पहाड़ों के बीच 187 साल पुराना 'राष्ट्रपति आशियाना', अब आम लोग भी कर सकेंगे दीदार, जानिए कहां और क्यों हैं खास
Rashtrapati Aashiyaana: पहाड़ों के बीच बसा सुंदर शहर देहरादून, हर तरफ हरियाली और इसी के बीच द प्रेसीडेंट बॉडीगार्ड स्टेट स्थित राष्ट्रपति आशियाना। जो कि अब आम लोगों के लिए भी खुलने जा रहा है। 20 जून को देहरादून स्थित राष्ट्रपति आशियाना आमजन के लिये खुलेगा। जिसकी शुरूआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 20 जून को देहरादून आएंगी और 21 जून को अंर्तराष्ट्रीय योग दिवस पर देहरादून में होने वाले कार्यक्रम में शिरकत करेंगी। देहरादून स्थित राष्ट्रपति आशियाना परिसर में 132 एकड़ भूमि में अत्याधुनिक सार्वजनिक पार्क भी बनाया जा रहा है। पार्क का पूर्ण विकास होने के बाद राष्ट्रपति द्वारा 2026 में यह पार्क जनता को समर्पित किया जाएगा।

भवन के अलावा, परिसर में आगंतुक सुविधा केंद्र, घुड़सवारी, एम्फीथिएटर, कला प्रदर्शन, कैफेटेरिया, स्मारिका स्टोर अन्य काफी कुछ जनता को देखने को मिलेगा। यह पार्क एक ऐतिहासिक परियोजना के रूप में काम करेगा, जिसमें विश्व स्तरीय सुविधाएँ, नवीन डिज़ाइन, टिकाऊ विशेषताएँ होंगी और यह हरियाली, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए एक केंद्र के रूप में काम करेगा।
देहरादून के राजपुर रोड पर स्थित इस विशाल हरित क्षेत्र में अनेक आकर्षण युक्त सुविधाएं शामिल होंगी, जिसमें बहु-गतिविधि क्षेत्र, साइकिलिंग ट्रैक, विश्व स्तरीय खेल सुविधाएं, बच्चों के खेल क्षेत्र, पिकनिक लॉन, पैदल और जॉगिंग ट्रैक, वन प्रकृति पथ, जल सुविधाओं के साथ और कई अन्य आकर्षण भी यहां देखने को मिलेंगे।
राष्ट्रपति आशियाना को टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में भी विकसित करने की योजना है। जिस पर तेजी से काम किया जा रहा है। पहली बार ऐसा होगा कि राष्ट्रपति आशियाना आम जन के लिए खुला रहेगा। बता दें कि राष्ट्रपति बनने के बाद राष्ट्रपति मुर्मू आठ दिसंबर 2022 को पहली बार आशियाना में रूकीं थी। इससे पहले 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने यहां विश्राम किया था।
क्यों खास है आशियाना-
आशियाना के भू-निर्माण में नए लॉन, हेजेज, सजावटी पौधे तथा फूलों वाले वृक्ष तथा झाडिय़ों का प्रयोग सौन्दर्य तथा हरियाली को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। नहरों द्वारा सिंचाई की पुरानी व्यवस्था को भी पुनर्जीवित किया गया है। देहरादून का यह आशियाना प्रेजिडेंट बॉडीगार्ड के नाम से जाना जाता है। जो करीब 170 एकड़ भूमि में बना है। आवासीय हिस्से को आशियाना का नाम दिया गया है। आवास में आठ कमरों के साथ सुरक्षा कर्मियों के रहने के लिए दो बैरक स्थापित हैं। घोड़ों लिए अलग से एक अस्तबल है। लीची और आम के बाग के साथ कई तरह की बागवानी भी है।
इतिहास-
- आशियाना' राष्ट्रपति का विश्राम स्थल है। वर्ष 1975-76 में तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन ने ग्रीष्मकालीन दौरे के लिए दून का चुनाव किया तब कमांडेंट बंगले का जीर्णोद्धार किया।
- भारतीय सेना की सबसे पुरानी रेजीमेंट प्रेसीडेंट बॉडीगार्ड, की स्थापना 1773 में भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स ने की। 1859 में इसे वायसराय बॉडीगार्ड नाम दिया, जिसे बाद में द प्रेसीडेंट बॉडीगार्ड में तब्दील कर दिया गया।
- राष्ट्रपति के अंगरक्षकों की घोड़ा गाड़ी के लिए दून में पहली बार 1938 में ग्रीष्मकालीन शिविर स्थापित किया गया।
- इससे पहले 1920 में यहां राष्ट्रपति के अंगरक्षकों के कमाडेंट का बंगला स्थापित कर दिया गया था।
- आजादी के पश्चात करीब 175 एकड़ में फैला यह क्षेत्र द प्रेसीडेंट बॉडीगार्ड स्टेट के रूप में जाना गया। वर्ष 1975-76 में कमांडेंट बंगले का जीर्णोद्धार किया और नाम रखा आशियाना।
- वर्ष 1975-76 में जब तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन ने ग्रीष्मकालीन दौरे के लिए दून का चुनाव किया तब कमांडेंट बंगले का जीर्णोद्धार किया गया और नाम रखा आशियाना। तब से दून आने वाले राष्ट्रपति इसी आवास में ठहरते थे।
- वर्ष 1998 में तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन इस बंगले में ठहरने वाले आखिरी राष्ट्रपति थे। 2014 में इस विरासत को संवारने का निश्चय किया गया और केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान की सलाह पर मई 2015 में यहां सर्वे किया गया। करीब डेढ़ करोड़ की लागत से दो साल में इसे बिल्कुल नया रूप दे दिया गया।












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