बदरीनाथ धाम में माता मूर्ति उत्सव, माणा में माता मूर्ति मंदिर जाएंगे बदरी विशाल, जानिए क्यों खास है ये परंपरा
भाद्रपद शुक्ल द्वादशी अर्थात बामन द्वादशी पर भगवान बदरीविशाल अपनी माता मूर्ति देवी को मिलने माणा स्थित श्री माता मूर्ति मंदिर जाते है। इस दौरान मेला और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होते हैं। इस बार मंगलवार 26 सितंबर को बदरीनाथ धाम में माता मूर्ति उत्सव होगा। कल सुबह 10 बजे भगवान बदरी विशाल स्वरूप उद्धव जी देव डोली में बैठकर बदरीनाथ भगवान की माता मूर्ति देवी को मिलने जायेंगे। इस दौरान माना जाता है कि दोनों एक दूसरे की कुशलक्षेम पूछते हैं।

माता मूर्ति उत्सव भाद्रपद बामन द्वादशी के अवसर पर आयोजित होता है। इससे पहले माणा गांव से भगवान बदरी विशाल के क्षेत्रपाल रक्षक घंटाकर्ण महाराज 25 सितंबर शाम को बदरीनाथ मंदिर पहुंचकर बदरीनाथ भगवान को मातामूर्ति आने का न्योता देंगे।
मंगलवार को बाल भोग के बाद उद्धव जी की डोली सहित रावल, धर्माधिकारी- वेदपाठी तथा मंदिर समिति के पदाधिकारी, अधिकारी- कर्मचारी, तीर्थ पुरोहित, व्यापार सभा, दस्तूरधारी साधु संत सहित पुलिस प्रशासन, आईटीबीपी के प्रतिनिधि माता मूर्ति पहुंचेगे। रास्ते में पर्यटक ग्राम माणा की महिलाएं उद्धव जी को जौ की हरियाली भेंट करेंगी। माता मूर्ति में उद्धव जी मातामूर्ति जी को मिलेंगे और कुशल क्षेम बतायेंगे।
अभिषेक,पूजा-अर्चना तथा दिन का भोग मातामूर्ति मंदिर में आयोजित होगा। मेले के दौरान दिन में तीन बजे तक श्री बदरीनाथ मंदिर बंद रहेगा। अपराह्न तीन बजे से पूर्व उद्धव जी की डोली में बैठकर श्री बदरीनाथ धाम को वापस आ जायेगे और बदरीनाथ मंदिर गर्भगृह में विराजमान हो जायेंगे। पुनः मंदिर में दर्शन शुरू हो जायेंगे। शाम के समय बामणी गांव से कुबेर जी के पश्वा (अवतारी पुरुष) बदरीनाथ मंदिर पहुंचेंगे और धार्मिक रस्म संपन्न होगी।
माता मूर्ति मंदिर बद्रीनाथ से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। माता मूर्ति मंदिर अलकनंदा नदी के किनारे पर स्थित है। माता मूर्ति मंदिर प्राचीन मंदिर है। यह हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है और हिंदू देवता, माता मूर्ति को समर्पित है। माता मूर्ति मंदिर, माता मूर्ति के दो बेटों को समर्पित है, जिनका नाम नर और नारायण है। पौराणिक कथा के अनुसार माता मूर्ति ने भगवान विष्णु से उनके गर्भ से जन्म लेने के लिए प्रार्थना की थी। उसकी इच्छा को स्वीकार करते हुए, भगवान विष्णु ने एक राक्षस को मारने के उद्देश्य से जुड़वाँ नर और नारायण के रूप में जन्म लिया।












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