Bihar Crime News: प्रेमी-प्रेमिका को फांसी की सजा, कोर्ट ने कहा- 'ऐसे दरिंदों को समाज में जीने का अधिकार नहीं'
Madhubani Court Hanging sentence: बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर कोर्ट ने दो मासूम बच्चों की हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उनकी मां अनिता कुमारी और उसके प्रेमी जयप्रकाश मंडल को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस जघन्य अपराध को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' श्रेणी का बताया।
कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों ने अपने ही मासूम बच्चों की बेरहमी से हत्या की, वे समाज में रहने के योग्य नहीं हैं। कोर्ट के इस फैसले को न्याय की बड़ी मिसाल माना जा रहा है।

Bihar mother killed own children: प्रेम संबंध के लिए रची गई खौफनाक साजिश
मामला मधुबनी जिले के झंझारपुर अनुमंडल के नहरी गांव का है। वर्ष 2018 में प्रमोद कुमार साफी की शादी अनिता कुमारी से हुई थी। शादी के बाद प्रमोद काम के सिलसिले में कोलकाता चला गया। इसी दौरान अनिता की पहचान गांव के जयप्रकाश मंडल से हुई और दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए। बताया गया कि दोनों साथ रहना चाहते थे, लेकिन अनिता के दो छोटे बच्चे उनके रास्ते की सबसे बड़ी बाधा थे। इसी वजह से दोनों ने बच्चों की हत्या की साजिश रची।
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मायके जाने के बहाने बच्चों को ले गई
3 जुलाई 2023 को अनिता अपने चार साल के बेटे प्रिंस कुमार और डेढ़ साल की बेटी सृष्टि कुमारी को लेकर मायके जाने की बात कहकर घर से निकली। रास्ते में बलान नदी के खाप पुल के पास उसका प्रेमी जयप्रकाश पहले से मौजूद था। वहीं दोनों ने मिलकर बच्चों का गला घोंट दिया और शव नदी में फेंक दिए। इस दौरान आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों को दोनों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं, जिसके बाद उन्होंने पीछा कर दोनों को पकड़ लिया।
ग्रामीणों की सतर्कता से खुला पूरा मामला
ग्रामीणों ने दोनों को पकड़कर पहले पूछताछ की और फिर पुलिस के हवाले कर दिया। प्रमोद कुमार साफी की शिकायत पर घोंघरडीहा थाना में हत्या का मामला दर्ज हुआ। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की। उनकी निशानदेही पर नदी में शव की तलाश शुरू हुई। सात दिन बाद बेटी सृष्टि का शव बरामद हुआ, लेकिन बेटे प्रिंस का शव आज तक नहीं मिल सका। पुलिस ने मजबूत सबूत जुटाकर अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय अभिषेक रंजन ने 28 पन्नों के फैसले में दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 201 और 34 के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने कहा कि मां पर बच्चों की रक्षा की जिम्मेदारी होती है, लेकिन उसने ही प्रेमी के साथ मिलकर उनकी हत्या कर दी। कोर्ट ने इस अपराध को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मानते हुए दोनों को फांसी की सजा सुनाई। यह झंझारपुर कोर्ट के इतिहास का पहला मृत्युदंड वाला फैसला है।
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फांसी के साथ जुर्माना और दूसरी सजा भी
अदालत ने दोनों दोषियों पर हत्या के मामले में 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर छह महीने अतिरिक्त जेल की सजा भुगतनी होगी। इसके अलावा सबूत मिटाने के आरोप में धारा 201/34 के तहत सात-सात साल के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर तीन महीने अतिरिक्त जेल की सजा का भी आदेश दिया गया है।
पिता बोले- बच्चों की याद आज भी रुला देती है
फैसले के बाद बच्चों के पिता प्रमोद कुमार साफी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने दूसरी शादी कर ली है और अब छह महीने का एक बेटा भी है, लेकिन पहली पत्नी की करतूत और अपने दोनों मासूम बच्चों की मौत का दर्द आज भी कम नहीं हुआ है। बच्चों को याद करते हुए उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने अदालत का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और अब सिर्फ यही चाहते हैं कि दोषियों को जल्द सजा मिले।
अब आगे क्या होगी कानूनी प्रक्रिया
फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को झंझारपुर उपकारा से किसी केंद्रीय जेल में भेजा जाएगा, क्योंकि उपकारा में लंबी अवधि की सजा पाने वाले कैदियों को रखने का प्रावधान नहीं है। कानून के मुताबिक मृत्युदंड पर अंतिम मुहर पटना हाईकोर्ट लगाएगा। इसके लिए ट्रायल कोर्ट ने सभी दस्तावेज और 28 पन्नों का फैसला हाईकोर्ट भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हाईकोर्ट की पुष्टि के बाद ही फांसी की सजा को अंतिम रूप दिया जाएगा।












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