प्रियंका गांधी ने ऐसा क्या किया कि सपा-कांग्रेस में बन गई बिगड़ी बात?

समाजवादी पार्टी आखिरकार यूपी में कांग्रेस के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर राजी हो गई है। अब यह तय हो गया है कि दोनों ही पार्टियां लोकसभा चुनाव इंडिया ब्लॉक में ही रहकर लड़ेंगी। एक दिन पहले तक जो गठबंधन टूटता नजर आ रहा था, उसके बारे में जानकारी है कि वह कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की दखल की वजह से बच गया है।

पहले सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने दोनों दलों के बीच डील हो जाने को लेकर सकारात्मक संकेत दिया था। कुछ घंटे के बाद कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी।

priyanka gandhi

यूपी में 17 सीटों पर लड़ेगी कांग्रेस-कांग्रेस प्रभारी
उन्होंने कहा, 'मुझे आपको यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि यह फैसला हुआ है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस 17 सीटों पर लड़ेगी और बाकी 63 सीटों पर समाजवादी पार्टी समेत इंडिया ब्लॉक के अन्य उम्मीदवार उतरेंगे।' हालांकि, उन्होंने सीटों के बंटवारे की विस्तृत जानकारी नहीं दी है।

अखिलेश ने यात्रा में शामिल होने के लिए रख दी थी शर्त
इससे पहले दोनों पार्टियों में सीटों के बंटवारे को लेकर तल्खी इतनी बढ़ गई थी कि अखिलेश यादव ने यहां तक कह दिया था कि बिना यह मुद्दा हल हुए, वे राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में शामिल नहीं होंगे। वे न तो अमेठी में और न ही रायबरेली में इस यात्रा में शामिल हुए।

अंत भला तो सब भला- अखिलेश यादव
लेकिन, बुधवार को अखिलेश के चेहरे में मुस्कुराहट थी और उन्होंने मुरादाबाद में मीडिया वालों से कहा कि 'अंत भला तो सब भला...'। हालांकि, कांग्रेस नेता ने कभी भी सीट बंटवारे को लेकर उम्मीद नहीं छोड़ी थी और उन्हें लग रहा था कि वह आखिरकार सपा सुप्रीमो को मनाने में सफल हो ही जाएंगे।

प्रियंका गांधी के फोन कॉल ने बनाई बात!
सूत्रों का कहना है कि बुधवार सुबह में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने अखिलेश यादव से फोन पर दोनों दलों के बीच गतिरोध खत्म करने के लिए बात की थी। जानकारी के अनुसार 17 सीटों पर लड़ने के लिए कांग्रेस पहले भी राजी थी, लेकिन कुछ सीटों को लेकर वह अड़ी हुई थी।

जानकारी के मुताबिक कांग्रेस को लगता था कि सपा ने जिन सीटों का ऑफर दिया है, उनमें से कुछ पर वह नहीं जीत पाएगी, इसलिए वह जीतने लायक सीट लेने का दबाव बना रही थी। इसी वजह से देरी हो रही थी और सपा ने वाराणसी समेत कम से कम 35 सीटों पर उम्मीदवारों की भी घोषणा कर दी थी।

इन सीटों पर लड़ सकती है कांग्रेस
लेकिन, अखिलेश और प्रियंका के बीच हुई बातचीत के बाद अब माना जा रहा है कि कांग्रेस को वाराणसी समेत सीतापुर, बाराबंकी, कानपुर, सहारनपुर, अमरोहा, फतेहपुर सीकरी,श्रावस्ती और झांसी की भी सीटें मिलेंगी।

मुरादाबाद सीट पर फंसी थी बात!
सूत्रों का कहना है कि अखिलेश ने तब नरम रुख दिखाया, जब कांग्रेस ने मुरादाबाद सीट की जिद छोड़ दी। 2019 में मुरादाबाद सीट पर समाजवादी पार्टी की जीत हुई थी, इसलिए अखिलेश उसे छोड़ने के लिए राजी नहीं थे और बात यहीं बिगड़ने लगी थी। (इनपुट-एजेंसियां)

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