यूपी में जीरो सीट वाली AAP, अखिलेश के लिए क्यों हुई जरूरी? समझिए पूरी कहानी

उत्तर प्रदेश में जीरो सीट वाली आम आदमी पार्टी अचानक अखिलेश यादव के लिए क्यों जरूरी हो गई है?

लखनऊ, 29 नवंबर: यूपी चुनाव का बिगुल बजने में अब चंद महीनों का ही वक्त बचा है और सियासी दलों ने अपनी-अपनी किलेबंदी शुरू कर दी है। हिंदुत्व और विकास के मुद्दे को सामने रख भारतीय जनता पार्टी दावा कर रही है कि वो इस बार भी देश के सबसे बड़े सूबे यानी उत्तर प्रदेश में 300 से ज्यादा सीटें हासिल करेगी। वहीं, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव अपनी तय रणनीति के तहत सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला बनाने में जुटे हैं और छोटे दलों के साथ गठबंधन कर रहे हैं। इस बीच आम आदमी पार्टी के साथ सपा की नजदीकी ने यूपी के सियासी माहौल को और गरम कर दिया है। आइए समझते हैं कि उत्तर प्रदेश में जीरो सीट वाली आम आदमी पार्टी अचानक अखिलेश यादव के लिए क्यों जरूरी हो गई है?

तीन निशाने साधने की तैयारी में अखिलेश

तीन निशाने साधने की तैयारी में अखिलेश

अखिलेश यादव ने यूपी में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट शुरू होने के साथ ही ऐलान कर दिया था कि वो बहुजन समाज पार्टी या कांग्रेस जैसे बड़े दलों के साथ कोई गठबंधन नहीं करेंगे। हालांकि अखिलेश ने कहा कि उनका पूरा फोकस प्रदेश के छोटे दलों को साथ लेकर चुनाव लड़ने पर होगा। ऐसे में आम आदमी पार्टी, जिसके पास यूपी में एक भी सीट नहीं है, के साथ अखिलेश की नजदीकी एक बड़े सियासी प्लान की तरफ इशारा कर रही है। दरअसल अखिलेश यादव यूपी में आम आदमी पार्टी के जरिए तीन निशाने साधने की तैयारी में हैं।

1:- सपा को BJP का एकमात्र विकल्प दिखाने की कोशिश

1:- सपा को BJP का एकमात्र विकल्प दिखाने की कोशिश

अखिलेश यादव चाहते हैं कि 2022 के यूपी चुनाव में समाजवादी पार्टी भाजपा के सामने एकमात्र मजबूत विकल्प के तौर पर नजर आए। अपनी इस कोशिश को अंजाम देने में अखिलेश यादव कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते और भाजपा विरोधी सभी दलों को सपा का हिस्सा बनाने में जुटे हैं। वेस्ट यूपी में किसान आंदोलन के बाद भाजपा के लिए बदले समीकरणों में जहां अखिलेश यादव आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी को साथ ले चुके हैं, वहीं पूर्वांचल में भी उन्होंने ओमप्रकाश राजभर के साथ गठबंधन किया है। माना जा रहा है कि टीएमसी के साथ भी अखिलेश कुछ सीटों पर बातचीत कर सकते हैं। इसके अलावा हाल ही में आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर के साथ भी उनकी मुलाकात चर्चाओं में है। ऐसे में आम आदमी पार्टी से अखिलेश यादव की नजदीकी उनकी उसी कोशिश का हिस्सा है, जिसमें वो सभी भाजपा विरोधी दलों को एक मंच पर लाना चाहते हैं।

2:- बसपा और कांग्रेस को गेम से बाहर करने की तैयारी

2:- बसपा और कांग्रेस को गेम से बाहर करने की तैयारी

हाल ही में आए कई चुनावी सर्वे के नतीजों को देखें तो यूपी में भाजपा के बाद अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी दूसरे सबसे बड़े सियासी दल के तौर पर सामने आ रही है। इन नतीजों में बहुजन समाज पार्टी जहां 20 सीटों के आसपास सिमटती हुई नजर आ रही है, वहीं कांग्रेस भी 2017 के मुकाबले कुछ खास करती हुई नहीं दिख रही। लेकिन, अखिलेश यादव नहीं चाहते कि इन 20-30 सीटों के अलावा ये दोनों दल प्रदेश की बाकी सीटों पर उनके लिए कोई मुश्किल खड़ी करें। 2017 के चुनाव नतीजों पर नजर डालें तो ऐसी कई सीटें थीं, जहां या तो बहुजन समाज पार्टी भाजपा के सामने दूसरे नंबर पर रही, या फिर उसे मिले वोटों की संख्या भाजपा और सपा के बीच हार के अंतर से ज्यादा रही। अखिलेश की कोशिश है कि दिल्ली में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी को साथ लेकर वो ये संदेश दे पाएं कि यूपी में मुकाबला केवल भाजपा गठबंधन और सपा गठबंधन के बीच है। ताकि, बीएसपी और कांग्रेस से उन्हें होने वाला नुकसान कम से कम हो।

3:- सवर्ण वोटों को साधने की कोशिश में अखिलेश

3:- सवर्ण वोटों को साधने की कोशिश में अखिलेश

यूपी चुनाव में अखिलेश यादव पूरी तरह से सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं। अखिलेश यादव की हाल के दिनों की रणनीति पर गौर करें तो उनकी चुनावी लाइन दलित, ओबीसी और मुस्लिम वोटों को साधने पर नजर आती है। अगर आम आदमी पार्टी के साथ यूपी में समाजवादी पार्टी का गठबंधन होता है, तो अखिलेश यादव के मंच पर एक ऐसी पार्टी के सवर्ण चेहरे नजर आएंगे, जो मौजूदा समय में शहरी क्षेत्रों की पार्टी है। हालांकि फिलहाल यूपी में आम आदमी पार्टी का वजूद ना के बराबर है, लेकिन उसे साथ लेकर अखिलेश यादव भाजपा को कुछ हद तक डिफेंसिव होने पर मजबूर कर सकते हैं।

ये भी पढ़ें- 7 साल में 105 कलाकृतियां और प्राचीन धरोहर विदेशों से वापस आए, UPA के 10 साल का आंकड़ा देखिए

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+