जिन 60 सीटों पर बीजेपी कभी नहीं जीती उन पर करेगी फोकस; सांसद-एमएलसी को दी जाएगी जिताने की जिम्मेदारी

लखनऊ, 3 सितम्बर: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले चुनाव को देखते हुए भाजपा अपनी तैयारियों में जुटी हुई है। पिछले विधानसभा सीटों पर तीन सौ से ज्यादा सीटें हासिल करने वाली भाजपा अब उन 60 सीटों पर फोकस करेगी जिन पर कभी जीत हासिल नहीं हुई है। इसके अलावा उन 80 सीटों पर भी मंथन कर रही है जिनपर पिछली बार चुनाव हारी थी। इन सीटों पर जीतने की रणनीति बनाने में जुटी भाजपा ने सांसदों एवं एमएलसी के साथ ही पंचायत चुनाव के दौरान जीते हुए प्रत्याशियों को अलग-अलग टास्क पकड़ाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक इस अहम बैठक को लेकर कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं।

भाजपा

भाजपा सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने उन सीटों पर फोकस करने का प्लान तैयार किया है जो अभी तक भाजपा की झोली में कभी नहीं आईं हैं। इसके अलावा उन 80 सीटों पर भी रणनीति तैयार कर रही है जिन सीटों को पिछली बार पार्टी हार गई थी। इसको लेकर गुरुवार को भाजपा कार्यालय पर यूपी प्रभारी राधा मोहन सिंह, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह और संगठन मंत्री सुनील बंसल के बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों के बाद अब सांसद, एमएलसी और पंचायत चुनाव में जीते हुए प्रत्याशियों को बूथ मजबूत करने और योगी और मोदी सरकार की नीतियों के माध्यम से लोगों तक पहुंचने का टास्क दिया गया है।

बूथ जीतने और बूथ समितियों को मजबूत करने की जिम्मेदारी
चुनाव से पहले भाजपा ने अपनी रणनीति के तहत ही अब बूथ समितियों और बूथ अध्यक्षों के साथ कोआर्डिनिेशन बनाने की जिम्मेदारी दी है। पार्टी को लगता है कि जिन सीटों पर आज तक भाजपा नहीं जीती वहां भी अगर सही रणनीति के साथ मैदान में पार्टी उतरेगी तो सफलता जरूर मिलेगी। इसके लिए प्रत्याशियों का चयन भी काफी सोच समझकर किया जाएगा। हर सीट के लिए दस लोगों का बायोडाटा मांगा गया है। जिसके बाद उसमें से पांच- पांच लोगों के नामों का पैनल तैयार कर प्रदेश नेतृत्व अपनी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजेगा। इसमें भी जिन लोगों को जिम्मेदारी पकड़ाई जाएगी उनकी जवाबदेही भी तय की जाएगी।

बीजेपी

जातीय गणित का भी पूरा ख्याल रखा जाएगा
भाजपा के एक पदाधिकारी ने बताया कि जिन 60 सीटों पर आज तक भाजपा कभी नहीं जीती उनपर ज्यादा मेहनत की जाएगी। इसके लिए सभी को जिम्मेदारियां पकड़ाई गई हैं। आने वाले समय में इस अभियान को तेज किया जाएगा। बूथ अध्यक्षों, बूथ समितियों और पन्ना प्रमुखों की भी जिम्मेदारी तय की गई है। उन्हें अपने बूथ की जिम्मेदारी लेनी होगी। प्रत्याशियों का चयन भी जातीय गणित के आधार पर ही तय किया जाएगा। अगर संबंधित विधानसभा में अपने पास मजबूत उम्मीदवार नहीं होगा तो बाहर से आए हुए मजबूत दावेदारों पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि उन उम्मीदवारों के रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे कि कहीं वो दागी तो नहीं हैं।

इस अभियान को लेकर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता आनंद दुबे कहते हैं कि,

''पार्टी इस तरह की बैठकें लगातार होती रहती हैं। यह चुनावी तैयारियों का ही एक हिस्सा है। इसके लिए पार्टी के स्तर पर रणनीति तैयार हो रही है। सबको अलग-अलग जिम्मेदारियां पकड़ाई जा रही हैं। आने वााले चुनाव में सबको मिलकर काम करना है ताकि पार्टी अधिक से अधिक सीटों पर जीत हासिल कर सके।''

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