Badrinath dham: बद्रीनाथ की सजावट में 'कमल का फूल' बना विवाद की वजह, जानिए क्या है पूरा मामला ?
बद्रीनाथ धाम में फुलों की सजावट को लेकर विवाद
उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चार धाम यात्रा के प्रमुख पड़ाव बद्रीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो गए हैं। 19 नवंबर को भगवान बदरी विशाल के कपाट बंद हुए। इस दौरान हजारों की संख्या में भक्त बद्रीनाथ धाम पहुंचे और इस पल के साक्षी बने। कपाट बंद होने के समय बद्रीनाथ धाम की सजावट और भक्तिमय माहौल से हर कोई मंत्रमुग्ध हो रहा था। लेकिन एक चीज पर हर किसी का ध्यान गया जो कि इस बार की सजावट में काफी अलग था।

प्रवेश द्वार पर कमल के फूल की आकृति की सजावट
बद्रीनाथ धाम में जो फुलों की सजावट की गई थी, उसमें प्रवेश द्वार पर कमल के फूल की आकृति की सजावट की गई। ये फोटो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हुई। जिसको लेकर जमकर सियासत हो रही है। विपक्ष इसे भाजपा का चुनाव चिह्र बता रही है तो मंदिर समिति कमल को धार्मिक मान्यता से जोड़कर देखने की बात कर रही है। हालांकि इस मामले से एक बार फिर मंदिर को लेकर सियासत तेज है।

कांग्रेस का आरोप भाजपा सरकार ने मंदिरों को भी नहीं छोड़ा
विवाद तब शुरू हुआ जब इसे सियासी नजर से देखना शुरू हुआ। कमल भारतीय जनता पार्टी का चुनाव चिह्न भी है। ऐसे में इस पर जमकर सियासत शुरू हो गई। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार हर तरफ राजनीतिकरण कर रही है। जिसमें मंदिरों को भी नहीं छोड़ा। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष संगठन मथुरा दत्त जोशी ने आरोप लगाया कि भाजपा अब मंदिरों में भी प्रचार कर रही है। इस तरह मंदिर के द्वार पर चिह्रन लगाना गलत है।

मंदिर की सजावट का काम से मंदिर समिति का कोई लेना देना नहीं
विवाद बढ़ता देख अब बद्रीनाथ मंदिर समिति ने इन आरोपों पर पलटवार किया है। बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजेय ने बताया कि मंदिर की सजावट का काम से मंदिर समिति का कोई लेना देना नहीं है। मंंदिर की सजावट का काम निशुल्क ऋषिकेश की बदरीनाथ पुष्प सेवा समिति करती है। उन्हांने बताया कि ये कलाकारों की सोच है। हर किसी बात में सियासत करना सही नहीं है।

बीकेटीसी तर्क, भगवान बिष्णु की नाभि कमल से ब्रह्रमा जी की उत्पति
उन्होंने कहा कि बदरीनाथ मंदिर भगवान बिष्णु को समर्पित है। शास्त्रों में बताया गया है कि कमल भगवान बिष्णु को प्रिय है। भगवान बिष्णु की नाभि कमल से ब्रह्रमा जी की उत्पति बताई गई है। ऐसे में बदरी विशाल के परिसर में कमल की सजावट करना या कमल का चिह्रन बनाना गलत भी नहीं है। उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को नकारते हुए कहा कि कांग्रेस को हर बात पर बिना तर्क के राजनीति करने की आदत हो गई इै। जो सही नहीं है। धार्मिक स्थलों को लेकर इस तरह की सियासत की निंदा होनी चाहिए।

रिकॉर्ड, दोनों धाम में 60 करोड़ की धनराशि दानस्वरूप प्राप्त हुई
बद्रीनाथ के कपाट बंद होते ही इस सीजन की चारधाम यात्रा का समापन हो गया। इस बार की यात्रा कई मायने में खास रही है। एक तरफ यात्रा में आए श्रद्धालुओं ने रिकॉर्ड बनाया है। वहीं इस बार मंदिर समिति को दान भी पहले से कई गुना मिला है। इस सीजन में कुल 17,65,649 तीर्थयात्री बद्रीनाथ पहुंचे। 33.26 लाख तीर्थ यात्रियों ने बदरी-केदार धाम में दर्शन किए, जिनसे दोनों धाम में 60 करोड़ की धनराशि दानस्वरूप प्राप्त हुई। इसके अलावा महाराष्ट्र के एक दानी परिवार ने केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह को स्वर्णमंडित भी दान किया है।

चारों धामों में करीब 46 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए
1763549 तीर्थ यात्री बदरीनाथ और 1563275 तीर्थ यात्री केदारनाथ दर्शनों को पहुंचे। तीर्थ यात्रियों से बदरीनाथ धाम को 34.5 करोड़ की आय हुई, जबकि वर्ष 2019 में 27 करोड़ की आय हुई थी। इसी तरह केदारनाथ धाम को इस बार 25.5 करोड़ की आय हुई, जबकि वर्ष 2019 में 17.5 करोड़ की आय हुई थी। पहली बार चारों धामों में करीब 46 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए।












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