उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में गढ़वाल,कुमाऊं के बाद अब तराई फेक्टर क्यों है जरूरी, पढ़िए पूरी खबर

तराई क्षेत्र में राजनैतिक दलों का फोकस

देहरादून, 15 सितंबर। उत्तराखंड प्रदेश की जब भी राजनैतिक दल समीक्षा करते हैं तो दो समीकरण को साधने की कोशिश जरुर करते हैं। पहला है क्षेत्रीय और दूसरा है जातीगत। राजनैति​क निर्णय लेने से पहले कोई भी दल क्षेत्रीय समीकरणों को जरुर ध्यान में रखते हैं। बीते 21 साल में उत्तराखंड में गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र को देखते हुए ही निर्णय लिए जाते रहे हैं। लेकिन बीते कुछ समय से उत्तराखंड में तीसरे समीकरण तराई का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इसके पीछे की वजह किसानों का आंदोलन और उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी का तराई क्षेत्र का होना माना जा रहा है। जानकार बताते हैं कि तराई क्षेत्र में वोटर और जनसंख्या का बढ़ना इसका पहला कारण है।

After Garhwal, Kumaon in Uttarakhand assembly elections, why is the Terai factor important now, read the full news

किसान आंदोलन और सीएम की सीट का तराई पर प्रभाव
सत्ताधारी बीजेपी ने उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले युवा और तराई क्षेत्र से सीएम पुष्कर सिंह धामी को कमान सौंपी। बीजेपी ने इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष पर मदन कौशिक को जिम्मेदारी सौंपी। लेकिन मदन कौशिक के मैदानी क्षेत्र से होने के चलते बीजेपी में क्षेत्रीय समीकरणों को संतुलित करने की मांग उठने लगी है। धामी को बीजेपी हाईकमान ने ऐसे समय में कमान सौंपी जब पूरे देश में​ किसानों का आंदोलन चल रहा है। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव को देखते हुए किसान आंदोलन का असर पहाड़ी प्रदेश पर पड़ना तय माना जा रहा है। उत्तराखंड में 4 जिलों पर किसानों का प्रभाव है। ऐसे में बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर चुनावी साल में गंभीरता से फोकस कर रहे हैं।

कांग्रेस का भी तराई पर खास फोकस
कांग्रेस ने सत्ता वापसी के लिए परिवर्तन यात्रा निकालने का ऐलान किया। जिसके लिए सबसे पहले तराई क्षेत्र को चुना गया। कांग्रेस ने किसान आंदोलन को देखते हुए सबसे पहले चरण की शुरूआत खटीमा, यूएसनगर, रुद्रपुर जैसे इलाकों से की। जहां किसानों का सबसे बड़ा वोटबैंक है। इसके अलावा सीएम के विधानसभा क्षेत्र खटीमा भी प्रदेश की सबसे हॉट सीट बन गई है। पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का खटीमा से आगाज और अब आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके एसएस कलेर के सीएम के खिलाफ चुनाव लड़ने से भी यह सीट हॉट सीट बन गई है।

आप ने तराई से बनाया कार्यकारी अध्यक्ष
आम आदमी पार्टी ने भी अपने संगठन में बड़े स्तर पर फेरबदल कर तराई क्षेत्र को शामिल कर लिया है। कांग्रेस की तरह आप ने भी तराई क्षेत्र का अलग कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। एसएस कलेर के इस्तीफे के बाद आप ने प्रदेश में तीन कार्यकारी अध्यक्ष, चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की घोषणा भी की। आप के सीएम प्रत्याशी कर्नल अजय कोठियाल ने भूपेश उपाध्याय को कुमाऊं, अनंत राम चौहान को गढ़वाल और प्रेम सिंह राठौर को तराई से कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किया। इसके साथ ही विधानसभा चुनाव प्रचार समिति में दीपक बाली को अध्यक्ष और बसंत कुमार को उपाध्यक्ष घोषित किया। आप ने उत्तराखंड के भौगोलिक समीरकणों का अध्ययन करने के बाद 3 कार्यकारी अध्यक्ष बनाए हैं। कुमाऊं, गढ़वाल की तरह तराई को अपने संगठन में जगह देना इसी रणनीति का​ हिस्सा माना जा रहा है। जिससे किसान आंदोलन का लाभ पार्टी को मिले और सीएम पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ भी जनाधार बढ़ाकर लोगों का समर्थन मिल सके।

जय सिंह रावत, वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि-​

उत्तराखंड में परिसीमन के बाद तराई क्षेत्र में वोटर ज्यादा आ रहे ​हैं। यूएसनगर, हरिद्वार, देहरादून में सबसे ज्यादा वोटर हैं। इसके अलावा पहाड़ का 84 प्रतिशत भाग और मैदान का 16 प्रतिशत भाग है। जबकि मैदान के 16 परसेंट में ही 52 परसेंट जनसंख्या रहती है। जबकि पहाड़ में सिर्फ 48 परसेंट जनसंख्या है। साथ ही आने वाले समय 2026 में तराई में विधानसभा की सीटें 47 सीटें तक बढ़ने की उम्मीद है। सीएम और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी तराई से हैं। किसान आंदोलन भी आने वाले समय में उत्तराखंड चुनाव में समीकरण बदलेंगें।

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