफहमी पैदा करने और भ्रम फैलाने का काम कर रहे थे उन्हें भी अहसास हो गया होगा कि यह कानून हिन्दू-मुस्लिम के वाद-विवाद और बहुसंख्यक अल्पसंख्यक जैसे शब्दों से परे है।
इस प्रगतिशील कानून से राज्य के अंदर महिलाओं और बच्चों को वे सभी अधिकार मिल जाएंगे जिनसे उन्हें विगत 75 वर्षों से वंचित रखा गया है। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य है महिलाओं और बाल अधिकारों को सुनिश्चित करना है।
यह कानून लोगों के अधिकार छीनने का नहीं बल्कि लोगों को अधिकार देने से सम्बंधित है, लिहाजा इससे किसी के धार्मिक रीति रिवाज और वैवाहिक परंपराओं में कोई बदलाव नहीं होगा। सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होने वाला यह कानून संविधान के भाग-4 के अनुच्छेद 37 और अनुच्छेद 44 के प्रावधानों के अनुशार है।
उन्होंने कहा कि इस कानून से दिक्कत उन्हे होने वाली है जो बहु विवाह के द्वारा महिलाओं के अन्याय करने की मंशा रखते हैं या उनको उनके संपत्ति, मुआवजा आदि के जैविक अधिकार से वंचित रखना चाहते हैं । वहीं तलाक के गैर बराबरी के नियमों का लाभ लेते हुए मातृ शक्ति को तलाक का खामियाजा देना, अवैध विवाह, लिव इन रिलेशनशिप आदि के माध्यमों से धोखा देने की प्रवृत्ति, धार्मिक अधिकारों की आड़ में बालिकाओं के बाल विवाह के कृत्यों में संलिप्त रहने वालों के सामने समस्या उत्पन्न होगी।











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