पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत प्रकरण से पीएम दौरे से पहले भाजपा को लगा सियासी झटका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 नवंबर को केदारनाथ दौरे पर, उससे पहले पुरोहितों का विरोध पड सकता है भारी
देहरादून, 2 नवंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 नवंबर को केदारनाथ दौरे पर आ रहे हैं। जिसको लेकर भाजपा और सरकार तैयारियों में जुटी है। चुनावी साल में भाजपा पीएम मोदी के दौरे को भुनाने के लिए खास रणनीति पर फोकस कर रही है। आदि गुरू शंकराचार्य की मूर्ति का अनावरण और पूरे देश में इसका व्यापक प्रचार करना चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। लेकिन पीएम दौरे से कुछ दिन पहले केदारनाथ में हुए बवाल से भाजपा के लिए चुनौती खड़ी करने लगा है। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के केदारनाथ पहुंचने और उनको भारी विरोध झेलने की वजह से भाजपा अब विपक्ष के निशाने पर भी आ गई है।

त्रिवेंद्र को नहीं करने दिए केदारनाथ के दर्शन
सोमवार को केदारनाथ धाम में तीर्थ पुरोहितों ने जमकर बवाल काटा। देवस्थानम बोर्ड का विरोध कर रहे तीर्थ पुरोहितों ने रास्ते में लेटकर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का जमकर विरोध किया। पूर्व सीएम को काले झंडे दिखाए गए और गो-बैक के नारों का सामना भी करना पड़ा। जिस वजह से पूर्व सीएम को केदारनाथ के दर्शन किए बिना ही वापस लौटना पड़ा था। इस पूरे प्रकरण को लेकर भाजपा हाईकमान भी परेशान हो गया है। पीएम मोदी दौरे को लेकर भी हाईकमान अलर्ट हो गया है। हाईकमान को डर है कि पीएम मोदी के दौरे के दौरान इस तरह का विरोध न हो। पुरोहित देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग पर अड़े हुए हैं। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत का विरोध ज्यादा इसलिए है क्योंकि त्रिवेंद्र के सीएम रहते ही देवस्थानम बोर्ड पास हुआ था।
त्रिवेंद्र पहुंचे त्रिजुगीनारायण मंदिर
पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने केदारनाथ से लौटने के बाद त्रिजुगीनारायण मंदिर के दर्शन किए। पूर्व सीएम ने इस दौरान पूजा-अर्चना कर भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद लिया। त्रिवेंद्र सिंह ने कहा कि मंदिर का शिल्प भी केदारनाथ जी की ही तरह कत्यूरी शैली का है। उन्होंने कहा कि देवस्थानम बोर्ड को लेकर यहां की मंदिर समिति, उनके परिजन तथा स्थानीय लोगों की खुशी और प्रसन्नता देखते ही बन रही थी। त्रिवेंद्र रावत देवस्थानम बोर्ड को मंदिरों के हित में मानते हैं। जिसका फायदा भविष्य में नजर आएगा। त्रिवेंद्र ने केदारनाथ प्रकरण को शांत कराने के लिए त्रिजुगीनारायण मंदिर के दर्शन किए। जिससे ये संदेश जा सके कि वे यात्रा कर चुके हैं। हालांकि त्रिवेंद्र के इस फैसले से जो प्रकरण हुआ, उसमें पार्टी का डेमेज कंट्रोल नहीं हो पाया है। ऐसे में आने वाले दिनों में भाजपा को देवस्थानम बोर्ड को लेकर बड़ा निर्णय लेना होगा।
धामी सरकार की बढ़ सकती है मुश्किलें
त्रिवेंद्र प्रकरण और पीएम मोदी के दौरे को देखते हुए भाजपा सरकार एक बार फिर बैकफुट में आ गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुछ समय पहले तीर्थ पुरोहितों का मनाकर 31 अक्टूबर का समय दिया था लेकिन समय निकल जाने के बाद भी सरकार अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाई है। ऐसे में चुनावी साल में भाजपा के लिए बड़ी मुश्किलें हो सकती हैं। जिसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ सकता है। साथ ही पीएम मोदी के दौरे से पहले इस तरह के विरोध का भी पार्टी को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।












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