यूपी का राजसिंहासन, "अखिलेश के फार्मूले पर दौड़ेगी साइकिल" सरेंडर कर एकांतवास में जाएंगे मुलायम

यूपी का राजसिंहासन, "अखिलेश के फार्मूले पर दौड़ेगी साइकिल" सरेंडर कर एकांतवास में जाएंगे मुलायम, परिवार के भीतर मचे घमासान के बीच मुलायम के लिए राह मुश्किल

संदीप पिंटू(लखनऊ)। दौर भले ही बुरा हो, लेकिन सच यही है कि 21वीं सदी में मुलायम सिंह यादव ही एक ऐसे राजनैतिक योद्धा हैं, जो वक्त और हालातों को खुद पर हावी नहीं होने देते। विपक्षियों को जब चाहें साधनें में माहिर मुलायम हर मुश्किल का देर से सही लेकिन हल ढूंढ निकालते हैं। इन दिनों सपा में आए 'भूचाल' से जहां नेता जी के सामने पार्टी के अस्तित्व को बचाने की चुनौती झेल रहे मुलायम के सामने फिलहाल वक्त और विकल्प कम ही हैं। अंतत: स्पष्ट है कि अपनों से जूझ रहे मुलायम अब थक हारकर एकांतवास में जाना बेहतर समझते हैं।

mulayam singh

जेल की सलाखों में भूखे प्यासे रहकर खुद के खून पसीने से तैयार पार्टी को अपने सामने ही मुलायम लुटता देखना नहीं चाहते। और भला चाहेगा भी कौन? इटावा की प्राइमरी पाठशाला से राजधानी दिल्ली के सियासी गलियारों तक एक से एक राजनीतिक धुरंधर को अपना लोहा मनवाने वाले मुलायम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उम्र के इस पड़ाव में उनके सामने इस बार मैदान में उन्हें मात देने वाले उनके वे अपने हैं, जिन्हें लोहिया जी के सिद्धांतों के सहारे 'उंगली पकड़कर' नेता जी ने चलना सिखाया था। सियासतदां भले ही सपा में छिड़े संग्राम को पहले से लिखी स्क्रिप्ट का हिस्सा बताते नहीं थक रहे हों, लेकिन कलेजे के टुकड़े की बगावत की टीस का अहसास शायद ही मुलायम से बेहतर किसी को हो।

इसे भी पढ़ें- UP Assembly elections 2017- यूपी चुनाव में जमकर गूंजेगा बहनजी को आने दो

जहां बेटा जिस पर अड़ जाए और छोटा भाई विरासत को हाथ से छिटकते देख भतीजे की बेदखली की सौगंध खाए हो, वह भी ऐसे वक्त जब सेना मैदान-ए-जंग में उतरने के लिए दहलीज पर खड़ी हो, तब मुखिया की मनोस्थिति....बाप रे बाप। पल भर सोचिए तो जरा..एक तरफ चुनाव, एक तरफ बेटा, दूसरी तरफ भाई, फिर पार्टी, सिंबल, कुनवा उस पर विरोधियों के एक के बाद एक वार....उम्र के अंतिम पड़ाव में इतने सारे सियासी चक्रव्यूह से निकलने के लिए बन सकता है कोई मुलायम?

इसे भी पढ़ें- UP Assembly elections 2017- मुसलमानों के सपा को वोट नहीं देने की 4 वजहें

हर रोज बदलते घटनाक्रम से कहा जा सकता है कि नेताजी मुलायम पड़ गए हैं। यानि सपा का यह संग्राम 'क्लाइमैक्स' पर जा पहुंचा है, यानि अखिलेश की ओर से लाइन खिंच जाने के बाद अब फैसला जो भी होना है मुलायम की ओर से ही होगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक दो पाट में फंसे मुलायम खुद 'मुलायम' पड़कर पार्टी और सिंबल को खत्म नहीं होने देने की दुहाई देते हुए बेटे और भाई के सामने सरेंडर कर सकते हैं। कहा तो यहां तक जा रहा है कि मुलायम अगले 24 घंटे में कोई बड़ा फैसला लेने वाले हैं। अंतिम समय में बेटे अखिलेश दरा लिए गए तीन माह को आधार बनाकर इस बार 2017 विधानसभा का चुनाव 'टीपू' के कंधों पर छोंड़ दें और कहें अब मैं तीन महीने बाद ही बात करूंगा।

राजनीति के जानकार मानते हैं इस फैसले से मुलायम जहां बेटे और पार्टी के अस्तित्व को बचाए रखना चाहेंगे, वहीं, उनका यह निर्णय शिवपाल और अमर सिंह को साधने में तुरूप का इक्का साबित होगा। कुल मिलाकर टिकट, गठबंधन और प्रचार अखिलेश का होगा वहीं, पार्टी भी टीपू की हो जाएगी। बता दें कि अखिलेश की ओर से चुनावी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। प्रचार सामग्री से लेकर प्रत्याशियों को फंडिंग जैसे कार्य कब के निपटा दिए जा चुके हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+