UP चुनाव में मायावती ने BJP के खिलाफ क्यों ओढ़ रखी है खामोशी की चादर, जानिए इसकी वजहें
लखनऊ, 12 फरवरी: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार मायावती साइलेंट हैं। उनकी चुप्पी हैरान करने वाली है। जब सभी पार्टियां चुनाव प्रचार में रैलियों का रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं, वह कहीं नजर नहीं आ रही हैं। पहले चरण की खामोशी के बाद अब दूसरे चरण के प्रचार में भी वह बाहर नहीं निकल रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक हालांकि इसकी कई वजहें मानकर चल रहे हैं। उनका माना है कि मायावती इस बार बीजेपी के दबाव में काम कर रही हैं इसलिए टिकटों का बंटवारा इस कदर हो रहा है जिससे बीजेपी को फायदा मिले। हालांकि इस रहस्य से पर्दा तब उठेगा जब दस मार्च को नतीजे आएंगे लेकिन फिलहाल मायावती की 'मायावी' रणनीति को समझने में सभी लोग जुटे हुए हैं।

क्या बीजेपी के काफी करीब हैं मायावती
ऐसा तब है, जब पीएम नरेंद्र मोदी कासगंज, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और सीएम योगी आदित्यनाथ बरेली में जनसभा समेत कई कार्यक्रम कर रहे थे। अखिलेश प्रत्याशी अब्दुल्ला के साथ रामपुर की सड़कों पर थे। आइए, समझते हैं कि इसके पीछे कारण क्या हैं? सबसे पहले जो बात चर्चा में आती है कि या तो मायावती सीधे हार मान चुकी हैं या जीत के प्रति निश्चिंत है? तो यहां स्पष्ट कर दें कि इन दोनों ही बातों में से कोई नहीं है। दोनों की संभावना दूर-दूर तक नहीं है। सूत्रों की मानें तो इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा कि मायावती आने वाले समय में भाजपा के लिए समर्थन की घोषणा कर दें।

आय से अधिक सम्पत्ति के मामलों में क्या बीजेपी के दबाव में हैं ?
बसपा के टिकट भाजपा के हिसाब से बंटे हैं। कई लोग आरोप लगा रहे हैं कि मायावती ने अपने टिकटों का बंटवारा इस हिसाब से किया है कि वो सपा को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकें। हालांकि कुछ एक्सपर्ट का यह भी कहना है कि मायावती आय से अधिक संपत्ति समेत कई केसों के मामले से भाजपा के दबाव में हैं, जिसकी वजह से उनको ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसकी झलक इस बात से मिलती है कि भाजपा के खिलाफ लगातार बोलने वाली मायावती ने पूरे चुनाव में भाजपा के बड़े नेताओं के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोला है।

बसपा के नेताओं की मानें तो ये माया की मायावी चाल
बसपा के एक नेता कहते हैं कि आज कोई भी राजनीतिक रैली तय नहीं थी। गुरुवार को बसपा प्रमुख उत्तराखंड में रैली को संबोधित करने गईं थीं। आज शनिवार को औरैया में जनसभा को संबोधित करेंगी। ऐसे में अगर मायावती की सक्रियता की बात करें तो उन्होंने सोशल मीडिया पर शुक्रवार को 2 प्रमुख ट्वीट किए हैं। मायावती की इस नरमी के पीछे की वजह जानने में सभी लोग लगे हुए हैं लेकिन उनको करीब से जानने वाले बताते हैं मायावती के मायावी रहस्य को समझना सबके बूते की बात नहीं। मायावती इस बार जिस सोशल इंजीनियरिंग के साथ मैदान में उतरी हैं और पश्चिम से लेकर पूरब तक जिस तरह से उन्होंने टिकटों का बंटवारा हुआ है उससे ऐसा लगता है वह सधी हुई रणनीति के साथ आगे बढ़ रही हैं।

पहले चरण के बाद भी सक्रिय नहीं हो रहीं हैं बहनजी
पहले चरण की समाप्ति के बाद मायावती ने सिर्फ दो ट्वीट किए हैं जिसमें एक एक उन्नाव में लड़की की हत्या के मामले में सपा नेता के खिलाफ है। वहीं, दूसरा- हिजाब मामले को मुद्दा न बनाने की अपील है। आपको ये भी बता दें कि दूसरे चरण का मतदान 14 फरवरी को होगा। एक दिन पहले शाम को ही प्रचार रोक दिया जाएगा। मायावती विधानसभा चुनाव 2022 में पहली बार 2 फरवरी को प्रचार के लिए आगरा पहुंची थीं। 3 फरवरी को गाजियाबाद, 4 फरवरी को अमरोहा, 7 फरवरी को मायावती ने बरेली में चुनावी जनसभा की थी। 8 फरवरी को पंजाब में जनसभा करने पहुंची थीं। बसपा महासचिव व राज्यसभा सांसद सतीश चन्द्र मिश्र शुक्रवार को सहारनपुर में प्रचार करने पहुंचे थे।












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