Uttarakhand: 5 सितंबर से शुरू होगा विधानसभा सत्र, यूसीसी को लेकर तेज हुई चर्चा, सीएम धामी ने कही ये बात
उत्तराखंड में विधानसभा का सत्र 5 सितंबर से शुरू होने जा रहा है, जो कि 8 सितंबर तक प्रस्तावित है। इस बीच यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
उत्तराखंड में विधानसभा का सत्र 5 सितंबर से शुरू होने जा रहा है, जो कि 8 सितंबर तक प्रस्तावित है। इस बीच यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। सीएम पुष्कर सिंह धामी भी यूसीसी को लेकर मीडिया के सवालों के जबाव में जल्द ही इसे लागू करने की बात कर रहे हैं। ऐसे में ये माना जा रहा है कि विधानसभा सत्र के आसपास यूसीसी को लेकर बनाई गई कमेटी ड्राफ्ट सौंप सकती है।

हाल ही में दिल्ली से लौटने के बाद सीएम धामी दो बार यूसीसी का जिक्र कर चुके हैं। सीएम धामी ने हाल ही में दो मीडिया से संवाद कार्यक्रम में इस बात का जिक्र किया है कि जनता से उन्होंने चुनाव में जाने से पहले ये विश्वास दिलाया था कि जब भी उनकी सरकार आएगी तुरंत यूसीसी की तरफ कदम बढ़ाया जाएगा।
ऐसे में वे इससे पीछे नहीं हटने वाले। साफ है कि सीएम धामी इस पर पूरी तरह से होमवर्क कर चुकें हैं। विधानसभा सत्र को लेकर चल रही तैयारियों के बीच ये माना जा रहा है कि धामी सरकार विधानसभा सत्र के दौरान ड्राफ्ट को पेश करेगी। ऐसे में सरकार अपना पूरा होमवर्क करने में जुटी है। यूसीसी का ड्राफ्ट मिलने के बाद सरकार को इस विधानसभा में पेश करना होगा। इसके बाद इस पर आगे निर्णय होगा।
धामी सरकार पर इस समय पूरे देश की नजर टिकी हुई है। सरकार की ओर से समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कई कदम उठाए जा चुके हैं। गठित समिति का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। जो कि अब सरकार को सौंपा जाना है। इसके बाद धामी सरकार इसे विधानसभा सत्र में पेश करेगी। जिसके बाद यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बनेगा।
यूसीसी को लेकर लोगों की आशंकाओं को सीएम धामी पहले ही दूर करने की कोशिश कर रहे हैं, सीएम धामी का कहना है कि समान नागरिक संहिता में समुदाय विशेष को कोई नुकसान नहीं होगा। धामी ने कहा कि राज्य की जनता से उन्होंने समान नागरिक संहिता लागू करने का वादा किया था। जन अपेक्षाओं के अनुरूप इस दिशा में कदम बढ़ रहे हैं। सीएम धामी ने कहा कि राज्य में कोई भी किसी पंथ, समुदाय, धर्म, जाति का हो, सबके लिये एक समान कानून हो, इसके प्रयास किए गए हैं। समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए गठित समिति ने डेढ़ साल में दो लाख से भी ज्यादा लोगों के सुझाव, विचार लिए।












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