PM मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' अभियान को बढ़ाने में जुटी UP सरकार, अक्टूबर में होगा ये बड़ा आयोजन
लखनऊ, 29 जुलाई: उत्तर प्रदेश में जब पहली बार योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में सरकार बनी थी उसी समय सरकार ने यूपी की माटी से जुडे कलाकारों को नया आयाम देने की कोशिश की गई थी। कारगरों की प्रतिभा निखारने और उनकी प्रतिभाओं की ब्रांडिंग और मार्केटिंग करने के लिए ही यूपी में माटी कला बोर्ड का गठन किया गया था। इस बोर्ड को गठित करने के पीछे की मंशा यही थी कि इससे अलग अलग जगहों पर मिट्टी के काम से जुड़े कारीगरों को अब एक बैनर तले लाने के लिए माटी कला मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान के पीछे पीएम मोदी की 'वोकल फॉर लोकल' थीम ही काम कर रही है।

14-23 अक्टूबर तक लगेगा माटी कला मेला
दरअसल मिट्टी के बर्तनों और मिट्टी के बर्तनों की कला को बढ़ावा देने और मिट्टी के कारीगरों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए राज्य सरकार द्वारा दीवाली के अवसर पर संगीत नाटक अकादमी, गोमतीनगर में 14-23 अक्टूबर तक माटी कला मेला का आयोजन किया जाएगा। मिट्टी के दीये बनाने की कला को उभारने के लिए ही अयोध्या में दीपोत्सव के दौरान आसपास के इलाकों में कारीगरों को मिट्टी के दीये बनाने का आर्डर दिया जाता है। इससे उनकी माली हालत में भी सुधार होता है।
कारीगरों के ठहरने का खर्च उठाएगी सरकार
अधिाकारियों की माने तो इस मेले में पूरे उत्तर प्रदेश के कारीगरों द्वारा मिट्टी से बने दस्तकारी उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा। राज्य के सभी जिलों के शिल्पकार उत्पादों के माध्यम से अपने कौशल और प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। माटी कला बोर्ड 10 दिनों तक भाग लेने वाले कारीगरों के ठहरने का खर्च वहन करेगा। कारीगरों को स्टाल शुल्क के भुगतान से भी छूट दी जाएगी।
कई जिलों के कारीगारों का लखनऊ में लगेगा जमावड़ा
मेले में आगरा, लखनऊ, मिर्जापुर, आजमगढ़, चंदौली, उन्नाव, बलिया, कानपुर, पीलीभीत के मिट्टी के उत्पादों के अलावा गोरखपुर के टेराकोटा, आजमगढ़ की काली मिट्टी के बर्तन, खुर्जा के मिट्टी के कुकर सहित उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की जाएगी। इसके अलावा इलाहाबाद, वाराणसी, अयोध्या और बांदा के कारीगर भी इस मेले में अपना हुनर दिखा सकेंगे।
वोकल फॉल लोकल कांसेप्ट को आगे बढ़ाने का प्रयास
दरअसल 'वोकल फॉर लोकल' को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शनी में भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की मूर्तियां, सजावटी दीपक और दीये, मिट्टी के दीपक और अन्य मिट्टी और हस्तनिर्मित उत्पाद जैसे उत्पाद उपलब्ध होंगे। गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों को 8 इंच के सांचों के माध्यम से बनाया जाएगा, जो एक समान आकार और आकार सुनिश्चित करेगा।












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