यशपाल आर्य के कांग्रेस में जाने के बाद सीएम धामी ने दलितों को अपने पक्ष में करने के लिए चला ये मास्टरस्ट्रोक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का दलित कार्ड, कांग्रेस को दी चुनौती
देहरादून, 11 नवंबर। उत्तराखंड में भाजपा अब यशपाल आर्य के कांग्रेस में जाने के बाद दलित वोट बैंक को लेकर नए प्रयोग करने में जुट गई है। भाजपा ने यशपाल आर्य की कमी को पूरा करने के लिए दलित समुदाय को साधना शुरू कर दिया है। बुधवार को हल्द्वानी पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अचानक दलित बस्ती में पहुंचकर अपने प्रिय और पुराने मित्र नंद किशोर आर्य के घर जाकर उनके परिजनों से मुलाक़ात की और उनके साथ भोजन भी किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस कदम के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।

दलित वोट मजबूत करने मे जुटी भाजपा
हल्द्वानी भाजपा और कांग्रेस के लिए इस बार हॉट सीट बन गई है। पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य उत्तराखंड के बड़े दलित चेहरे हैं। जो कि 2017 में भाजपा के लिए अहम कड़ी साबित हुए थे, लेकिन अब चुनाव से पहले यशपाल बेटे के साथ कांग्रेस में चले गए। जिससे दलित कार्ड को लेकर भाजपा कमजोर नजर आने लगी है। लेकिन भाजपा अब दलित वोट को साधने के लिए नए-नए तरीके अपना रही है। सीएम के इस कदम को भी इसी से जोड़ा जा रहा है।

अचानक भोजन करने पहुंचे सीएम
बुधवार को उत्तराखंड सरकार ने हल्द्वानी में उत्तराखंड स्थापना दिवस पर महोत्सव का आयोजन किया। देर शाम अचानक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हल्द्वानी के राजपुरा में अपने पुराने दलित मित्र नंद किशोर आर्य के घर पहुंचे। जहां पहले मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने नंद किशोर और उनके परिजनों के साथ भोजन भी किया। मुख्यमंत्री ने नंद किशोर को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के लिए भी मदद देने की बात की है। मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम से राजपुरा और दलित समुदाय में खासा उत्साह है। जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में पुष्कर सिंह धामी के इस कदम के सियायी मायने निकाले जाने लगे हैं।

दलितों को साधने में जुटी है भाजपा
उत्तराखंड में पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के कांग्रेस में घर वापसी के बाद भाजपा की अब दलित वोटर पर नजर है। भाजपा दलित वर्ग को अपने पक्ष में करने के लिए हर तरह के नए समीकरणों पर फोकस करने में जुटी है। दलित के घर भोजन करने से पहले मुख्यमंत्री पारंपरिक वाद्ययंत्रों ढोल, दमाऊ, रणसिंघा, मशकबीन से जुड़े लोगों को बड़ी सौगात दे चुके हैं। देने का ऐलान किया है। पारंपरिक वाद्ययंत्रों से जुड़े लोग दलित समुदाय से आते हैं। उत्तराखंड में 18 परसेंट दलित वोटर है। जो कि बीते सालों में बहुजन समाज पार्टी से हटकर भाजपा और कांग्रेस की तरफ झुका है। 2017 में भाजपा के पास यशपाल आर्य दलित चेहरा था, इस बार भाजपा बड़े दलित चेहरे की तलाश में होने के साथ ही दलितों के उत्थान पर खासा फोकस कर रही है। पूर्व सीएम हरीश रावत के दलित कार्ड खेलने के बाद भाजपा के अंदर दलितों को लेकर खासा डर है। ऐसे में भाजपा दलितों को साधने के लिए नए-नए दांव खेल रही है। अभी हाल ही में एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद ढोल बजाते हुए ढोल वादकों का प्रोत्साहन करते हुए नजर आए। इसके अलावा सरकार ने ढोल वादकों को प्रोत्साहन राशि मिलने के प्रति आश्वस्त भी किया। साथ ही ढोल वादकों को उत्तराखंड के मंदिरों में रोजगार देने की बात भी की है।












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