यूपी की कानून व्यवस्था को लगी लू, अधिकारी खा रहे हैं एसी की हवा
यूपी की गिरती कानून व्यवस्था के बीच तमाम दावे हुए फेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा लगी दांव पर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार तमाम वायदों के साथ सत्ता में आई थी, जिसमें से एक सबसे बड़ा वायदा था प्रदेश की कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने का। लेकिन तकरीबन दो महीने के कार्यकाल में प्रदेश में लगभग हर रोज एक ना एक बड़ा आपराधिक मामला सामने आया है जिसने योगी सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया है। दो महीने के कार्यकाल में दो बड़ी सांप्रदायिक घटना भी सामने आई, एक तरफ जहां सहारनपुर में दलितों औऱ ठाकुरों के बीच टकराव हुआ तो बीती रात मुजफ्फरनगर में हुई हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए।

हर रोज एक नई घटना सुर्खियों में यूपी
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कई लूट और हत्या की घटनाएं, मथुरा में सर्राफा व्यापारी की दिनदहाड़े हत्या, इलाहाबाद, कानपुर में हत्या की घटना हो या फिर बुलंदशहर-जेवर हाईवे पर गैंगरेप की घटना, इन सभी खबरों ने प्रदेश की कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया है। हर घटना के बाद प्रदेश के आला अधिकारी और मुख्यमंत्री ने इनपर रोक लगाने के लिए नए निर्देश जारी किए आने वाले समय में ऐसी घटनाएं नहीं होने देने का दावा किया, लेकिन सारे वायदे समय के साथ खोखले साबित हुए।

तमाम तबादले, निर्देश फिजूल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालने के बाद तकरीबन 200 आईएएस व पीसीएस अधिकारियों का तबादला किया, प्रदेश के डीजीपी जावीद अहमद की जगह सुलखान सिंह को डीजीपी बनाया गया, कई जिलों के एसएसपी और डीएम को बदला गया। यही नहीं तकरीबन हर बड़ी घटना के बाद जिले के एसएसपी समेत कई अधिकारियों को या तो सस्पेंड किया गया या फिर उनका तबादला किया गया लेकिन इसके बाद भी आपराधिक घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही है।

कहां है सीएम के निर्देश
मुख्यमंत्री ने हाल ही में तमाम पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक करके उन्हें कम्युनिटी पुलिसिंग करने का निर्देश दिया था, इसके तहत हर समुदाय के चुनिंदा लोगों के साथ पुलिस इलाके में मार्च करेगी, जिससे कि वहां लोगों के भीतर पुलिस को लेकर राय बदले और शांति का माहौल बने। यही नहीं हर इलाके में इसके लिए बकायदा एक अधिकारी की नियुक्ति किए जाने के निर्देश दिए गए ताकि इलाके की कानून व्यवस्था के लिए इन्हें जिम्मेदार ठहराया जा सके। आदित्यनाथ ने तमाम पुलिस अधिकारियों को इन आदेशों का सख्ती से पालने करने के लिए कहा था, लेकिन जिस तरह से सूबे में घटनाएं हो रही है, उससे यह जाहिर होता है कि यह आदेश महज एसी कमरों में जारी किए जा रहे हैं और इनका जमीन पर लागू किए जाने से कोई वास्ता नहीं है।

सीएम की प्रशासनिक क्षमता कटघरे में
सीएम की सक्रियता के बावजूद जिस तरह से अपराध पर लगाम नहीं लग रही है, उसने कई सवाल खड़े कर दिए है। पहला सवाल कि अगर कम्युनिटि पुलिसिंग हो रही है और डीजीपी की आदेश के अनुसार हर पुलिस कार्यालय अपने इलाके में हर रोज एक घंटे मार्च कर रहा है तो कैसे मुजफ्फरनगर में हिंसा की घटना सामने आई। अगर पुलिस इस इलाके में सक्रिय थी तो कैसे उसे इस घटना की भनक नहीं लगी। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या ये तमाम निर्देश, समीक्षा बैठक, विवेचना एसी कमरों, मीडिया की सुर्खियों, और फाइलों में हो रही है। बहरहाल योगी आदित्यनाथ की प्रशासनिक क्षमता सवालिया निशान पर है। एक रिपोर्ट की मानें तो पहले ही यूपी की गिरती कानून व्यवस्था पर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व योगी आदित्यनाथ की प्रशासनिक अनुभव की कमी को बता रहा, लिहाजा योगी आदित्यनात के सामने यह बड़ी चुनौती है कि वह कैसे इस समस्या से पार पाते हैं।












Click it and Unblock the Notifications