यूपी के बाद क्या उत्तराखंड में भी होगा बड़ा बदलाव,जानिए पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत के बयान के सियासी मायने

उत्तर प्रदेश में भाजपा और योगी सरकार के बीच तेजी से चीजें बदलती हुई नजर आ रही हैं। सरकार और संगठन में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

इस बीच उत्तराखंड में हुई भाजपा कार्यसमिति की बैठक के बाद से पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत के बयानों से भी अंदरखाने हलचल तेज हो गई है।

After UP will big change Uttarakhand also know political meaning statement former CM Tirath Rawat

तीरथ सिंह रावत के बयान सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या उत्तराखंड भाजपा में सब ठीक चल रहा है। या आने वाले समय में यहां भी कुछ बदलाव हो सकता है।

भाजपा कार्यसमिति की बैठक में तीरथ सिंह रावत ने खूब सुर्खियां बटोरी। तीरथ रावत ने जिस अंदाज में अपना भाषण दिया, साफ है कि वे सरकार और संगठन को नसीहत दे रहे थे। उन्होंने जहां बदरीनाथ उपचुनाव में हार के​ लिए जिम्मेदारी तय करने की बात की तो वहीं सबको जमीन पर ही रहने की नसीहत भी दी।

तीरथ सिंह ने ​इशारों इशारों में ही दूसरे दलों से भाजपा में आ रहे नेताओं पर सवाल खड़े करते हुए सबसे रायमशविरा करने की सलाह भी दे डाली। साफ है कि राजेंद्र भंडारी की हार के लिए वे संगठन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। हालांकि अब तक ये साफ नहीं है कि भंडारी को भाजपा में लाने के लिए किसने पटकथा लिखी।

प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से उनकी सियासी जंग किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में भंडारी को केंद्र के किसी नेता के इशारों पर ही एंट्री मिली है। तीरथ यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि जनता आगे बढ़ चुकी है, हम पीछे रह गए हैं। पदों पर बैठे लोगों को आईना दिखाते हुए तीरथ सिंह ने कहा जमीन छोड़कर चलने वालों को इस बात को याद रखना होगा जो आज यहां बैठे हैं कोई बड़ा आदमी नहीं है, कल आखिर में भी हो सकते हैं।

कहा कि आज मैं हूं कल तुम हो सकते हो। तीरथ का इशारा साफ है जिस तरह मेरी कुर्सी गई, ऐसे किसी के साथ कुछ भी कभी भी हो सकता है। कोई कभी भी सामान्य कार्यकर्ता से बड़े पद पर बैठाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने सीएम पुष्कर सिंह धामी की तारीफ की और 15 साल तक सीएम बने रहने की भी अपने दिल की बात कह दी।

तीरथ सिंह रावत का लोकसभा चुनाव के दौरान गढ़वाल सीट से टिकट काटकर अनिल बलूनी को उतारा गया। जिसके बाद से नाराज माने जा रहे हैं। अब राजेंद्र भंडारी को भाजपा में लाने में अनिल बलूनी की सबसे बड़ी भूमिका मानी जा रही है। ऐसे में तीरथ ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है।

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