क्या 2024 में पीएम पद के दावेदार होंगे योगी, बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से मिले संकेत
लखनऊ, 8 नवंबर: कुछ समय पहले तक कोई भी योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कल्पना नहीं कर सकता था। उस अप्रत्याशित घटना के घटित होने के बाद से ही कई लोग पहले से ही उन्हें भावी प्रधानमंत्री के रूप में पेश कर रहे हैं। इसके संकेत उस समय भी देखने को मिला जब दिल्ली में आयोजित बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सीएम योगी ने पहली बार राजनीतिक प्रस्ताव रखा। इसको राजनीतिक विश्लेषक दूसरे नजरिए से भी देख रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि संघ ने पीएम मोदी के बाद पीएम कौन होगा इसका चेहरा तलाशना शुरू कर दिया है। केंद्रीय नेतृत्व में बढ़ते दखल और कद से ऐसी सम्भावना है कि योगी यदि अपने दम पर यूपी में बीजेपी की सत्ता में दमदार वापसी करा देते हैं तो उनके लिए राष्ट्रीय फलक पर उभरने की संभावना और बढ़ जाएगी।

मोदी पर होगा अपना उत्तराधिकारी चुनने का दबाव
मोदी का विकास एजेंडा पूरी गति से आगे बढ़ रहा है, जबकि पीओके #सर्जिकलस्ट्राइक और #डिमोनेटाइजेशन जैसे कठोर उपायों को जनता का बहुत समर्थन मिला है। विपक्ष 2019 तक अपनी कार्रवाई को एक साथ लाने के लिए बहुत कम समय के साथ असमंजस में है। फिलहाल मोदी एक अजेय शक्ति की तरह डटे हुए हैं। बताया जा रहा है कि 2024 की जीत काफी अहम है। अगर मोदी हार जाते हैं, तो उत्तराधिकार की लड़ाई तुरंत शुरू हो जाएगी। लेकिन अगर वह जीत भी जाते हैं, तो मोदी पर उत्तराधिकारी का नाम लेने का दबाव बहुत अधिक होगा, क्योंकि वह उस कार्यकाल में 75 वर्ष के हो जाएंगे। 2024 में, गृह मंत्री राजनाथ सिंह 73 वर्ष के हो जाएंगे, जबकि वित्त मंत्री अरुण जेटली और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज दोनों 72 वर्ष के हो जाएंगे। वास्तव में, अधिकांश वर्तमान नेता अपने साठ के दशक के उत्तरार्ध में होंगे।

मोदी के रिटायरमेंट के बाद बीजेपी में हैं ये चेहरे
जिस तरह से मोदी ने सेवानिवृत्ति की आयु 75 वर्ष निर्धारित की है और युवाओं पर जोर दिया है। यहां कुछ ऐसे नेताओं को देख रहे हैं जो आज 60 से नीचे हैं। परिवहन मंत्री नितिन गडकरी 59, मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान 58, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह 52, बिजली मंत्री पीयूष गोयल 52, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस 46, योगी आदित्यनाथ 44 साल के हैं।

मोदी के बाद योगी को ही भाव दे रहा मीडिया
यह एक और कारण है कि अपनी पीढ़ी के अगले नेताओं के कारण भाजपा का भविष्य बड़ा है। क्षेत्रीय दल पुराने क्षत्रपों के साथ वन-मैन शो हैं जबकि कांग्रेस के पास बोलने के लिए कोई अगली पीढ़ी का नेतृत्व नहीं है, जो हमें वापस योगी के पास लाता है। मीडिया ने मोदी को काफी तवज्जो दी थी जिसकी वजह से मतदाताओं ने हर तरह के किंतु और परंतु के बाद भी मोदी को ही दूसरी बार प्रधानमंत्री के तौर पर चुना। ठीक उसी तरह मीडिया वर्तमान में योगी के हर बयान को तवज्जो दे रही है क्योंकि वह बिकाऊ है। मतदाताओं के लिए यह मायने नहीं रखता है कि यूपी में क्या हुआ क्या नहीं हुआ।

2022 की प्रचंड जीत योगी की राह आसान करेगी
योगी अपने निर्वाचन क्षेत्र गोरखपुर में अनुभवी और करिश्माई और बहुत सक्रिय हैं। वह वहां नियमित रूप से आते रहे हैं और उन समस्याओं को सुलझाते रहे हैं जिसके कारण उनकी लोकप्रियता जाति और धार्मिक रेखाओं में कट गई है। योगी के यूपी सीएम बनने से पहले ही वह बीजेपी नेताओं और यूपी के मतदाताओं के बीच काफी लोकप्रिय थे और यह लोकप्रियता अब पूरे भारत में फैलेगी। योगी संघ के हार्ड कोर हिन्दुत्व के एजेडे को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। छात्राओं के साथ छेड़खानी उत्तर प्रदेश में एक बहुत बड़ी समस्या है और जहां राष्ट्रीय मीडिया द्वारा एंटी रोमियो स्क्वॉड को कठोर के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, वहीं जमीनी स्तर पर उन्हें काफी लोकप्रियता मिलेगी।

मोदी की तरह योगी की भी फैन फालोइंग
योगी आदित्यनाथ की सरकार में भी फैन फॉलोइंग है। अजीत डोभाल सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को शीर्ष पायदान पर रखने के लिए उनकी प्रशंसा करने से नहीं कतराते। यह और बात है कि यह पीएम मोदी ही थे जिन्होंने फैसले के बाद शांत रहने की अपील की थी। 2021 से 2024 वह अंतराल होगा जहां ये दो शक्ति केंद्र या तो अधिक स्पष्ट रूप से उभरेंगे या दोनों के बीच संघ बीच का रास्ता तलाशने की कोशिश करेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मोदी के खास अमित शाह मोदी का विकल्प बनकर उभरेंगे या योगी ही बाजी मारने में कामयाब होंगे।












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