अपने ही गढ़ में क्यों चौतरफा घिर रहे ओम प्रकाश राजभर, जानिए क्या हैं इस बार चुनौतियां

लखनऊ, 8 फरवरी: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किंगमेकर की भूमिका में आने का ख्वाब देख रहे सुभासपा के चीफ ओम प्रकाश राजभर अपने ही गढ़ में घिरते जा रहे हैं। राजभर ने पहले वाराणसी की शिवपुर विधानसभा सीट से लड़ने का ऐलान किया था लेकिन बाद में वहां से अपने बेटे को लड़ाकर खुद गाजीपुर की जहूराबाद सीट से लड़ने का ऐलान किया है। वर्तमान में वो यहीं से विधायक हैं। लेकिन अबकी बार राजभर की उम्मीदों को झटका लगता दिखायी द रहा है। प्रसपा के नेता शिवपाल यादव की करीबी पूर्व मंत्री शादाब फातिमा लगातार अपने विधानसभा क्षेत्र में लोगों के बीच छाई हुई हैं और वह जहूराबाद विधानसभा से चुनाव लड़ने की बात कह रही हैं। उनका कहना है कि बाद में जो होगा वह भविष्य की गर्त में है। शादाब फातिमा पीएसपी-एसपी गठबंधन से अलग होकर निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ सकती हैं। यदि ऐसा हुआ तो राजभर की राह में मुश्किलें ही खड़ी होंगी।

शादाब फातिमा की वजह से दिलचस्प होगी जहूराबाद की लड़ाई

शादाब फातिमा की वजह से दिलचस्प होगी जहूराबाद की लड़ाई

उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री रहे शादाब फातिमा प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रमुख शिवपाल यादव के करीबी हैं। इसी निकटता के कारण वर्ष 2017 में समाजवादी पार्टी (समाजवादी पार्टी का टिकट कट गया) और उस चुनाव में भारतीय सुहेलदेव समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। वहीं 2022 यूपी विधानसभा चुनाव (उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव) में शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी और समाजवादी पार्टी (समाजवादी पार्टी) में पूर्व मंत्री शादाब फातिमा (जहूराबाद) के जहूराबाद में गठबंधन के बाद माना जा रहा था कि गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने का फैसला किया गया था। लेकिन ओमप्रकाश राजभर के जहूराबाद से चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद शादाब फातिमा की गठबंधन से चुनाव लड़ने की उम्मीद खत्म हो गई हैं।

शादाब फातिमा लड़ीं तो राजभर की मुश्किलें हो होंगी दोगुनी

शादाब फातिमा लड़ीं तो राजभर की मुश्किलें हो होंगी दोगुनी

ऐसे में शादाब फातिमा लगातार अपने विधानसभा क्षेत्र में लोगों के बीच हैं और वह जहूराबाद विधानसभा से चुनाव लड़ने की बात कह रही हैं। उनका कहना है कि बाद में जो होगा वह भविष्य की गर्त में है। जाहिर सी बात है कि समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन था और यह गठबंधन के उम्मीदवार (ओमप्रकाश राजभर) को दिया गया है। ऐसे में सवाल यह है कि मैंने इस सभा को सजाया और सजाया है। मेरे पास जो काम और कर्तव्य है, मैं वह करूंगी और 2022 के चुनाव में लडूंगी, चाहे मुझे किसी भी पार्टी से या निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ना पड़े।

राजभर पर लग रहा जहूराबाद में कुछ न करने का आरोप

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इस दौरान जब उनसे इस बारे में बात की गई कि वह किस पार्टी से चुनाव लड़ेंगी और क्या संभावनाएं हैं। इस पर उन्होंने कहा कि संभावनाओं के दरवाजे हमेशा खुले हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी या भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर चल रही है। उन्होंने कहा कि चर्चा है कि हम इसके लिए क्या कर सकते हैं। उन्होंने ओमप्रकाश राजभर पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पिछले 5 साल में क्या किया है? यह लोग जानते हैं। मैं विधानसभा को बर्बाद नहीं होने दूंगी।

राजभर के खिलाफ उतरेंगी शादाब फातिमा

राजभर के खिलाफ उतरेंगी शादाब फातिमा

शादाब फातिमा गाजीपुर के जहूराबाद विधानसभा के गंगौली गांव की रहने वाली हैं। वह प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ राही मासूम रजा के परिवार से आती हैं। उन्होंने 2007 में सदर विधानसभा में समाजवादी पार्टी से जिले में अपनी राजनीति की शुरुआत की। हालांकि इससे पहले 2004 में वह लखनऊ में उत्तर प्रदेश को-ऑपरेटिव कंज्यूमर यूनियन की अध्यक्ष थीं और इसी कार्यकाल में उन्होंने अंधाउ बाईपास रोड का निर्माण करवाया। 2007 के चुनाव में उनका जमकर विरोध हुआ था और कई जगह उनका पुतला भी जलाया गया था। इसके बावजूद उन्होंने 2007 में समाजवादी पार्टी से चुनाव जीता।

शिवपाल-अखिलेश के मतभेद की वजह से कट गया टिकट

शिवपाल-अखिलेश के मतभेद की वजह से कट गया टिकट

लेकिन सदर विधानसभा का इतिहास है कि इस विधानसभा सीट से कोई भी विधायक दोबारा नहीं जीत पा रहा है। इन सब को ध्यान में रखते हुए साल 2012 में अपने गृह क्षेत्र जहूराबाद विधानसभा से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। मंत्रिपरिषद के विस्तार में उन्हें महिला कल्याण मंत्री बनाया गया। वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच पारिवारिक विवाद के बाद शिवपाल यादव के लोगों का टिकट सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने काटा, जिसमें शादाब फातिमा का टिकट भी कट गया।

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