कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के अगले कदम पर टिकी निगाहें, कहीं खुद तो नहीं लिखी पूरी पटकथा

भाजपा नेताओं से मिलकर पहले ​ही लिख दी थी पटकथा

देहरादून, 13 जनवरी। उत्तराखंड के कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के अगले राजनीतिक कदम को लेकर एक बार ​फिर ​सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस हाईकमान की ओर से किशोर उपाध्याय को सभी पदों से हटाने के बाद उनके भाजपा में भी जाने की खबरें सियासी हलकों में उठने लगी है। हालांकि अभी तक किशोर उपाध्याय की ओर से इस पर कोई बयान जारी नहीं हुआ है। ऐसे में हर कोई किशोर के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। किशोर के बीते दिनों भाजपा नेताओं से हुई मुलाकात के बाद ये माना जा रहा है किशोर ने खुद ही इस पूरे प्रकरण की पटकथा लिख दी थी।

 All eyes on the next step of former Congress state president Kishor Upadhyay, has he not written the entire script himself?

प्रभारी से सभी पदों से हटाया
बुधवार देर शाम को कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी देवेंन्द्र यादव की ओर से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को पार्टी के सभी पदों से हटाने का पत्र जारी होते ही उत्तराखंड कांग्रेस के अंदर एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया। पत्र में साफ कहा गया ​कि लगातार दी जा रही चेतावनी के बाद भी पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। हाल ही में किशोर उपाध्याय की भाजपा चुनाव प्रभारी प्रह्रलाद जोशी से मुलाकात के बाद का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था, जिसमें वे भाजपा के महामंत्री अजेय कुमार के आवास से बाहर आते हुए दिखे थे। इसके बाद किशोर के भाजपा में जाने की खबरें सोशल मीडिया में आती रहीं।
बुधवार को भी थी भाजपा ज्वाइन करने की खबरें
बुधवार को सीएम पुष्कर सिंह धामी की प्रेस वार्ता में भी किशोर के भाजपा ज्वाइन करने की खबरें सामने आई, जब भाजपा के सभी पूर्व सीएम कार्यक्रम में मौजूद थे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। हालांकि देर शाम कांग्रेस ने उन्हें जिम्मेदारियों से मुक्त करने का आदेश जरुर सुना दिया। अब खबरें हैं कि किशोर का भाजपा में जाने का रास्ता साफ हो गया है। इस प्रकरण के बाद ये भी कयास लगाए जा रहे हैं कि किशोर चाहते थे कि पार्टी हाईकमान इस तरह का कोई फैसला ले, जिससे वे पाक साफ होकर भाजपा में जा सके। चुनाव से पहले दलबदल का किसी तरह का उन पर आरोप न लगे। अब उनका रास्ता पूरी तरह से साफ हो चुका है।
हरीश रावत बनें किशोर की नाराजगी की वजह
किशोर वर्तमान में चुनाव संचालन के लिए बनाई गई समितियों के सदस्य के साथ ही समन्वय समिति के चेयरमैन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। किशोर उपाध्याय जून 2014 से मई 2017 तक पार्टी प्रदेश अध्यक्ष रहे। इससे पूर्व वह एनडी तिवारी सरकार में उद्योग राज्यमंत्री रहे। वर्ष 2008 से 2012 तक प्रदेश प्रवक्ता के साथ कांग्रेस विधानमंडल दल के सचेतक के रूप में भी काम कर चुके हैं। 2017 में सहसपुर से चुनाव हारने के बाद वे हरीश रावत से दूर होते गए, इसी वजह से कांग्रेस के अंदर किशोर का कद कम होता गया। इतना ही नहीं हरीश रावत सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे निर्दलीय विधायक दिनेश धन्नै को ज्यादा तवज्जो देना भी किशोर की नाराजगी का कारण बना है। किशोर अगर भाजपा में जाते हैं तो किशोर का कांग्रेस के लिए रास्ता खुलना तय है। किशोर के भाजपा से नजदीकियों का कारण ये सभी प्रकरण है। हालांकि बीच में वे समाजवादी पार्टी प्रमुख ​अखिलेश यादव से भी मिले लेकिन ये उनके एक व्यक्तिगत आंदोलन का हिस्सा माना जाता है।

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