Covid-19: उत्तराखंड सरकार के दावों की खुली पोल, अल्मोड़ा के जंगलों में खुले में हो रहा अंतिम संस्कार
नई दिल्ली, 22 मई: कोरोना वायरस की दूसरी लहर से पहाड़ी राज्य उत्तराखंड भी बुरी तरह प्रभावित है, जहां कुंभ के बाद केस कई गुना बढ़ गए। सबसे बुरा हाल तो पहाड़ पर बसे गांवों का है, क्योंकि वहां पर ना तो टेस्टिंग की सुविधा मौजूद है और ना ही ढंग के अस्पताल। कई जगहों पर मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा, लेकिन प्रशासन को इसकी खबर ही नहीं लग पा रही है। अब उत्तराखंड के जंगलों में अस्थायी श्मशान घाट बनाकर शवों को गैरजिम्मेदाराना तरीके से जलाने का मामला सामने आया है, हालांकि राज्य सरकार इन दावों का खंडन कर रही है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड में जमीनी हकीकत सरकार के दावों से अलग है। हालात इतने ज्यादा बेकाबू हो गए हैं कि अल्मोड़ा के जंगल में अस्थाई श्मशान घाट बनाया गया है, जहां पर खुले में शवों का अंतिम संस्कार हो रहा है। हैरानी की बात तो ये है कि मृतकों के परिजनों को किसी तरह की मदद भी वहां पर प्रशासन नहीं दे रहा, जिस वजह से लोग अपने स्तर पर इंतजाम करके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरा कर रहे। वहीं इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद हड़कंप मच गया, आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन सफाई देने में जुट गए।
मामले में सफाई देते हुए सरकार ने कहा कि अल्मोड़ा जिले में जिस स्थान पर खुले जंगल में शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा था। वो जगह दाह संस्कार के लिए नामित स्थल है। वहां पर शवों को कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत ही जलाया जा रहा है। वहीं राज्य स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि एसडीएम अल्मोड़ा, ANA-ZP और ईओ-एनपी अल्मोड़ा को साइट प्रभारी बनाया है। वो अपना सर्वोत्तम प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा पहाड़ियों में कोई नामित श्मशान नहीं है, लेकिन घाटों पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है। जिसमें पीपीई किट के साथ नियुक्त कर्मचारी अपना काम कर रहे हैं।
स्थानीय लोग कर रहे विरोध
गांवों के पास जंगलों में दाह संस्कार होने से ग्रामीणों में खौफ का माहौल है, वो जिला प्रशासन के सामने इसका विरोध भी कर रहे हैं। साथ ही ग्रामीणों द्वारा कई पत्र भी लिखे गए, जिसमें अनुरोध किया गया कि शवों का अंतिम संस्कार गांव से दूर किसी दूसरी जगह पर किया जाना चाहिए। इसके अलावा कई मृतकों के परिजन तो साफ कह रहे कि अंतिम संस्कार के वक्त उनको प्रशासन की ओर से कोई मार्गदर्शन नहीं मिला था। उस वक्त उनसे जो हो सका, उन्होंने उसी हिसाब से सब किया।












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