कौन हैं किन्नर काजल और किन्नर सुमन? भगवान राम के विग्रह प्रतिष्ठा का शुभ शुगुन घर-घर तक पहुंचाएंगी
राम मंदिर में 22 जनवरी को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की जानी है। उत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं। इस उत्सव में किन्नरों का भी बेहद अहम योगदान होगा। श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा का शुभ शगुन लेकर किन्नर भी आएंगे। वो सभी से प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल होने का अनुरोध करेंगे।
रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर किन्नरों का समूह काफी उत्साहित है। उन्होंने उत्सव में अपनी भूमिका भी तय कर ली है। इंदिरा चैरिटेबल ट्रस्ट की मदद से किन्नर भी विग्रह प्रतिष्ठा का न्योता बांटेंगे। संस्था श्रीराम जन्म भूमि न्यास समिति से संपर्क कर किन्नरों को अवध का हल्दी और अक्षत उपलब्ध कराएगी।

इस कार्यक्रम की अगुआई किन्नर काजल और किन्नर सुमन करेंगी। उनके नेतृत्व में सभी किन्नर अपने-अपने क्षेत्र के यजमान के घर जाएंगे। द्वार- द्वार मंगल चारण और शुगुन लेकर वो सभी से प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल होने का आग्रह करेंगे।
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कौन हैं किन्नर काजल और किन्नर सुमन?
किन्नर काजल और सुमन उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं। रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा उत्सव में किन्नार समाज मिल कर घर-घर जा कर शगुन बांटेगा और लोगों से उत्सव में शामिल होने के लिए आमंत्रित करेगा। किन्नर काजल और किन्नर सुमन इस शगुन और आमंत्रण कार्यक्रम की अगुआई करेंगी।
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क्या है किन्नरों और भगवान राम का नाता?
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब श्री राम माता सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास के लिए चले गए थे और भारत पूरी प्रजा के साथ उन्हें वापस लौटने के लिए वन में मनाने गए थे तब अयोध्या की पूरी प्रजा उनके साथ गई थी। प्रजा ने जिद पकड़ ली थी कि वो भी श्री राम के साथ वन में रहेगी। तब श्री राम ने आदेश दिया कि जो भी नर-नारी उनसे प्रेम करते हैं वो वापस अयोध्या लौट जाएं।
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श्री राम का आदेश पाकर सभी नर-नारी भारी मन से वापस लौट गए लेकिन सभी किन्नर वहीं बैठे रहे। अपना वनवास पूरा करने के बाद जब श्री राम वापस लौटे तो उन्होंने देखा कि 14 साल से वो सभी किन्नर उनका उसी स्थान पर इंतजार कर रह थे। ये देख भगवान राम ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि किन्नरों के आशीर्वाद में बहुत ताकत होगी और उनके श्राप में उतनी ही ज्यादा तबाही।
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