मुरादाबाद में भूख से हुई महिला की मौत! राज्य मंत्री ने कहा दुखद घटना

मुरादाबाद। देश जब गणतंत्र दिवस के जश्न की तैयारी कर रहा था तो वहीं दूसरी ओर भूख और गरीबी से मुरादाबाद में एक महिला की मौत ने मौजूदा सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया है। पड़ोसियों के रहमो-करम पर तीन बेटियों के साथ रह रही अमीर जहां ने गुरुवार रात दम तोड़ दिया। घटना के बाद से स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। कोई भी इस घटना को भूख से मौत मानने को तैयार नहीं है। इस मामले में राज्य मंत्री भूपेन्द्र चौधरी ने कहा कि अगर महिला की भूख से मौत हुई है घटना बेहद दुखद है। जांच कराई जायेगी, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी।

घर में थी फाके की नौबत

घर में थी फाके की नौबत

शहर के थाना मझोला के जयंतीपुर में तंगहाली से जूझ रही एक महिला अमीर जहां की भूख और बीमारी से मौत हो गई। महिला का पति पुणे में मजदूरी करता है। ढाई महीने से वह घर नहीं आया था। घर में फाके की नौबत थी जिसकी गवाही घर में रखे गिनती के बर्तन दे रहे थे जिन्हें देखकर लग रहा था मानो कई दिनों से घर में खाना नहीं बना था। महिला की तीन छोटी बच्चियों ने बताया कि वह तीन दिन से भूखी थीं। पड़ोसियों ने उन्हें खाना खिलाया।

पुणे में मजदूरी करने गया पति

पुणे में मजदूरी करने गया पति

बच्चियों की मानें तो काफी दिनों से उनकी मां की सांस उखड़ती थी। गुरुवार रात को पड़ोसियों की मदद से बेटियां उसे जिला अस्पताल ले गईं लेकिन डेढ़ घंटा के भीतर ही उसने दम तोड़ दिया।

मूल रूप से छजलैट के गांव फूलपुर के रहने वाले मो. यूनुस का परिवार जयंतीपुर में पुलिस चौकी के पास मकान में किराए पर रहता है। यूनुस रिक्शा चलाता था लेकिन वह एक ठेकेदार के साथ मजदूरी करने पुणे चला गया। उसकी पत्नी अमीर जहां (34), यहां अपनी तीन बेटियों तबस्सुम (14), रहनुमा (12)और मुस्कान (10) के साथ रहती थी।

घर में पैसे हो गए थे खत्म

घर में पैसे हो गए थे खत्म

तबस्सुम ने बताया कि इस बार पैसे खत्म हो गए और घर में राशन तक नहीं बचा था। तीनों बहनों ने बताया कि तीन दिन से कुछ नहीं खाया था। कल रात बच्चियों के सिसकने की आवाज सुनकर सामने रहने वाली पड़ोसन उन्हें रोटियां दे गईं। पडोसी का कहना है कि बच्चियों ने तो रोटी खा ली लेकिन काफी कहने के बाद भी अमीर जहां ने कुछ नहीं खाया।

अधिकारी भूख से मौत मानने को तैयार नहीं

अधिकारी भूख से मौत मानने को तैयार नहीं

पड़ोसी फिरोज और रुकसाना ने बताया कि ये लोग काफी दिनों से इस तरह का जीवन जीने को मजबूर थे। कई बार स्थानीय अधिकारियों के पास भी गए कि बीपीएल कार्ड बन जाए लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। वहीं अब तक उधार देने वाले दुकानदार रिजवान ने भी कहा कि कई बार मैंने इनके हालात को देखते हुए सामान दिया था। फिलहाल अब इस पूरे मामले की अधिकारियों द्वारा जांच की बात कही जा रही है। उधर कोई भी अधिकारी इसे भूख से मौत मानने को तैयार नहीं है और न ही कोई कुछ बोल रहा है। राज्य मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने घटना को दुखद बताते हुए जांच कर कार्रवाई की बात कही है।

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