Bihar Village Tax: बिहार के गांवों में टैक्स वसूली की तैयारी, हर परिवार को साल में ₹1200 देने होंगे

Bihar Village Tax: बिहार के गांवों में जल्द ही हर घर से सालाना औसतन 1200 रुपये तक टैक्स वसूले जाने की चर्चा तेज हो गई है। यह प्रस्ताव 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की उस सिफारिश से जुड़ा है, जिसमें पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया है। सरकार का कहना है कि गांवों में सड़क, सफाई, स्ट्रीट लाइट और पेयजल जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पंचायतों के पास अपनी आय होना जरूरी है।

हालांकि, इस प्रस्ताव का बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने विरोध किया है। राज्य का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में ऐसी अनिवार्य टैक्स व्यवस्था लागू करना लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकता है।

Bihar Village Tax

हर घर से टैक्स लेने की तैयारी क्यों?

16वें केंद्रीय वित्त आयोग ने सुझाव दिया है कि पंचायतों की अपनी आय बढ़ाई जाए ताकि वे सरकारी अनुदान पर कम निर्भर रहें। इसी के तहत हर घर से औसतन 1200 रुपये सालाना टैक्स वसूलने की बात सामने आई है। सरकार का मानना है कि जब पंचायतों के पास अपना राजस्व होगा, तब वे गांवों में विकास कार्यों पर अधिक खर्च कर सकेंगी और स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा पाएंगी।

किन सुविधाओं के लिए देना होगा शुल्क?

नई व्यवस्था लागू होने पर ग्रामीणों से सिर्फ होल्डिंग टैक्स ही नहीं लिया जाएगा। पानी की आपूर्ति, सफाई व्यवस्था और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं के लिए भी अलग से शुल्क लिया जा सकता है। इसके अलावा 'हर घर नल का जल' योजना के तहत मिलने वाले पेयजल के लिए भी अनिवार्य शुल्क का प्रावधान किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इन सेवाओं के रखरखाव के लिए नियमित आय जरूरी है।

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सभी घरों पर एक जैसा टैक्स नहीं लगेगा

सरकार ने साफ किया है कि सभी मकानों पर एक समान टैक्स नहीं लगाया जाएगा। सामान्य आवासीय भवनों पर कम टैक्स होगा, जबकि दुकान, गोदाम या अन्य व्यावसायिक उपयोग वाले भवनों से अधिक शुल्क लिया जाएगा। मुख्य सड़क या बाजार क्षेत्र में स्थित मकानों पर भी सामान्य गांवों की तुलना में ज्यादा टैक्स लग सकता है। यानी टैक्स की राशि भवन के उपयोग और स्थान के आधार पर तय की जाएगी।

पंचायतों को क्या होगा फायदा?

अभी अधिकांश पंचायतें विकास कार्यों के लिए सरकारी अनुदान पर निर्भर रहती हैं। यदि पंचायतों की अपनी आय बढ़ती है तो वे सड़क, नाली, सफाई, स्ट्रीट लाइट, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर तेजी से काम कर सकेंगी। साथ ही छोटे-मोटे विकास कार्यों के लिए उन्हें हर बार सरकारी फंड का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सरकार का मानना है कि इससे पंचायतें आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बनेंगी।

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बिहार सरकार ने क्यों जताई आपत्ति?

इस प्रस्ताव को लेकर बिहार सरकार ने केंद्र के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। नई दिल्ली में हुई 16वें वित्त आयोग की राष्ट्रीय कार्यशाला में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि हर घर से सालाना 1200 रुपये टैक्स वसूलने की अनिवार्य शर्त को हटाया या नरम किया जाना चाहिए। बिहार के साथ उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ ने भी इस शर्त का विरोध किया है। राज्यों का कहना है कि ग्रामीण परिवारों पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।

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