Exit Poll- आखिर क्यों यूपी में अखिलेश यादव के पैरों के नीचे से जमीन निकल गई?
आखिर क्यों उत्तर प्रदेश के चुनाव में अखिलेश यादव को एग्जिट पोल में मिली इतनी बड़ी हार, एग्जिट पोल के आंकड़े अखिलेश के लिए बढ़ाएंगे मुश्किल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजों के आने से पहले तमाम एग्जिट पोल के नतीजों ने साफ किया है कि यूपी में भाजपा पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी। एग्जिट पोल के नतीजों पर अगर यकीन करें तो चुनाव से पहले अखिलेश यादव के पक्ष में माहौल था, लेकिन चुनावों के बाद यह पूरी तरह से बदल गया है। तमाम एग्जिट पोल जो सामने आए हैं उसके हिसाब से भाजपा को औसतन हर पोल ने 210 सीटें दी है यानि पार्टी की पूर्ण बहुमत क सरकार बनेगी।

आखि क्यों अखिलेश की लोकप्रियता काम नहीं आई?
मतदान सर्वेक्षकों की मानें तो अगर समाजवादी पार्टी चुनाव हारती है तो इसके पीछे की दो बड़ी वजह होगी एक तो अखिलेश यादव को कांग्रेस से दूर रहना चाहिए था और उन्हें राहुल गांधी के साथ हाथ नहीं मिलाना चाहिए था, एग्जिट पोल की मानें तो कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से पार्टी की छवि को काफी नुकसान हुआ और अखिलेश यादव की लोकप्रियता के बावजूद लोगों ने सपा के खिलाफ वोट किया।

परिवार का विवाद महंगा पड़ा
वहीं अगर दूसरी वजह पर नजर डालें तो समाजवादी पार्टी के भीतर जिस तरह से अखिलेश यादव ने पार्टी के चुनाव चिन्ह की लड़ाई चुनाव आयोग में जीती उसके बाद उन्हें अपने चाचा शिवपाल यादव से नजदीकी बढ़ानी चाहिए थी और उनके साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए था। यूपी के चुनाव प्रचार में जिस तरह से अखिलेश यादव ने अपनी पूरी ताकत झोंकी और मुलायम सिंह यादव व शिवपाल यादव ने इससे दूरी बनाए रखी उसने पार्टी को काफी नुकसान पहुंचाया है।

चाचा के खिलाफ जाना पड़ा महंगा
शिवपाल यादव से दूरी बनाकर अखिलेश यादव यह दिखाना चाहते थे कि वह पार्टी के भीतर किसी अन्य ठग की जगह नहीं है और वह पार्टी को साफ छवि देने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जिस वक्त अखिलेश यादव यह सब कर रहे थे उनके चेहरे पर कभी भी रिश्तों के टूटने की टीस नहीं दिखी जिसने लोगों के बीच नकारात्मक संदेश देने का काम किया। जिस तरह से शिवपाल और मुलायम परिवार के भीतर विवाद के बाद काफी दुखी दिखाई दे रहे थे उसने यह संदेश पहुंचाने का काम किया कि इनके साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था।

मुस्लिम वोटों की राजनीति हुई बेकार
परिवार के विवाद के बाद अखिलेश ने पार्टी की कमान अपने हाथों में ली और उन्होंने मुस्लिम वोटों के बिखराव को रोकने के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन किया, लेकिन इसके बाद भी सपा को मुस्लिम वोटों का खास फायदा नहीं हुआ, एग्जिट पोल की मानें तो इस गठबंधन को मुस्लिम वोटों का सिर्फ 70 फीसदी ही हासिल होगा, यह प्रतिशत 2012 के ही बराबर है, यानि कि कांग्रेस के साथ गठबंधन का सपा को कोई लाभ नहीं हुआ।












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