'मेरी बर्खास्तगी BJP के विजय रथ के ताबूत की आखिरी कील', कौन हैं कॉन्स्टेबल Sunil Kumar Shukla? क्यों बर्खास्त?

Lucknow Constable Sunil Kumar Shukla Dismissed Reason: उत्तर प्रदेश पुलिस में तैनात एक साधारण कॉन्स्टेबल सुनील कुमार शुक्ला ने विभागीय भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा करने की कोशिश की, लेकिन नतीजा उल्टा निकला। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में उन्होंने IPS अधिकारियों समेत ऊपरी अमले पर ड्यूटी लगाने के नाम पर 2000 रुपये वसूली का आरोप लगाया।

आरोपों के सबूत न मिलने और अनुशासनहीनता के चलते उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। यह मामला पुलिस विभाग की आंतरिक व्यवस्था, सोशल मीडिया नीति और अनुशासन की बहस छेड़ गया है। आइए विस्तार से समझें...

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Who Is Sunil Kumar Shukla: सुनील कुमार शुक्ला कौन हैं?

सुनील कुमार शुक्ला लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइन्स में तैनात कॉन्स्टेबल थे। उन्होंने 7 मई, 8 मई और 10 मई 2026 को फेसबुक पर तीन वीडियो जारी किए। इनमें उन्होंने दावा किया कि लखनऊ कमिश्नरेट में 'भ्रष्ट सामंती व्यवस्था' चल रही है।

उनके अनुसार, गार्ड ड्यूटी लगाने के लिए हर बार 2000 रुपये देने पड़ते हैं। गार्ड कमांडर के जरिए सिपाहियों और हेड कॉन्स्टेबल से वसूली की जाती है, जो ऊपर तक पहुंचाई जाती है। उन्होंने 110-120 गार्ड की जगह 500-550 ड्यूटी बताई और करीब 8 लाख रुपये मासिक उगाही का आंकड़ा दिया।

शुक्ला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) से सीधे हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने की अपील की थी। उनका कहना था कि विभागीय जांच में न्याय नहीं मिलेगा।

'मेरी बर्खास्तगी BJP के विजय रथ के ताबूत की आखिरी कील'

Sunil Kumar Shukla Allegations: क्या था आरोपों का आधार?

शुक्ला ने दावा किया कि रिजर्व पुलिस लाइन्स में गणना शाखा में अनियमितताएं हैं। ड्यूटी आवंटन में Favoritism और वसूली चलती है। IPS अधिकारी इस व्यवस्था में शामिल हैं। वीडियो वायरल होने के बाद विभाग ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।

विभाग की प्रतिक्रिया और जांच जानें...

लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने आरोपों को खारिज किया। तैनाती SOP (Standard Operating Procedure) के अनुसार होती है, जो गजेटेड अधिकारियों की देखरेख में होती है। 7 मई को जांच समिति गठित की गई। समिति ने संबंधित कर्मियों के बयान दर्ज किए और शुक्ला को अपना पक्ष रखने का मौका दिया।

शुक्ला अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं पेश कर सके। उन्होंने बिना अनुमति सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया। वरिष्ठ अधिकारियों पर बेबुनियाद आरोप लगाकर विभाग की छवि खराब करने की कोशिश की। अनुशासनहीनता को बढ़ावा दिया और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया।

Sunil Kumar Shukla Dismissed Reason:बर्खास्तगी के कारण

28 जून को जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि सुनील कुमार शुक्ला को निम्न कारणों से बर्खास्त किया गया:

  • उत्तर प्रदेश सोशल मीडिया नीति-2023 का उल्लंघन
  • उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली-1956 (नियम 3, 6, 7, 27) का उल्लंघन
  • उत्तर प्रदेश यूनिफॉर्म रेगुलेशन का उल्लंघन
  • दुर्व्यवहार के साबित कृत्य

20 दिन की छुट्टी पर भेजे जाने और गणना शाखा के 12 कर्मियों को हटाए जाने के बाद अंतिम कार्रवाई हुई।

पुलिस विभाग का पक्ष क्या है?

कमिश्नरेट ने साफ किया कि तैनाती पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया से होती है। भ्रष्टाचार के आरोप बेबुनियाद हैं। विभाग ने कहा कि आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र उपलब्ध है, लेकिन शुक्ला ने सीधे सोशल मीडिया का रास्ता चुना।

सुनील कुमार शुक्ला का मामला एक साधारण कॉन्स्टेबल की हिम्मत और उसके परिणाम का उदाहरण है। उन्होंने जो कहा, उसके सबूत नहीं मिले, इसलिए विभाग ने सख्त कार्रवाई की। लेकिन यह घटना पुलिस व्यवस्था में सुधार की मांग को दोहराती है।

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