Gyanvapi Mosque: ज्ञानवापी में ASI सर्वे सुबह 8 से दोपहर 12 बजे के बीच ही क्यों होगा? जानिए वजह
ज्ञानवापी मस्जिद की कार्बन डेटिंग की अनुमति मिल गई है। हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले विष्णु शंकर जैन की याचिका पर वाराणसी की एक अदालत ने सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया है।
वाराणसी की एक अदालत ने शुक्रवार को काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद की कार्बन डेटिंग की अनुमति दे दी है। विवादित शिवलिंग संरचना को छोड़कर परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किया जाएगा।
मामले में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले विष्णु शंकर जैन ने एक याचिका दायर की थी, जिसमें अदालत से एएसआई को पूरे ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। विष्णु शंकर जैन ने बताया कि मुझे सूचित किया गया है कि मेरा आवेदन मंजूर कर लिया गया है। अदालत ने वजू टैंक को छोड़कर, ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का एएसआई सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया है। जिसे सील कर दिया गया है। सुबह 8 से दोपहर 12 बजे के वक्त क्यों होगा सर्वेक्षण ?

विष्णु शंकर जैन ने यह भी बताया कि सुबह 8 से दोपहर 12 बजे के वक्त मस्जिद खाली रहती है। इस वक्त में एएसआई सर्वेक्षण किया जाएगा। जिससे किसी की भी नमाज बाधित नहीं होगी। एएसआई की परिधि में बहुत सारी मॉडल टेक्निक का इस्तेमाल किया जाएगा। जियोलॉजिस्ट भी आएंगे। एएसआई के साइंटिस्ट भी आएंगे। अनुमान है कि तीन से 6 महीने के अंदर सर्वे की एक्सरसाइज पूरी होगी।
दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला
मई में याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत होने के बाद अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद समिति को हिंदू पक्ष द्वारा दी गई दलीलों पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आज का फैसला आया है। कोर्ट में जैन ने दलील दी कि काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद को पूरे मस्जिद परिसर की पुरातात्विक जांच से ही सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी परिसर के तीन गुंबदों, परिसर की पश्चिमी दीवार और पूरे परिसर की आधुनिक तरीके से जांच करने पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
मई में, सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई से कहा कि वह ज्ञानवापी मस्जिद-काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के अंदर विवादित 'शिवलिंग' ढांचे की कार्बन डेटिंग न करे। इसने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें यह पता लगाने के लिए वैज्ञानिक जांच की अनुमति दी गई थी कि संरचना 'शिवलिंग' है या फव्वारा है।












Click it and Unblock the Notifications