कर्नल अजय कोठियाल को हिमाचल चुनाव में भी हथियार बना सकती है भाजपा, जानिए एंट्री के पीछे की रणनीति
कर्नल अजय कोठियाल भाजपा में शामिल, AAP को देंगे अब चुनौती
देहरादून, 25 मई। आप के सीएम फेस रहे कर्नल अजय कोठियाल को भाजपा में शामिल कराने के पीछे पार्टी ने एक साथ कई निशाने साधने की कोशिश की है। विधानसभा चुनाव में आप की करारी हार होने के बाद कर्नल के राजनीतिक करियर पर सवाल उठने लगे थे। लेकिन भाजपा ने सोच-समझकर कर्नल की एंट्री कराई है। जिसके पीछे सैनिक वोटर, चंपावत उपचुनाव और हिमाचल में आप के सामने एक मजबूत हथियार के रूप में इस्तेमाल करना भाजपा की रणनीति मानी जा रही है।

कांग्रेस पर मनोवैज्ञानिक दबाव
कर्नल को ऐसे समय में पार्टी ज्वाइन कराई गई है जब चंपावत में उपचुनाव होना है। 31 मई को चंपावत में वोटिंंग होनी है। ऐसे में कांग्रेस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए पार्टी ने कर्नल को अपने पाले में लाया है। कर्नल ने अपने संबोधन में इस बात का जिक्र किया भी कि सीएम की सादगी उन्हें बहुत पसंद आई है। साथ ही वे सीएम की कार्यशैली से बहुत प्रभावित हुए हैं। कर्नल ने कहा कि वे चंपावत जाएंगे और सीएम के लिए वोट मांगेंगे।
सैनिकों की सच्ची हितैषी, हिमाचल में नजर
इसके साथ ही कर्नल को पार्टी में लाकर भाजपा ने एक बार फिर ये साबित करने की कोशिश की है, कि वो ही सैनिकों की सच्ची हितैषी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक सैनिक पुत्र हैं। कर्नल अजय कोठियाल भी आर्मी से रिटायर्ड हैं। ऐसे में इस समय पार्टी ने ये संदेश भी देने की कोशिश की है कि भाजपा सैनिकों को पूरा सम्मान दे रही है। इसके साथ ही पार्टी पड़ोसी राज्य हिमाचल में होने वाले चुनावों में कर्नल को सियासी हथियार बना सकती है। आम आदमी पार्टी जोर शोर से हिमाचल में प्रचार-प्रसार में जुटी है। आम आदमी पार्टी पंजाब के बाद हिमाचल पर फोकस कर रही है। हिमाचल पंजाब और उत्तराखंड दोनों राज्यों का पड़ोसी राज्य है। ऐसे में दोनों राज्यों में किए गए चुनाव प्रचार के तरीके हिमाचल में इस्तेमाल किए जाएंगे। हिमाचल भी पहाड़ी राज्य है। ऐसे में उत्तराखंड की टीम हिमाचल में मजबूती से अपना पक्ष रखेगी। जिसके लिए भाजपा को एक मजबूत हथियार मिल गया है। कर्नल अजय कोठियाल को आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने उत्तराखंड में आप का सबसे बड़ा चेहरा बनाया था। इतना ही नहीं कर्नल अरविंद केजरीवाल के सबसे करीबी नेता भी हो गए थे। लेकिन अब चुनाव में मिली हार के बाद केजरीवाल ने कर्नल से दूरियां बना ली थी। जिसके बाद उत्तराखंड में नया संगठन तैयार किया गया। जिस वजह से कर्नल नाराज हो गए और आप से इस्तीफा दे दिया। इस बीच कर्नल और भूपेश उपाध्याय की भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय से हुई। जिसके बाद कर्नल की भाजपा में वापसी के रास्ते खुल गए।
क्या होगी भूमिका
कर्नल को भाजपा में शामिल कराने के बाद ये सवाल भी उठे हैं कि कर्नल का एक साल का राजनीतिक करियर कुछ खास नजर नहीं आ रहा है। आम आदमी पार्टी ने कर्नल को सीएम का चेहरा बनाया। गंगोत्री सीट से चुनाव लड़ाया लेकिन कर्नल चुनाव में कुछ खास नहीं कर पाए। इतना ही नहीं कर्नल की जमानत तक जब्त हो गई। ऐसे में भाजपा के अंदरखाने ही कर्नल के राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कर्नल का पार्टी संगठन में इस्तेमाल होगा या फिर उन्हें कोई जिम्मेदारी दी जाती है। इस पर भी संशय बना हुआ है। लेकिन ये साफ है कि कर्नल को पार्टी एक सैनिक वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल जरुर करेगी।












Click it and Unblock the Notifications