तिवारी के 'हाते' से निकली हवा से पूर्वाचल में बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाने में कामयाब होगी सपा ?

लखनऊ, 14 दिसंबर: उत्तर प्रदेश में चुनाव से ठीक पहले अखिलेश यादव ने बीजेपी को झटका देते हुए पूर्वांचल की राजनीति में ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के परिवार के अलावा संत कबीरनगर-खलीलाबाद से भाजपा विधायक दिग्विजय नारायण चौबे उर्फ ​​जय चौबे को सपा में शामिल करा लिया। यूपी के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो कोई भी पार्टी जाति समीकरण को अपने पक्ष में किए बिना सरकार नहीं बना सकती। यूपी में पिछड़ों और दलितों के दम पर कई बार सपा और बसपा की सरकार बन चुकी है, लेकिन इस बार यूपी की आबादी में 13 फीसदी ब्राह्मण चुनावी मुद्दा बन गए हैं जिसको साधने की कोशिश हर दल की ओर से हो रही है। अब अखिलेश यादव ने हरिशंकर तिवार को साधकर पूर्वांचल में ब्राह्मण समुदाय को भी अपने पाले में करने कोशिश की है।

अखिलेश यादव

हरिशंकर तिवारी के परिवार और जय चौबे के माध्यम से अखिलेश यादव राज्य के ब्राह्मण समुदाय को संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यूपी विधानसभा चुनाव में विपक्षी दल योगी सरकार को ब्राह्मण विरोधी के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। ब्राह्मण बनाम ठाकुर की राजनीति के बीच हरिशंकर तिवारी परिवार के सपा में जाने से पूर्वांचल के समीकरण बदल सकते हैं। यह क्षेत्र ब्राह्मण बहुल माना जाता है और पूर्वांचल में हरिशंकर तिवारी ब्राह्मणों का बड़ा चेहरा माने जाते हैं।

पूर्वांचल की राजनीति में ब्राह्मण समीकरण की अहमियत

पूर्वांचल और जातिगत समीकरण उत्तर प्रदेश की सियासी जंग का एक बड़ा कारण और राजनीतिक दलों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द भी बन गए हैं। सत्तारूढ़ भाजपा के लिए यहां चुनौतियां कहीं ज्यादा बड़ी हैं। जिस दौर में बीजेपी की लहर चल रही थी, उस वक्त पूर्वांचल समाजवादी पार्टी के साथ था। अब एक बार फिर पूर्वांचल में सपा ने ब्राह्मण वोटों की खेती शुरू कर दी है. कहा जा रहा है कि आज से समाजवादी पार्टी में ब्राह्मण समाज का प्रवेश शुरू हो गया है। जल्द ही पश्चिमी यूपी के कुछ बड़े ब्राह्मण चेहरे भी सपा में शामिल होंगे।

प्रबुद्ध सम्मेलनों के जरिए ब्राह्मणों को लुभाने की कोशिश

एक अनुमान के अनुसार उत्तर प्रदेश में 11 प्रतिशत ब्राह्मण हैं। पूर्वांचल में इनकी संख्या 20 प्रतिशत मानी जाती है। वहीं, राज्य में ठाकुरों यानी राजपूतों की संख्या करीब 7 फीसदी बताई जाती है। राज्य के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को राज्य में भाजपा का सबसे बड़ा ब्राह्मण चेहरा माना जाता है। उनके अलावा कानून मंत्री बृजेश पाठक की गिनती भी पार्टी के मजबूत ब्राह्मण नेताओं में होती है। भाजपा प्रबुद्ध सम्मेलनों के माध्यम से ब्राह्मणों को पार्टी से जोड़े रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। बसपा अपने नेता और राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा के नेतृत्व में 2007 के चुनावों की तर्ज पर ब्राह्मणों को पार्टी के साथ फिर से जोड़ने के लिए एक प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन भी आयोजित कर रही है। लेकिन अपने पुराने नेताओं से बसपा की नाराजगी और विधायकों के निलंबन और निष्कासन के बाद हरिशंकर तिवारी जैसे नेता अब दूसरी पार्टियों में अपना भविष्य तलाशने को मजबूर हैं।

हरिशंकर तिवारी के परिवार को साधने का अखिलेश को मिल सकता है लाभ

यूपी की सियासत पर गहरी नजर रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार कुमार पंकजे के अनुसार,

"ब्राह्मण बिरादरी का वोट कम है, लेकिन ब्राह्मण 'राय बनाने' वाली बिरादरी है, इसलिए यह राय बनाने का काम करता है। इन नेताओं के शामिल होने से न सिर्फ गोरखपुर या इसके आसपास के इलाकों में बल्कि राज्य में भी पिछड़ों की पार्टी मानी जाने वाली सपा में गोरखपुर के ब्राह्मण शामिल हो रहे हैं। तो क्या हरिशंकर तिवारी के परिवार वालों के शामिल होने से गोरखपुर में सपा को मजबूती मिलेगी?''

इस बारे में पंकज कहते हैं, ''गोरखपुर में ब्राह्मणों और ठाकुरों की अलग राजनीति है। यानी ठाकुर जहां जाते हैं वहां अक्सर ब्राह्मण नहीं जाते। दोनों के बीच पूर्ण सामंजस्य नहीं है। ऐसे में तिवारी परिवार के सपा में शामिल होने का लाभ अखिलेश यादव को अवश्य मिलेगा।

योगी

पूर्वांचल में कैसे बीजेपी की टेंशन बढ़ा रही सपा

अखिलेश यादव खुद पूर्वांचल के आजमगढ़ से लोकसभा सांसद हैं। नवंबर में उन्होंने अपनी रथ यात्राओं से पूर्वांचल को नाप लिया है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के साथ ही देर रात तक निकाली गई समाजवादी रथयात्राओं में भारी भीड़ उमड़ी। इससे पार्टी को इलाके की करीब 150 सीटों पर अच्छा प्रदर्शन करने की नई उम्मीद जगी है। गोरखपुर सीएम योगी आदित्यनाथ का गृह जिला है और इसे 'सीएम सिटी' का दर्जा प्राप्त है। अखिलेश यादव पूर्व में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के क्षेत्र में राजनीतिक दबाव बनाए रखने के लिए फैसले लेते रहे हैं। 2018 के गोरखपुर उपचुनाव में सपा ने निषाद पार्टी का समर्थन किया और भाजपा उम्मीदवार को हराने में मदद की। हालांकि बाद में निषाद पार्टी ने सपा छोड़कर भाजपा से गठबंधन कर लिया।

पूर्वांचल से ओम प्रकाश राजभर के चार विधायकों सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ गठबंधन करने का फैसला भी इस क्षेत्र में सपा को मजबूत करने की उम्मीद के साथ लिया गया है। पूर्वांचल के 10 से 12 जिलों में राजभर बिरादरी का वोट 20 फीसदी है और इस लिहाज से सपा और ओम प्रकाश राजभर का गठबंधन काफी कारगर साबित हो सकता है। शायद यही वजह है कि पूर्वांचल के गोरखपुर, सुल्तानपुर, कुशीनगर और बलरामपुर के सरकारी लॉन्च कार्यक्रमों में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोला है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+