यूपी सरकार अब प्रदेश में लगवा रही लाइटनिंग अरेस्टर, आकाशीय बिजली से लोगों की बचेगी जान
प्रदेश की जनता को अब सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ की ओर से एक और तोहफा मिला है। अब आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों में कमी आएगी। आपको बता दें कि योगी सरकार अब पूरे प्रदेश में लाइटनिंग अरेस्टर लगा रही है। इससे आसमानी आफत से बचना आसान होगा।
लगाए जाएंगे लाइटनिंग अरेस्टर या लाइटनिंग रॉड
अब सरकार ने राज्य की जनता को आकाशीय बिजली से होने वाली जन-धन की हानि से बचाने के लिए एक अहम फैसला लिया है। राज्य में ऊंची इमारतों पर लाइटनिंग अरेस्टर या लाइटनिंग रॉड लगाए जाने वाले हैं। जो खराब मौसम में आसमानी बिजली को आकर्षित कर सीधे जमीन के अंदर भेज देगा। इससे न सिर्फ लोगों की जान बचेगी, बल्कि आकाशीय बिजली से होने वाले नुकसान को भी रोका जा सकेगा।

क्या है लाइटनिंग अरेस्टर और कैसे करता है काम?
लाइटनिंग चालक या लाइटनिंग कंडक्टर एक धातु की छड़ होती है। जिसे एक ऊंची इमारत पर लगाया जाता है और इसका उद्देश्य इमारत को बिजली गिरने से बचाना है। अगर आकाशीय बिजली किसी इमारत पर गिरती है तो वह सीधे रॉड से टकराएगी और यह रॉड इमारत से गुजरने की बजाय एक तार के जरिए जमीन के अंदर ले जाएगी और इमारत को नुकसान होने से बचाएगी।
जब आकाशीय बिजली कहीं गिरती है, तो यह एक विशाल विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र बनाती है। जो विद्युत तारों और पाइपलाइनों जैसी आस-पास की प्रवाहकीय सामग्रियों में उच्च वोल्टेज उत्पन्न कर सकता है। यह उच्च वोल्टेज संरचना को नुकसान पहुंचा सकता है और संभावित रूप से अंदर और आसपास मौजूद लोगों को नुकसान पहुंचा सकता है। एक लाइटनिंग अरेस्टर या लाइटनिंग रॉड इमारत से दूर और जमीन में बिजली के प्रवाह के लिए एक कम प्रतिरोध पथ प्रदान करता है। यह बिजली से होने वाले नुकसान को रोकने में मदद करता है और इमारत के अंदर या आसपास मौजूद लोगों को बिजली के झटके से बचाने में भी मदद करता है।
हाल ही में राहत आयुक्त जीएस नवीन कुमार ने लाइटनिंग अरेस्टर को लेकर इसके फायदों के बारे में बताया है। उन्होंने बताया कि पिछले साल इस साल तक उत्तर प्रदेश के 52 जिलों में बिजली गिरने से 301 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 2023-24 में जुलाई तक 36 जिलों में बिजली गिरने से 174 लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने बताया कि पहले सोनभद्र जैसे जिलों में बिजली गिरने से काफी मौतें होती थीं। लेकिन अब गाजीपुर जैसे जिले इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। ऐसे में हमने जिलों से रिपोर्ट मांगी है कि कहां-कहां यह लाइटिंग रॉड लगाई जा सकती है। प्रस्ताव के मुताबिक, इस लाइटनिंग अरेस्टर या लाइटनिंग रॉड को सबसे ऊंची इमारतों पर लगाया जा सकता है।












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