AIMIM के यूपी चीफ बोले- मुसलमानों को अछूत समझा जाता है, वोट चाहिए लीडरशिप नहीं, BJP को रोकने का जिम्मा सबका

लखनऊ, 26 अगस्त: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल चुनावी मोड में आ गए हैं और इसको लेकर छोटे और बड़े दलों के बीच सियासी गठजोड़ का खेल शुरू हो गया है। असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) पार्टी, जो बिहार और बंगाल में अपने कार्यकाल के बाद, यूपी में भी चुनाव लड़ने की योजना पर काम कर रही है। AIMIM के यूपी चीफ शौकत अली ने एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान साफ शब्दों में कहा कि मुसलमानों को हमेशा ही अछूत समझा जाता है। राजनीतिक दलों को मुसलमानों का वोट तो चाहिए लेकिन मुस्लिम लीडरशिप से परहेज है। ऐसे थोड़े ही चलेगा। हमने ही बीजेपी को रोकने का ठेका थोड़े ही ले रखा है। इसके बार में सपा, बसपा और कांग्रेस को भी सोचना चाहिए।

ओवैसी

यूपी में समाजवादी पार्टी (SP) भी कई मौकों पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की तारीफ करने के बावजूद एआईएमआईएम से दूरी बनाए हुए है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि, बंगाल की तरह, ओवैसी और उनकी पार्टी को यूपी में गठबंधन करने के लिए कोई बड़ी पार्टी नहीं मिलेगी। हालांकि बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एआईएमआईएम के साथ किसी भी तरह के गठबंधन को खारिज कर दिया था लेकिन यूपी में ओवैसी में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के चीफ ओम प्रकाश राजभर से लखनऊ आकर मुलाकात की थी। लेकिन इन दोनों दलों के बीच भी गठबंधन को लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई है।

लखनऊ के विद्यांत कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर मनीष हिंदवी कहते हैं कि,

''अभी यूपी में तो किसी तरह के गठबंधन की संभावना ओवैसी के लिए नहीं बची है। अखिलेश यदि गठबंधन करना भी चाहेंगे तो वो बिहार के उन परिदृश्यों को जरूर ध्यान में रखेंगे जहां ओवैसी की वजह से ही तेजस्वी की पार्टी को कई सीटों का नुकसान हो गया था। इसका फायदा बीजेपी को मिला था। जाहिर से बात है कि याद ओवैसी की पार्टी यूपी में 100 सीटों पर चुनाव लड़ती है और उन सीटों पर जहां मुसलमानों की संख्या ज्यादा है तो वहां ये दूसरी पार्टियों को नुकसान जरूर पहुंचा सकते हैं।''

2019 लोकसभा में सपा-बसपा ने मिलकर लड़ा था चुनाव
दरअसल, 2019 में सपा और बसपा ने एक साथ आम चुनाव लड़ा था। सपा ने चार और बसपा ने छह मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे। सपा और बसपा के तीन-तीन मुस्लिम उम्मीदवार जीते, इस तरह लोकसभा को यूपी के छह मुस्लिम सांसद मिले। यह 2014 के आम चुनाव के विपरीत था जब एक भी मुस्लिम उम्मीदवार जीतने में कामयाब नहीं हुआ था।

AIMIM ने शुरू की चुनाव की तैयारी

एआईएमआईएम ने यूपी में 2022 के चुनाव के लिए अपनी तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी ने विधायक उम्मीदवार का आवेदन पत्र जारी किया है, जिसमें 'वफादारी अनुबंध' शामिल है। इस अनुबंध के अनुसार, आवेदक को पार्टी के लिए ईमानदारी से काम करना होगा और चुनाव लड़ने के लिए टिकट न मिलने की स्थिति में भी उसके लिए प्रचार करना होगा। एआईएमआईएम यूपी की 403 सीटों में से करीब 100 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए खुद को तैयार कर रही है।

एआईएमआईएम की राज्य इकाई के अध्यक्ष शौकत अली कहते हैं कि,

"यदि हमारे साथ किसी पार्टी का गठबंधन होता है तो अलग बात है नहीं तो हम 100 क्या 150 सीटों पर भी चुनाव लड़ेंगे। मुसलमानों को हमेशा से ही अछूत समझा जाता है। राजनीतिक दलों को मुसलमानों का वोट तो जरूर चाहिए लेकिन उनकी लीडरशिप से उनको परहेज होता है। बीजेपी को रोकने का ठेका थोड़े ही ले रखा है। फिर हमें क्या सोचना है। यह जिम्मेदारी तो सपा, बसपा और कांग्रेस की भी है। पिछले लोकसभा चुनाव में तो हम चुनाव तो नहीं लड़े थे फिर बीजेपी को इतनी सीटें कैसे मिल गईं।"

शौकत अली ने चुनावी तैयारियों को लेकर कहा कि अब तक हमारे से 70 लोगों के आवेदन चुनाव लड़ने के लिए आए हैं जिनमें पश्चिमी उप्र, पूर्वांचल, रूहेलखंड और बुंदेलखंड सभी क्षेत्रों से शामिल हैं। यह चुनाव पूरी मजबूती के साथ लड़ा जाएगा। हमने पार्टी में आवेदन शुल्क दस हजार रुपए रखा है। सहुेलदेव पार्टी के साथ गठबंधन भी अब समाप्त हो गया है कि भागीदारी मोर्चा के कन्वीनर ने ही कह दिया है कि वो हमारे साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ेंगे।

यूपी में 19 फीसदी आबादी है मुस्लिमों की

उत्तर प्रदेश की कुल आबादी में मुसलमानों की संख्या 19 प्रतिशत है, फिर भी मुस्लिम उम्मीदवारों ने राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से केवल 10 प्रतिशत से कम पर जीत हासिल की है। हिंदवी कहते हैं, ''आप देखेंगे कि विधानसभा चुनाव में हार का अंतर 1000 और 500 के बीच भी रहता है। रही बात अखिलेश यादव की तो मुझे नहीं लगता कि इतनी जल्दी वो इस तरह के गठबंधन पर विचार करेंगे। क्योंकि उनके मन में एक डर हमेशा बना रहेगा कि कहीं चुनाव के बाद ओवैसी पाला न बदल लें।"

पिछले विधानसभा में मिले थे 2.46 फीसदी वोट

2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 38 उम्मीदवारों में से 2.46 प्रतिशत वोट प्राप्त किए थे, लेकिन सहारनपुर को छोड़कर, 37 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। यूपी में मुख्य विपक्षी दलों के बीच अलग-थलग पड़े ओवैसी कोई खतरा पैदा नहीं कर पाएंगे क्योंकि वह बिहार में करने में सक्षम थे

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