उत्तराखंड में भाजपा ने 23 सीटों पर हार की समीक्षा रिपोर्ट की तैयार, जानिए क्या रही वजह

23 सीटों पर 3 दिन तक पार्टी के 12 पदाधिकारियों ने की समीक्षा

देहरादून, 28 मार्च। उत्तराखंड में 47 सीटें जीतने के बाद भी भाजपा का मिशन 60 प्लस पूरा नहीं हो पाया। ऐसे में पार्टी ने ऐसी 23 सीटों पर हार की समीक्षा पूरी कर ली है। जिन सीटों पर पार्टी जीत नहीं पाई। इन सभी सीटों पर पार्टी ने हार की समीक्षा कर रिपोर्ट तैयार कर ली है। जिसकी रिपोर्ट अब हाईकमान को सौंपी जाएगी। इसके बाद हाईकमान हार के कारणों को लेकर आगे की रणनीति पर फोकस करेगी। साथ ही इसके बाद कार्रवाई भी हो सकती है। जिसमें संगठन स्तर पर भी बदलाव संभव है।

 BJP prepares review report of defeat on 23 seats in Uttarakhand, know what was the reason

3 दिन में 12 पदाधिकारियों ने तैयार की रिपोर्ट
प्रदेश में 23 सीटों पर 3 दिन तक पार्टी के 12 पदाधिकारियों ने विधानसभावार हार की समीक्षा की है। जिनका समय सीमा अब पूरी हो चुकी है। इसके बाद अब रिपोर्ट हाईकमान को सौंपी जानी है। भाजपा सूत्रों का दावा है कि रिपोर्ट में भितरघात हार का अधिकतर सीटों पर कारण बताया गया है। जबकि दूसरा कारण संगठन के बड़े पदों पर काबिज ऐसे पदाधिकारी जिन्होंने टिकट न मिलने के कारण अपनी विधानसभा में धरातल पर कोई काम नहीं किया है। इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार कर अब प्रदेश नेतृत्व के माध्यम से केन्द्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी। जिसके बाद रिपोर्ट पर मंथन होगा। इन 23 सीटों में सबसे प्रमुख सीएम की सीट खटीमा सीट है। जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
संगठन पर लगे हैं गंभीर आरोप
हार की रिपोर्ट में तीन प्रकार की बैठकें कर रिपोर्ट तैयार की गई है। जिसमें सामूहिक बैठक, टोली बैठक और चर्चा बैठक मे कार्यकर्ताओ के साथ वार्तालाप के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है। पार्टी को जिन सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, उनमें यमुनोत्री, बद्रीनाथ, प्रताप नगर, चकराता, ज्वालापुर, भगवानपुर, पिरान कलियर, लक्सर, खानपुर, झबरेड़ा, मंगलौर, हरिद्वार ग्रामीण, धारचूला, पिथौरागढ़, द्वाराहाट, अल्मोड़ा, लोहाघाट, हल्द्वानी,जसपुर, बाजपुर, किच्छा, नानकमत्ता, खटीमा सीटें हैं। खास बात ये है कि इनमें से अधिकतर सीटों पर पार्टी भितरघात के कारण हारी है। जिसको लेकर प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक पर तक आरोप लगे हैं। ऐसे में अब पार्टी के लिए हार के कारणों को लेकर रिपोर्ट पर कार्रवाई करना आसान नहीं होगा। चुनाव निपटते ही सबसे पहले भाजपा के 6 पूर्व विधायक संगठन पर ही सवाल खड़े किए। जिसके बाद हाईकमान ने हार की समीक्षा करने का निर्णय लिया। पार्टी को लोकसभा चुनाव में हर ​सीट पर किसी प्रकार के विवाद से बचना है। साथ ही संगठन को भी मजबूत करना है। लेकिन जिस तरह का विवाद चुनाव बाद हुआ है। उससे संगठन में बदलाव तय है। हार के कारणों में भी भितरघात के आरोप लगे हैं। साथ ही बड़े पदों पर काम कर रहे पदाधिकारियों पर अपने क्षेत्र में काम न करने का आरोप लगा है। इससे आने वाले दिनों में ऐसे पदाधिकारियों पर कार्रवाई तय है। जिससे संगठन स्तर पर बड़ा फेरबदल तय माना जा रहा है।
सीएम की सीट खटीमा पर सबकी नजर
इन 23 सीटों में सबसे ज्यादा नजर मुख्यमंत्री की खटीमा सीट पर है। जिसकी रिपोर्ट अलग से तैयार की गई है। खटीमा सीट पर हार का कारण भी संगठन के बड़े पदाधिकारी और पार्टी के सीनियर नेताओं का क्षेत्र में प्रचार न करना भी वजह मानी गई है। हालांकि ​रिपोर्ट में हार का प्रमुख कारण क्या रहा। ये अभी गुप्त रखा गया है। जो कि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होगी। लेकिन पार्टी ये जरुर जानना चा​हेगी कि आखिर पूरे प्रदेश में सरकार बनाने के लिए मेहनत करने के बाद भी धामी अपना चुनाव कैसे हार गए।

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