बागेश्वर उपचुनाव: भाजपा का खास माइक्रो मैनेजमेंट कार्यक्रम, लोकसभा चुनाव से पहले ये है तैयारी
बागेश्वर उपचुनाव को लेकर प्रत्याशियों के नामांकन के बाद अब प्रचार प्रसार तेज हो गया है। इस बीच भाजपा,कांग्रेस अपने अपने स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी कर चुनाव को अपने अपने पक्ष में करने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं।
बागेश्वर उपचुनाव को लेकर प्रत्याशियों के नामांकन के बाद अब प्रचार प्रसार तेज हो गया है। इस बीच भाजपा,कांग्रेस अपने अपने स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी कर चुनाव को अपने अपने पक्ष में करने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं। भाजपा हर हाल में उपचुनाव को जीतने के लिए अपने सभी रणनीतिकारों को मैदान में उतार रही है।

लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए ये चुनाव काफी अहम माना जा रहा है। ऐसे में इस चुनाव में भाजपा अपने सभी तरह के चुनावी रणनीति का प्रयोग कर रही है। बताते चले कि भाजपा हाईकमान किसी भी चुनाव को हल्के में नहीं लेती है। अब बागेश्वर में भाजपा ने 42 प्रवासी प्रभारी मैदान में उतारे हैं। उन्हें शक्ति केंद्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
भाजपा ने 43 शक्ति केंद्रों पर प्रवासी प्रभारियों की तैनाती कर दी है। भाजपा अपने माइक्रो मैनेजमेंट कार्यक्रम के तहत जनता तक पहुंचने में जुटी है। भाजपा के पास बूथ लेबल तक संगठन है। जिसमें शक्ति केंद्र, बूथ प्रभारी और पन्ना प्रमुख तक के पदाधिकारी हैं। बूथ में दर्जनों कार्यकर्ता हैं। उन्होंने प्रत्येक शक्ति केंद्रों में नियुक्त करते हुए उन्हें जिम्मेदारी सौंपी है।
सभी प्रवासियों को शक्ति केंद्रों में जाकर बूथ लेबल पर पहुंचने को कहा। जिससे उपचुनाव में भी शानदार जीत को प्राप्त कर लोकसभा चुनाव तक हर तरह से जनता तक पहुंचा जा सके। बागेश्वर में मुख्य मुकाबला भाजपा की पार्वती दास और कांग्रेस के बसंत कुमार के बीच माना जा रहा है।
भाजपा का दावा है कि वे इस चुनाव को चंपावत के उपचुनाव से भी भारी मतों से जीतकर रिकॉर्ड बनाने जा रही है। ऐसे में इस उपचुनाव में भाजपा माइक्रो मैनेजमेंट कार्यक्रम के जरिए रिकॉर्ड जीत प्राप्त करना चाहती है। ये जानते हुए भी कि इस सीट पर भाजपा का दबदबा रहा है और उपचुनाव का इतिहास हमेशा सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में रहा है। उत्तराखंड की बागेश्वर विधानसभा सीट पर 5 सितंबर को उपचुनाव होगा।












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