मतदान से पहले भाजपा, कांग्रेस ने चले नए दांव, तराई सीटों से तय होगा बहुमत का रास्ता
मुख्य मुकाबला भाजपा-कांग्रेस में, तराई बदल सकते हैं समीकरण
देहरादून, 11 फरवरी। देवभूमि के दंगल के लिए काउंडाउन शुरू हो गया है। 14 फरवरी को 70 सीटों पर मतदान होना है। इसके लिए सभी सियासी दल पूरा जोर लगा रहे हैं। हालांकि अब तक जो भी मीडिया सर्वे सामने आए हैं उनमें मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस में ही नजर आ रहा है। लेकिन आम आदमी पार्टी, उत्तराखंड क्रांति दल, बहुजन समाज पार्टी और अन्य निर्दलीय मुकाबले को त्रिकोणीय जरुर बना रहे हैं। जो कि हार जीत के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। ऐसे में बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए भाजपा, कांग्रेस को अपने स्टार प्रचारकों के भरोसे ही रहना पड़ रहा है। भाजपा ने प्रचार-प्रसार के अंतिम चरण में पहाड़ों की सीटों पर फोकस किया है। जिसके लिए अपने स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मैदान में उतार दिया है। मोदी के मैदान में उतरने के बाद भाजपा को इसका लाभ भी दिखता हुआ नजर आ रहा है। इसके अलावा कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने मोर्चा संभाला हुआ है। इसके पीछे की रणनीति स्टार प्रचारकों के भरोसे बची हुई सीटों और समीकरणों को साधने की है।

भाजपा को गढ़वाल और कांग्रेस को कुमाऊं की सीटों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। अब तक सामने आ रहे मीडिया सर्वे में भाजपा को गढ़वाल में तो बढ़त दिख रही है लेकिन कुमाऊं में कांग्रेस आगे नजर आ रही है। ऐसे में दोनों दलों आखिरी समय में तराई सीट पर ही फोकस किया है। तराई सीट पर भाजपा, कांग्रेस के लिए आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी कड़ी टक्कर दे रहे हैं। जो कि वोटबैंक पर भी सेंधमारी कर रहे हैं। ये दल वोटबैंक पर सेंधमारी करने के साथ ही कुछ सीटों पर भी कब्जा कर सकते हैं। इन सभी समीकरणों को देखने के बाद भाजपा, कांग्रेस ने अंतिम समय में अपने नए दांव चले हैं। जिसके लिए स्टार प्रचारकों की ही सहायता ली जा रही है।
अंतिम चरण में बदली सियासी चाल
मतदान से पहले भाजपा ने उत्तराखंड में मुस्लिम यूनिवर्सिटी और धार्मिक मुद्दों को उछाल कर पहाड़ में बढ़त बना दी है। राजनीति के जानकारों की मानें तो भाजपा का ये दांव चुनाव में वोटबैंक में बदल सकता है। बीते दिनों मीडिया सर्वे में भाजपा को पहाड़ में कमजोर बताया जा रहा था। लेकिन मोदी फैक्टर और मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मु्द्दे के बाद भाजपा को इसका फायदा होता हुआ नजर आ रहा है। कांग्रेस ने भाजपा की इस बढ़त को कम करने के लिए अपने स्टार चेहरे राहुल और प्रियंका को मैदान में उतारकर वोटबैंक पर सेंधमारी करने की कोशिश जरुर की है। इसके लिए चुनाव प्रचार के अंतिम दिन प्रियंका गांधी की रैली रखी गई है। दरअसल भाजपा और कांग्रेस गढ़वाल और कुमाऊं में अपने-अपने गढ़ को मजबूत मान कर चल रही है। लेकिन सबसे ज्यादा लड़ाई तराई की 22 से ज्यादा सीटों पर हैं। ऐसे में ये माना जा सकता है कि तराई फैक्टर ही बहुमत का रास्ता तय करेगा। पहाड़ में मोदी और गांधी परिवार का फैक्टर चल रहा है। लेकिन तराई सीट पर निर्णायक रहने वाला वोटर अभी शांत नजर आ रहा है। जो कि जिस ओर घूमेगा उसी को बहुमत तक पहुंचा सकता है। इसके लिए भाजपा, कांग्रेस को दूसरे दलों की भी मदद लेनी पड़ सकती है।












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